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मातंगी जयंती, कवच पाठ से पाएं सफलता, शांति और ज्ञान

Matangi Jayanti 2026: आज 20 अप्रैल, सोमवार को मातंगी जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है. मां मातंगी का तंत्र शास्त्र में विशेष स्थान है और वह दस महाविद्याओं में नवां स्थान रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मां मातंगी का अवतरण हुआ था. इसलिए इस दिन को माता के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. मां मातंगी को ‘तंत्र की सरस्वती’ भी कहा जाता है. वह वाणी, संगीत, कला और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं. आज के दिन ‘महाविद्या मातंगी कवच’ का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है.

मां मातंगी कवच

ॐ शिरो मातंगिनी पातु, भुवनेशी तु चक्षुषी .

तोडला कर्ण-युगलं, त्रिपुरा वदनं मम ॥

पातु कण्ठे महा-माया, हृदि माहेश्वरी तथा .

त्रि-पुष्पा पार्श्वयोः पातु, गुदे कामेश्वरी मम ॥

ऊरु-द्वये तथा चण्डी, जंघयोश्च हर-प्रिया .

महा-माया माद-युग्मे, सर्वांगेषु कुलेश्वरी ॥

अंग प्रत्यंगकं चैव, सदा रक्षतु वैष्णवी .

ब्रह्म-रन्घ्रे सदा रक्षेन्, मातंगी नाम-संस्थिता ॥

रक्षेन्नित्यं ललाटे सा, महा-पिशाचिनीति च .

नेत्रयोः सुमुखी रक्षेत्, देवी रक्षतु नासिकाम् ॥

महा-पिशाचिनी पायान्मुखे रक्षतु सर्वदा .

लज्जा रक्षतु मां दन्तान्, चोष्ठौ सम्मार्जनी-करा ॥

चिबुके कण्ठ-देशे च, ठ-कार-त्रितयं पुनः .

स-विसर्ग महा-देवि . हृदयं पातु सर्वदा ॥

नाभि रक्षतु मां लोला, कालिकाऽवत् लोचने .

उदरे पातु चामुण्डा, लिंगे कात्यायनी तथा ॥

उग्र-तारा गुदे पातु, पादौ रक्षतु चाम्बिका .

भुजौ रक्षतु शर्वाणी, हृदयं चण्ड-भूषणा ॥

जिह्वायां मातृका रक्षेत्, पूर्वे रक्षतु पुष्टिका .

विजया दक्षिणे पातु, मेधा रक्षतु वारुणे ॥

नैर्ऋत्यां सु-दया रक्षेत्, वायव्यां पातु लक्ष्मणा .

ऐशान्यां रक्षेन्मां देवी, मातंगी शुभकारिणी ॥

रक्षेत् सुरेशी चाग्नेये, बगला पातु चोत्तरे .

ऊर्घ्वं पातु महा-देवि . देवानां हित-कारिणी ॥

पाताले पातु मां नित्यं, वशिनी विश्व-रुपिणी .

प्रणवं च ततो माया, काम-वीजं च कूर्चकं ॥

मातंगिनी ङे-युताऽस्त्रं, वह्नि-जायाऽवधिर्पुनः .

सार्द्धेकादश-वर्णा सा, सर्वत्र पातु मां सदा ॥

इति ते कथितं देवि . गुह्यात् गुह्य-तरं परमं .

त्रैलोक्य-मंगलं नाम, कवचं देव-दुर्लभम् ॥

यः इदं प्रपठेत् नित्यं, जायते सम्पदालयं .

परमैश्वर्यमतुलं, प्राप्नुयान्नात्र संशयः ॥

गुरुमभ्यर्च्य विधि-वत्, कवचं प्रपठेद् यदि .

ऐश्वर्यं सु-कवित्वं च, वाक्-सिद्धिं लभते ध्रुवम् ॥

नित्यं तस्य तु मातंगी, महिला मंगलं चरेत् .

ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च, ये देवा सुर-सत्तमाः ॥

ब्रह्म-राक्षस-वेतालाः, ग्रहाद्या भूत-जातयः .

तं दृष्ट्वा साधकं देवि . लज्जा-युक्ता भवन्ति ते ॥

कवचं धारयेद् यस्तु, सर्वां सिद्धि लभेद् ध्रुवं .

राजानोऽपि च दासत्वं, षट्-कर्माणि च साधयेत् ॥

सिद्धो भवति सर्वत्र, किमन्यैर्बहु-भाषितैः .

इदं कवचमज्ञात्वा, मातंगीं यो भजेन्नरः ॥

झल्पायुर्निधनो मूर्खो, भवत्येव न संशयः .

गुरौ भक्तिः सदा कार्या, कवचे च दृढा मतिः ॥

‘मातंगी कवच’ के पाठ महत्व

मां मातंगी की कृपा प्राप्त करने के लिए उनके ‘कवच’ का पाठ करना सबसे अचूक उपाय माना गया है. ज्योतिषाचार्यों और तंत्र साधकों के अनुसार, इस पाठ के निम्नलिखित लाभ हैं:

  1. वाणी की सिद्धि: जो लोग हकलाते हैं या स्पष्ट नहीं बोल पाते, उनके लिए यह कवच वरदान समान है. यह वाक्-शक्ति को मजबुत बनाता है.
  2. कला में निपुणता: संगीत, नृत्य और चित्रकला जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है.
  3. बुद्धि और एकाग्रता: छात्रों के लिए इस कवच का पाठ एकाग्रता बढ़ाने और परीक्षा में सफलता दिलाने वाला माना जाता है.
  4. ग्रह शांति: कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए भी मां मातंगी की पूजा की जाती है.
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