ब्लड शुगर मैनेजमेंट करने के लिए रोज करें ये 6 योगाभ्यास, डायबिटीज पेशेंट के लिए बहुत फायदेमंद

Yoga for diabetes : डायबिटीज में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं है. खान-पान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव को मैनेज करना भी बेहद जरूरी है. योग इस दिशा में एक आसान विकल्प हो सकता है. खासकर टाइप-2 डायबिटीज में नियमित योग करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद मिल सकती है.
हालिया रिसर्च में भी योग के संभावित फायदों को लेकर सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं. 2026 में प्रकाशित एक समीक्षा और मेटा-एनालिसिस में 14 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल और 1,629 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इसमें स्टैंडर्ड इलाज के साथ योग करने वालों में फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, खाने के बाद का ब्लड शुगर, HbA1c और HOMA-IR जैसे इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े संकेतकों में सुधार पाया गया. हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि अभी और अध्ययनों की जरूरत है. तो चलिए जानते हैं कि कौन से योगाभ्यास आपके लिए फायदेमंद हो सकती है.
टाइप-2 डायबिटीज में नियमित योग करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद मिल सकती है.(Canva)
लाइफस्टाइल में शामिल करें ये योगाभ्यास-
मंडूकासन (Mandukasana/Frog Pose)
मंडूकासन में पेट के हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है और शरीर को एकाग्रता के साथ स्थिर रखना होता है. इसे पारंपरिक योग अभ्यासों में पाचन और पेट के आसपास के अंगों के लिए उपयोगी माना जाता है.
अर्ध मत्स्येंद्रासन (Ardha Matsyendrasana/Half Spinal Twist Pose)
यह एक ट्विस्टिंग योगासन है, जिसमें रीढ़ के साथ पेट और कमर के आसपास के हिस्से में स्ट्रेच मिलता है. नियमित अभ्यास से शरीर का लचीलापन और गतिशीलता बेहतर हो सकती है. डायबिटीज मरीजों के लिए सक्रिय रहना महत्वपूर्ण है और इस तरह के योगासन उस रूटीन का हिस्सा बन सकते हैं.
पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana/Seated Forward Bend)
पश्चिमोत्तानासन में शरीर के पिछले हिस्से, खासकर पीठ और पैरों में अच्छा स्ट्रेच मिलता है. योग का एक फायदा तनाव कम करने में भी देखा गया है. तनाव लंबे समय तक बढ़ा रहने पर ब्लड ग्लूकोज मैनेजमेंट प्रभावित हो सकता है, इसलिए रिलैक्सेशन देने वाले योग अभ्यास डायबिटीज मैनेजमेंट में सहायक हो सकते हैं.
भुजंगासन (Bhujangasana/Cobra Pose)
भुजंगासन में पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाया जाता है. इससे रीढ़ और शरीर के सामने वाले हिस्से में स्ट्रेच मिलता है. यह हल्की शारीरिक गतिविधि के तौर पर योग रूटीन में शामिल किया जा सकता है. शुरुआत में इसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करें और कमर में दर्द होने पर विशेषज्ञ से सलाह लें.
वज्रासन (Vajrasana/Thunderbolt Pose)
वज्रासन अपेक्षाकृत सरल आसन है और इसे भोजन के बाद भी थोड़े समय के लिए किया जाता है. लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय शरीर को हल्की गतिविधि देना डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए फायदेमंद हो सकता है. अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की गाइडलाइन भी डायबिटीज वाले लोगों को अपनी सामान्य शारीरिक गतिविधि बढ़ाने की सलाह देती है और योग को इसमें शामिल किया जा सकता है.
अनुलोम-विलोम (Anulom Vilom/Alternate Nostril Breathing)
डायबिटीज में सिर्फ शरीर ही नहीं, मानसिक तनाव को मैनेज करना भी जरूरी है. अनुलोम-विलोम जैसे ब्रीदिंग एक्सरसाइज रिलैक्सेशन में मदद कर सकते हैं. योग के संभावित फायदे केवल ब्लड शुगर तक सीमित नहीं माने जाते. रिसर्च में मूड, नींद और क्वालिटी ऑफ लाइफ जैसे पहलुओं में भी सुधार के संकेत मिले हैं.
क्या योग से सच में इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो सकती है?
शोध बताते हैं कि योग को स्टैंडर्ड डायबिटीज केयर के साथ शामिल करने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और ग्लाइसेमिक कंट्रोल में सुधार हो सकता है. एक अन्य मेटा-एनालिसिस में योग करने वाले टाइप-2 डायबिटीज मरीजों में फास्टिंग ग्लूकोज, HbA1c और HOMA-IR में सुधार देखा गया था.
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी योगासन सीधे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने के लिए साबित नहीं हुए हैं. इसलिए इन आसनों को डायबिटीज के इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सपोर्टिव लाइफस्टाइल एक्टिविटी मानना बेहतर है.
डायबिटीज मरीज रखें इन बातों का ध्यान-
अगर आप इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं तो योग या किसी भी एक्सरसाइज से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि शुगर बहुत कम होने का जोखिम हो सकता है.
शुरुआत आसान आसनों से करें और शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें. चक्कर, कमजोरी, कंपकंपी या असहज महसूस होने पर अभ्यास रोक दें.



