पुराना नर्मदा जल विवाद खत्म, गुजरात को एमपी देगा 550 करोड़ रुपए, चार राज्यों के सीएम ने किया साइन

भोपाल: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में ऐतिहासिक नर्मदा जल विवाद का समझौता हो गया है। नर्मदा जल समझौता के दौरान चार राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे हैं। यह समझौता महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच हुआ है। सभी मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
मील का पत्थर साबित होगा यह समझौता
यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है।
महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबे समय से नर्मदा अवॉर्ड के लंबित भुगतान का विवाद चल रहा था, जिसका आज सौहार्दपूर्ण समाधान निकल गया है।
अमित शाह, गृह मंत्री
दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में अनेक राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ यह हुआ है कि हम में एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है, राजनीतिक मुद्दे कम हुए हैं और देश के अनेक विवाद अब तेजी से सुलझाए जा रहे हैं।
इन राज्यों को हुआ लाभ
मंत्री शाह ने कहा कि इस परियोजना से विशेषकर मध्यप्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान को बहुत लाभ हुआ। बांध पूरा होने से इन राज्यों में हर जगह पानी और बिजली पहुंची। उन्होंने कहा कि राजस्थान को हुआ लाभ दिखने में छोटा लग सकता है, पर जिस भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां भूमि का मूल्य और किसान की किस्मत दोनों बदल गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल के नेतृत्व में देश में चल रहे जल विवाद या जल वितरण से जुड़े विवाद एक-एक कर सुलझाए जा रहे हैं।
गुजरात को एमपी देगा 550 करोड़ रुपए
वहीं, इस समौझते में यह तय हुआ है कि मध्य प्रदेश समेत तीनों भागीदार राज्य गुजरात को 550-550 करोड़ रुपए देंगे। गुजराज को कुल 1650 करोड़ रुपए मिलेंगे।
डैम से एमपी को हुआ है नुकसान
दरअसल, नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर डैम का निर्माण गुजरात ने करवाया था। लेकिन जमीन सबसे अधिक एमपी की डूबी। जंगल से लेकर खेती की जमीन तक शामिल है। 178 गांव भी उजड़े हैं। इसके लिए एमपी लगातार मुआवजे की राशि की मांग करता रहा है। वहीं, गुजरात बढ़ी हुई राशि की मांग एमपी से करता रहा है। इसकी वजह से यह विवाद 30 सालों से चल रहा था।
मध्य प्रदेश का यह था दावा
विवाद के दौरान मध्य प्रदेश यह दावा कर रहा था कि सबसे ज्यादा डैम के कारण हमारे गांव तबाह हुए हैं। जंगल डूबे हैं। इननके पुनर्वास के लिए 7669 करोड़ रुपए की आवश्यकता है। लेकिन यह दावा खारिज हो गया और उल्टे मध्य प्रदेश को ही 550 करोड़ रुपए देने होंगे।
गुजरात के कंट्रोल में है डैम
सरदार सरोवर डैम का पूरी तरह से कंट्रोल गुजरात के पास है। साथ ही इसका सबसे अधिक लाभ भी उसे ही मिलता है। डैम के डूब क्षेत्र में कुल 37,533 हेक्टेयर जमीन है। इसमें 55.5 फीसदी एमपी की है।



