40 साल पुरानी बिल्डिंग और अवैध निर्माण, बारिश में ‘तालाब’ बन जाता था बेसमेंट; दिल्ली PG हादसे में कई बड़े खुलासे

नई दिल्ली। Satya Niketan Building Collapse राजधानी दिल्ली में एमसीडी व पुलिस की लापरवाही ने फिर कई जिंदगियां लील लीं। ताजा मामला दक्षिणी दिल्ली में सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत ढहने का है। इस हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी हैं, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
राजधानी दिल्ली को दहला देने वाले इस हादसे को लेकर भी सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि बिल्डिंग में अवैध निर्माण होता रहा और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे रहे। इतना ही नहीं करीब 40 साल पुरानी इस बिल्डिंग में बारिश के दौरान बेसमेंट जलमग्न हो जाता था, जिससे इसकी नींव कमजोर होती गई और रविवार दोपहर को इमारत भराभरकर ढह गई।
बता दें कि गत 30 मई को सैदुलाजाब में पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई थी। सत्य निकेतन में पीजी हादसे को लेकर कई खामियां उजागर हुई हैं।
PG का अवैध संचालन
जांच में पता चला कि 100 गज में अवैध रूप से बनी पांच मंजिला इमारत के बेसमेंट में मरम्मत कार्य के दौरान भरभराकर ढह गई। इमारत में हॉस्टल डेज नाम से पीजी का संचालन भी अवैध रूप से हो रहा था, जिसमें डीयू साउथ कैंपस के छात्र रह रहे थे। हादसे में दो छात्र समेत छह की मौत हो गई है। वहीं मलबे से निकाले गए 10 अन्य छात्रों व श्रमिकों को एम्स ट्रामा सेंटर, सफदरजंग अस्पताल व आरआर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका है।
मलबे में दबे छात्रों की तलाश जारी
उधर, राहत और बचाव कार्य में एनडीआरएफ, दमकल, पुलिस और स्थानीय लोगों के साथ डीयू के छात्र भी जुटे रहे। फिलहाल साउथ कैंपस थाना पुलिस ने मामले में भवन स्वामी हरिओम बंसल के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। आरोपी गुरुग्राम के सेक्टर-23 में रहता है, जिसकी तलाश जारी है।
एक घायल को मिली छुट्टी
पुलिस अधिकारी के मुताबिक, एम्स ट्रामा सेंटर में लाए गए घायलों में छह की मौत हो चुकी। मृतकों में से एक की पहचान छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी युवराज के रूप में हुई है। दूसरे छात्र की पहचान के अभिषेक के रूप में हुई है। अन्य की पहचान नहीं हो पाई है। एक घायल को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
40 साल पुरानी है इमारत
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लगभग 40 वर्ष पहले दो मंजिला इमारत बनी। बाद में बेसमेंट बनाते हुए तीन मंजिल बढ़ा दिए गए। इमारत के ऊपरी फ्लोर का इस्तेमाल पीजी के तौर पर किया जा रहा था। जबकि भूतल पर दुकानें बनी हुई थीं, जो लंबे समय से बंद थी।
मामले की जांच जारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, भवन स्वामी हरिओम ने पिछले वर्ष ही शुधांशु शुक्ला नामक व्यक्ति को ‘हॉस्टल डेज’ पीजी संचालन के लिए लीज पर दिया था। हादसे के वक्त इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का कार्य चल रहा था, जिससे पूरी इमारत भरभराकर ढह गई। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। इमारत में पीजी के कारण यहां काफी संख्या में डीयू के छात्रों के मौजूद होने की बात कहीं जा रही है।
डीसीपी अमित गोयल के मुताबिक, दोपहर करीब 1:34 बजे साउथ कैंपस थाना पुलिस को सत्य निकेतन मार्केट में इमारत गिरने की पीसीआर कॉल मिली।



