MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन: हिंद महासागर में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर मारेगा, भारत-अमेरिका में हुई महाडील

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच नई डिफेंस से समंदर में चीन और पाकिस्तान की टेंशन काफी बढ़ गई है. भारत समंदर में अपनी सैन्य ताकत को लगातार बढ़ा रहा है. भारतीय नौसेना को समुद्री निगरानी के लिए अमेरिका से नए ड्रोन मिल रहे हैं. इन ड्रोन्स का नाम MQ-9B सी गार्डियन है. ये शक्तिशाली ड्रोन दुश्मन की हर हरकत पर हमेशा पैनी नजर रखते हैं. भारत पहले से ही अपनी सुरक्षा के लिए ऐसे दो ड्रोन ऑपरेट कर रहा है. अब भारत की सामरिक ताकत और भी ज्यादा बढ़ने वाली है. नई खेप आने से नौसेना की मारक क्षमता में कई गुना इजाफा होगा. हिंद महासागर में दुश्मन की कोई भी चाल अब आसानी से कामयाब नहीं होगी. भारत का ये आक्रामक कदम चीन की हर बड़ी साजिश को नाकाम कर देगा. अमेरिका के साथ हुई ये महाडील समंदर में एक बड़ा गेम चेंजर साबित होने वाली है. भारत का डिटरेंस अब पहले से बहुत ज्यादा मजबूत हो चुका है.
MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन को क्यों कहा जाता है समंदर का खामोश शिकारी?
ये ड्रोन बिना कोई बड़ी आवाज किए दुश्मन के इलाके में आसानी से घुस जाता है. इसी वजह से इसे समंदर का खामोश शिकारी कहा जाता है. ये आसमान से घात लगाकर अपने टारगेट पर हमला करने में बहुत माहिर है. जब भी दुश्मन पर सीधे हमले का वक्त आता है तो ये बिल्कुल नहीं चूकता. दुनिया भर में इसे प्रीडेटर ड्रोन के मशहूर नाम से भी जाना जाता है.
अमेरिका ने इसका इस्तेमाल दुनिया भर में अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए किया है. अब ये अत्याधुनिक सैन्य तकनीक भारत के पास भी आ चुकी है. भारतीय नौसेना इसका सी गार्डियन वर्जन बहुत प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर रही है. ये ड्रोन हजारों मीटर की ऊंचाई से देश की सरहदों की चौकसी करता है.
इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका किसी भी रडार को आसानी से चकमा देना है. ये दुश्मन के एडवांस रडार सिस्टम की पकड़ में जल्दी नहीं आता है. ये ड्रोन अपने टारगेट को पूरी तरह से तबाह करने का दम रखता है. इसमें कई ऐसे आधुनिक सेंसर लगे हैं जो इसे बेहद घातक बनाते हैं. इसका हाई डेफिनेशन कैमरा जमीन और समंदर दोनों जगह बारीक नजर रखता है.
ये एडवांस कैमरा सीधे नेवी के कमांड सेंटर को रीयल टाइम वीडियो भेजता है. इससे दुश्मन की लोकेशन की तुरंत और सटीक पहचान हो जाती है. एक बार टारगेट लॉक होने के बाद किसी भी दुश्मन का बचना नामुमकिन होता है. आइए इसके अहम फीचर्स को एक आसान टेबल के जरिए विस्तार से समझते हैं.
| रेंज | 8000 किलोमीटर का एक बहुत बड़ा कवरेज एरिया |
| उड़ान की क्षमता | 30 घंटे तक लगातार हवा में मंडराने की अद्भुत ताकत |
| अधिकतम ऊंचाई | 40 हजार से लेकर 50 हजार फीट तक का एल्टीट्यूड |
| पेलोड क्षमता | 2000 किलोग्राम तक के भारी बम और गाइडेड मिसाइलें |
| अधिकतम रफ्तार | 450 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज गति |
| सर्विलांस सिस्टम | हाई डेफिनेशन कैमरा और रीयल टाइम वीडियो फीड |
भारत और अमेरिका के बीच हुई इस महाडील से सेना के तीनों अंगों को कितनी मिलेगी ताकत?
