एक मंच,11 देश और 10 एजेंडे… भारत की कूटनीति का असर, BRICS समिट पर ट्रंप समेत पूरी दुनिया की नजर

नई दिल्ली: भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो गया है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भारत मंडपम में सम्मेलन की तैयारियों को दिखाने वाला 26 सेकंड का वीडियो शेयर किया। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, ‘BRICS 2026 के लिए सब तैयार है!’ पीएम मोदी की इस पोस्ट में शिखर सम्मेलन से पहले भारत मंडपम की तैयारियों की झलक दिखाई गई है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर करीब 15,000 पुलिसकर्मियों और अर्द्धसैनिक बलों की करीब 200 कंपनियों की तैनाती की है। वीवीआईपी आवाजाही को ध्यान में रखते हुए आम लोगों के लिए यातायात संबंधी परामर्श भी जारी किया गया है।
शी चिनफिंग आएंगे भारत
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इस सप्ताह नई दिल्ली आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति शी 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, यात्रा के दौरान शी सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात भी कर सकते हैं।
करीब 7 साल बाद भारत यात्रा
शी चिनफिंग की यह करीब 7 साल बाद पहली भारत यात्रा होगी। उनकी यह यात्रा दोनों एशियाई देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने के जारी प्रयासों और वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल के बीच महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम मानी जा रही है। खास तौर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्रिक्स सहयोग के लिहाज से इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। भारत मौजूदा अध्यक्ष के रूप में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।एक मंच,11 देश और 10 एजेंडे… भारत की कूटनीति का असर, BRICS समिट पर ट्रंप समेत पूरी दुनिया की नजर
एक मंच,11 देश और 10 एजेंडे… भारत की कूटनीति का असर, BRICS समिट पर ट्रंप समेत पूरी दुनिया की नजर

नई दिल्ली। युद्ध, प्रतिबंध, व्यापार बाधाओं और पश्चिम एशिया संकट के बीच वैश्विक व्यवस्था जब डगमगा चुकी है, तब 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है।
भारत मंडपम में होने वाले 18वें शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देश जुटेंगे। ये देश विश्व की करीब आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, यह वजह है कि ब्रिक्स की कूटनीतिक धमक बढ़ी है।
हालांकि, अभी तक ब्रिक्स का कोई एक समग्र एजेंडा नहीं बन पाया है। हर देश अपने राष्ट्रीय हितों को आगे रखकर इस मंच का इस्तेमाल कर रहा है। इस बार भी कहानी दूसरी नहीं है।
चीन अमेरिका के घटते भरोसे के मुकाबले अपनी साझेदारी दिखाना चाहता है, भारत विकास और व्यावहारिक सहयोग को केंद्र में रखना चाहता है, रूस प्रतिबंधों के बावजूद अपनी वैश्विक उपस्थिति साबित करना चाहता है, जबकि ईरान बड़ी शक्तियों के साथ एक मंच पर बैठकर कूटनीतिक संदेश देना चाहता है।
ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और यूएई भी ऊर्जा, व्यापार, अफ्रीका-एशिया संपर्क और स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन जैसे मुद्दे लेकर आ रहे हैं।
चीन: वैश्विक शक्ति बनने की राह
चीन की मंशा पुरानी है कि ब्रिक्स को अमेरिकी केंद्रित व्यवस्था के विकल्प के रूप में पेश किया जाए। राष्ट्रपति चिनपिंग का एजेंडा साफ है कि चीन जहां कई देशों का अमेरिका पर भरोसा डगमगा रहा है, वहीं रूस और भारत जैसे बड़े देश और इथियोपिया व इंडोनेशिया जैसे देश उसके नेतृत्व में गठित एक ही संगठन में विचार साझा कर रहे हैं।
वह ब्रिक्स का विस्तार भी चाहते हैं ताकि इसे और प्रभावशाली बनाया जाए। चीन स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने तथा वैश्विक शासन सुधारों, खासकर आईएमएफ और संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों की आवाज बढ़ाने की बात करेगा।
भारत: बहुधुव्रीय विश्व बड़ा एजेंडा
मेजबान भारत का एजेंडा उसकी पारंपरिक कूटनीति की व्यावहारिकता को दिखा रहा है। भारत एक तरफ अमेरिका के साथ क्वाड का सदस्य है तो दूसरी तरफ एससीओ व ब्रिक्स का सदस्य है। एक बहुधुव्रीय दुनिया को भारत अपने हित में देखता है और इसकी हर जगह कोशिश करता है। साथ ही भारत ब्रिक्स को पश्चिम विरोधी गठबंधन नहीं, बल्कि विकास सहयोग का मंच बनाना चाहता है।
