कन्नौज में कांवड़ियों का प्रदर्शन, पुलिस पर पिटाई का आरोप

यूपी के कन्नौज जिले में कांवड़ यात्रा के दौरान उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब अतिप्राचीन बाबा गौरीशंकर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे कांवड़ियों ने पुलिस पर अभद्रता और पिटाई का आरोप लगा दिया. पुलिस की पिटाई से नाराज कांवड़ियों ने भगवान शिव पर जलाभिषेक करने से मना कर कोतवाल जितेंद्र प्रताप सिंह पर कार्यवाही की मांग करने लगे. घंटो चले हंगामे के बाद जिला प्रसासन ने कांवड़ियों से माफी मांगी और दोषी पुलिस कर्मियों पर कड़ी कार्यवाही का आश्वासन दिया. वही सदर कोतवाल ने सबसे के सामने इस्तीफे की देने की बात कहने पर कांवड़ियों शांत हुए.
आपको बता दें कि सावन के महीने में हरदोई जिला समेत आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री बाबा गौरीशंकर मंदिर पहुंचे थे. कावड़ लें जाने को लेकर पुलिस कर्मियों ने बैरियर लगाकर रोक दिया था. इसका विरोध जब कांवड़ियों ने किया तो पुलिस कर्मियों ने कावड़ यात्रियों को आगे आने नहीं दिया. देखते ही देखते माहौल गरमा गया और कांवड़ियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया.
कांवड़ियों ने कोतवाल जितेंद्र सिंह को की सस्पेंड करने की मांग
कांवड़ियों का आरोप था कि उनके साथ सदर कोतवाल जितेन्द्र प्रताप सिंह व उनके पुलिस कर्मियों ने दुर्व्यवहार किया. विरोध इतना बढ़ा कि उन्होंने सदर कोतवाल जितेंद्र प्रताप सिंह को हटाने और सस्पेंड करने की मांग शुरू कर दी. घंटों तक चले इस हंगामे से पुलिस-प्रशासन में भी हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे.
अपर जिलाधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कांवड़ियों से बातचीत की और पूरे मामले पर माफी मांगकर उनका गुस्सा शांत कराया. वहीं, सदर कोतवाल जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी अधिकारी और कांवड़ियों के सामने अपने इस्तीफे की बात कही. बताया जा रहा है कि मामले में एक सिपाही के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की सूचना है.’
प्रशासन की ओर से माफी के बाद कांवड़ियों का आक्रोश हुआ शांत
प्रशासन की ओर से माफी और कार्रवाई के आश्वासन के बाद कांवड़ियों का आक्रोश शांत हुआ और उन्होंने अपना विरोध समाप्त कर दिया. लेकिन बड़ा सवाल यही है, आखिर जलाभिषेक करने पहुंचे शिव भक्तों के साथ ऐसा क्या हुआ कि मामला घंटों तक चलता रहा और पुलिस प्रशासन को खुद मौके पर पहुंचकर माफी मांगनी पड़ी? फिलहाल मामला शांत है, लेकिन कांवड़ियों और पुलिस के बीच हुए इस विवाद ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस के व्यवहार पर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.