भारत और अमेरिका के बीच इस प्रीडेटर ड्रोन को लेकर एक बड़ी डील फाइनल हो चुकी है. इस डील से केवल नौसेना ही नहीं बल्कि तीनों सेनाओं को भयंकर ताकत मिलेगी. रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार अमेरिका से कुल 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने वाली है. इनमें से 15 ड्रोन सीधे तौर पर भारतीय नौसेना को निगरानी के लिए दिए जाएंगे. बाकी बचे अत्याधुनिक ड्रोन्स में से 8 इंडियन एयरफोर्स के लिए रिजर्व होंगे.
भारतीय थल सेना भी अपने ऑपरेशंस के लिए ऐसे 8 ड्रोन्स को ऑपरेट करेगी. ये सभी नए ड्रोन्स लेजर बम और खास गाइडेड मिसाइलों से पूरी तरह लैस होंगे. ये सिर्फ सर्विलांस ही नहीं बल्कि दुश्मन पर सीधे हमला करने में भी सक्षम होंगे. भारत साल 2020 से ही ऐसे दो ड्रोन अमेरिका से किराए पर लेकर चला रहा है. पिछले तीन सालों में इन ड्रोन्स ने करीब 13 हजार घंटे के अहम मिशन पूरे किए हैं.
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इनकी शानदार और सटीक परफॉरमेंस को देखकर ही 31 नए ड्रोन्स खरीदने का बड़ा फैसला लिया गया. अभी नौसेना के पास मौजूद दोनों ड्रोन हिंद महासागर में लगातार अपनी गश्त कर रहे हैं. इनके बेड़े में शामिल होने से आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा का घेरा बेहद मजबूत हो गया है. अदन की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक ये अमेरिकी ड्रोन दिन-रात लगातार मंडरा रहे हैं.
हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियों को कैसे ट्रैक करेगा ये अमेरिकी प्रीडेटर ड्रोन?
- समंदर में सबसे बड़ा खतरा हमेशा पानी के नीचे छिपी पनडुब्बियों से ही होता है. चीन अक्सर अपनी न्यूक्लियर पनडुब्बियों को हिंद महासागर में जासूसी के लिए भेजने की कोशिश करता है. गहरे समंदर में इन पनडुब्बियों को ट्रैक करना सबसे मुश्किल सैन्य काम माना जाता है. लेकिन MQ-9B सी गार्डियन के पास इस मुश्किल खतरे का भी पक्का इलाज मौजूद है.
- इस ड्रोन को खासतौर पर एंटी सबमरीन वॉरफेयर ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें जल्द ही एक खास तरह का सोनोबॉय सिस्टम भी लगाया जाएगा. ये आधुनिक सिस्टम समंदर की अथाह गहराई में छिपी पनडुब्बियों को भी आसानी से खोज निकालता है. जब भी कोई दुश्मन पनडुब्बी भारत के इलाके में दाखिल होगी तो ये ड्रोन तुरंत एक्टिव हो जाएगा.
- ये ड्रोन समंदर के पानी में ऊपर से छोटे सेंसर वाले सोनोबॉय गिराएगा. ये सोनोबॉय दुश्मन पनडुब्बियों की आवाज और उनके सोनार सिग्नेचर को तुरंत कैच कर लेते हैं. इसके बाद ये अहम डेटा सैटेलाइट के जरिए सीधे नेवल कमांड सेंटर को भेजा जाता है. कमांड सेंटर से ये सटीक जानकारी नौसेना के जंगी जहाजों को तुरंत ट्रांसफर कर दी जाती है.
- भारत के खतरनाक पी-8आई टोही विमान भी इस पूरे ऑपरेशन में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. ये हंटर विमान सटीक लोकेशन मिलते ही पनडुब्बी पर ऊपर से घातक टॉरपीडो दाग देते हैं. पलक झपकते ही दुश्मन की बड़ी से बड़ी पनडुब्बी समंदर की डरावनी कब्र में दफन हो जाती है.
मलक्का स्ट्रेट से लेकर अदन की खाड़ी तक भारत की कड़ी निगरानी कैसे तोड़ेगी ड्रैगन का गुरूर?
भारत की भौगोलिक स्थिति उसे पूरे हिंद महासागर में एक बहुत बड़ी सामरिक ताकत बनाती है. भारत के पास करीब 23 लाख वर्ग किलोमीटर का एक विशाल इकोनॉमिक जोन मौजूद है. दुनिया का करीब 80 प्रतिशत कमर्शियल तेल हर दिन इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में इस बड़े इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.



