
AI जिस रफ्तार से तरक्की कर रहा है उस पर विश्वास करना मुश्किल है लेकिन क्या आपने कभी कल्पना की थी कि AI कभी दिल की सर्जरी भी कर सकेगा। दरअसल ऐसा चीन में हुआ है, जहां डॉक्टरों ने दुनिया में पहली बार AI-संचालित और अल्ट्रासाउंड-गाइडेड रोबोट की मदद से दिल की बेहद मुश्किल सर्जरी को सफल तरीके से अंजाम दिया है।
इस सर्जरी में 48 साल के मरीज के दिल में मौजूद जन्मजात छेद को बिना सीना चीरे एक रोबोटिक सिस्टम ने पूरी तरह बंद कर दिया। इसमें रोबोटिक आर्म के अलावा AI की सूझबूझ और सटीक नेविगेशन से बहुत मदद मिली।
AI ने रच दिया इतिहास
रिपोर्ट्स के अनुसार(REF.) इस ऐतिहासिक सर्जरी को चाइनीज पीएलए जनरल हॉस्पिटल के सिक्स्थ मेडिकल सेंटर में अंजाम दिया गया। अस्पताल के सीनियर डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञों ने इस प्रक्रिया को पूरा किया।
डॉक्टरों ने ऑफिशियल वीचैट हैंडल पर इसे एक मील का पत्थर घोषित किया है। इस सर्जरी के लिए मरीज की छाती खोले बिना नसों के रास्ते एक बेहद पतले और लचीले कैथेटर को डालकर दिल तक पहुंचाया गया। इसके बाद दिल के एक हिस्से में सीलिंड डिवाइस लगाकर छेद को सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया गया।
AI की मदद से हुई सर्जरी
यह सर्जरी रोबोटिक आर्म की मदद से होने वाली सर्जरी से काफी अलग थी। दरअसल रोबोटिक सर्जरी में रोबोट को हर सेकंड डॉक्टर द्वारा रिमोट कंट्रोलर से चालाया जाता है और रोबोटिक आर्म अपने आप कोई फैसला नहीं ले सकता।
वहीं चीन में हुई सर्जरी में रोबोट डीप लर्निंग एल्गोरिदम पर काम करता है। इसमें रियल-टाइम इमेज रिकॉग्निशन सीधे सर्जिकल मूवमेंट से जुड़ा हुआ था। इस वजह से यह सिस्टम सिर्फ डॉक्टर के निर्देश पर काम नहीं कर रहा था बल्कि खुद फैसला ले रहा था।
AI ने सर्जरी में क्या किया?
- इस सर्जरी में AI डॉक्टरों की लगातार मदद कर रहा था। इसमें AI रोबोट आर्म ने सर्जरी के दौरान दिल के टिश्यूज को खुद स्कैन किया। इसके बाद दिल में मौजूद छेद की जगह का सटीक नक्शा तैयार किया।
- इसके बाद सब-मिलीमीटर सटीकता के साथ कैथेटर को आगे बढ़ाकर क्लोजर डिवाइस को सही जगह पर फिट कर दिया।
- यह AI रोबोट आर्म सिर्फ अल्ट्रासाउंड इमेजिंग पर काम करता है, जिससे रेडिएशन का खतरा पूरी तरह से टल जाता है। दरअसल इस तरह की आम सर्जरी के दौरान लाइव एक्स-रे की जरूरत पड़ती है। इससे मरीज और स्टाफ को हानिकारक रेडिएशन का खतरा रहता है। इस AI सर्जरी की वजह से यह खतरा टल जाता है।
- इसके अलावा आने वाले समय में यह तकनीक दिल की मुश्किल से मुश्किल सर्जरी को छोटे अस्पतालों के लिए भी संभव बना देगी।