भारत एमएसएमई, स्टार्टअप, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, यूपीआई जैसे भुगतान तंत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वच्छ ऊर्जा पर जोर देगा। इस सलाल भारत ईरान और यूएई जैसे देशों के बीच सहमति बनाने की भी कोशिश कर रहा है, ताकि संयुक्त बयान फंस न जाए। मेजबान के रूप में नई दिल्ली का लक्ष्य है कि ब्रिक्स चर्चा से आगे बढ़कर ठोस परिणाम दे।
रूस: प्रतिबंधों के बावजूद वैश्विक उपस्थिति
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस मंच का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए करेंगे कि पश्चिमी प्रतिबंध रूस को अलग-थलग नहीं कर सके। मास्को का दावा है कि ब्रिक्स देशों के साथ उसके अधिकांश भुगतान अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे हैं। रूस खाद्य सुरक्षा, अनाज व्यापार, ऊर्जा सहयोग, रक्षा और परिवहन गलियारों पर बात करेगा।
वह ब्रिक्स को वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था का मंच बनाना चाहता, जहां पश्चिमी देशों के स्विफ्ट भुगतान व्यवस्था से बाहर निकला जा हालांकि भारत जैसे देश इसे सीधे डालर विरोधी अभियान नहीं बनाना चाहते। पुतिन-मोदी द्विपक्षीय मुलाकात में व्यापार, ऊर्जा और रक्षा परियोजनाएं उठ सकती हैं। रूस के लिए यह बैठक कूटनीतिक वैधता का प्रदर्शन भी है कि चीन और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं उसके साथ एक मेज पर बैठी हैं।
ईरान: टूटी नहीं है कमर, कई देश हैं साथ
ईरान का प्रमुख एजेंडा दुनिया को यह दिखाना है कि पांच महीनों के युद्ध के बावजूद उसकी ना तो कमर टूटी है और ना ही वैश्विक मंचों पर उसके मित्रों की कमी है। अमेरिकी दबाव और क्षेत्रीय तनाव के बीच इस सम्मेलन को कूटनीतिक राहत के रूप में देख रहा है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अपने आतंरिक विरोधियों को भी बताना चाहेंगे कि तेहरान पूरी तरह अलग-थलग नहीं है। ईरान व्यापार, ऊर्जा निर्यात, चाबहार बंदरगाह और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान बढ़ाना चाहता है। पश्चिम एशिया संकट पर वह अपना पक्ष रखेगा व यूएई को घेरेगा।
ब्राजील: ग्लोबल साउथ और पर्यावरण
राष्ट्रपति लूला की अनुपस्थिति में ब्राजील उच्च स्तरीय प्रतिनिधि भेजेगा। ब्राजील जलवायु वित्त, अमेजन संरक्षण, कृषि निर्यात और विकासशील देशों के लिए रियायती वित्त पर जोर देगा। वह ब्रिक्स को दक्षिण-दक्षिण सहयोग का मंच बनाए रखना चाहता है और न्यू डेवलपमेंट बैंक से हरित परियोजनाओं के लिए अधिक संसाधन चाहता है।
दक्षिण अफ्रीका: अफ्रीका की आवाज और खनिज आपूर्ति
राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा अफ्रीकी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए दक्षिण अफ्रीका औद्योगिक विकास, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा संक्रमण और अफ्रीकी संघ की प्राथमिकताओं को ब्रिक्स से जोड़ने की कोशिश करेगा। वह वैश्विक संस्थानों में अफ्रीका का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग दोहराएगा।
मिस्र: स्वेज, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता
राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी व्यापार मार्गों, ऊर्जा सहयोग और खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देंगे। मिस्र स्वेज नहर और क्षेत्रीय संपर्क को ब्रिक्स आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना चाहता है। पश्चिम एशिया शांति और निवेश भी उसके एजेंडे में रहेंगे।
इथियोपिया: अफ्रीकी विकास और बुनियादी ढांचा
प्रधानमंत्री अबी अहमद विकास वित्त, बुनियादी ढांचा, कृषि और अफ्रीका के लिए निवेश चाहते हैं। इथियोपिया ब्रिक्स को अफ्रीकी औद्योगीकरण और ऊर्जा परियोजनाओं का सहयोगी बनाना चाहता है।
इंडोनेशिया: हिंद-प्रशांत क्षेत्र व कारोबार
नए पूर्ण सदस्य के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो व्यापार, समुद्री संपर्क, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर देंगे। जकार्ता ब्रिक्स को आसियान और ग्लोबल साउथ के बीच सेतु बनाना चाहता है।
साथ ही वह हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपने देश को ज्यादा मजबूती से प्रदर्शित करने की कोशिश करेंगे। इंडोनेशिया भी अपने आपको एक भावी वैश्विक शक्ति के तौर पर देखता है और चाहता है कि ब्रिक्स जैसे छोटे संगठन के जरिए उसकी भूमिका बढ़े।
यूएई: ऊर्जा व पश्चिम एशिया संकट
यूएई की इस बार का प्रमुख एजेंडा यहीं है कि पश्चिम एशिया संकट पर ईरान ब्रिक्स सम्मेलन में एकतरफा बातें नहीं करे। इस बात के संकेत विदेश मंत्रियों और एनएसए की बैठकों में मिल चुके हैं। साथ ही यूएई ब्रिक्स देशों को वैश्विक ऊर्जा कारोबार पर भी आश्वस्त करना चाहेगा कि उसकी वजह से क्रूड की कीमतें नहीं बढ़ रहीं।



