छत्तीसगढ़

बस्तर में विकास का आधार बनेगी खेती,उद्योगपतियों को बसाने के भ्रम फैला रहा विपक्ष – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

80 हजार एकड़ में सिंचाई क्षमता बढ़ाने दो बड़ी परियोजनाएं स्वीकृत : कृषि आधारित समृद्धि की दिशा में बढ़ रहा बस्तर

रायपुर /मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर के विकास को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और दुष्प्रचार पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कहना पूरी तरह असत्य है कि नक्सलवाद की समाप्ति केवल उद्योगपतियों को बसाने के उद्देश्य से की जा रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास का उद्देश्य यहां के स्थानीय लोगों का जीवन बेहतर बनाना, युवाओं को अवसर देना तथा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाना है।

जगदलपुर स्थित बादल अकादमी में आयोजित उजर बस्तर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह की उपस्थिति तथा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों के बीच वे स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि विपक्ष का यह नैरेटिव तथ्यों से परे और भ्रामक है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर की मिट्टी अत्यंत उर्वर और कृषि संभावनाओं से भरपूर है तथा यहां के लोग मेहनतकश और कर्मशील हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकता बस्तर में कृषि और उससे जुड़े आजीविका अवसरों को सशक्त बनाना है, ताकि स्थानीय परिवारों की आय में वृद्धि हो और क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत बने। उन्होंने कहा कि सरकार बस्तर की पहचान को खेती, उद्यानिकी, वनोपज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच के तहत क्षेत्र में दो बड़ी सिंचाई परियोजनाओं मटनार और देउरगांव को स्वीकृति दी गई है, जिनमें लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इन परियोजनाओं से करीब 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी, जिससे किसानों को वर्षभर खेती, उत्पादन बढ़ाने और आय सृजन के नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बस्तर का रास्ता खेती, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से होकर गुजरता है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर अब भय, हिंसा और अविश्वास की पहचान से निकलकर विकास, विश्वास और आत्मनिर्भरता के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता है कि यहां का विकास स्थानीय लोगों की आकांक्षाओं, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और जनकल्याण को केंद्र में रखकर किया जाए, ताकि बस्तर का हर परिवार शांति, समृद्धि और सम्मानपूर्ण जीवन की नई यात्रा का सहभागी बन सके।

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