नागौर में नवजातों के लिए अनोखी पहल, अस्पताल से घर जाते वक्त मुफ्त मिलेगा 11 चीजों वाला बेबी किट

Nagaur Project Nanhe Kadam: नागौर में नवजात बच्चों के लिए शुरू की गई ‘प्रोजेक्ट नन्हे कदम’ पहल अब ग्रामीण परिवारों के लिए मददगार साबित हो सकती है. खींवसर फाउंडेशन की ओर से जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले हर नवजात को मुफ्त बेबी किट दी जा रही है. किट में बच्चे की शुरुआती जरूरतों से जुड़ी 11 वस्तुएं हैं. इनमें डायपर, नैपकिन, बाथ टॉवल, बेबी कैप, स्वैडल, ग्लव्स, फीडिंग बॉटल, सिप्पी कप, खिलौना और टेडी बियर शामिल हैं. फाउंडेशन का कहना है कि योजना का मकसद केवल सामान देना नहीं, बल्कि नवप्रसूता माताओं को नवजात की सही देखभाल के लिए जागरूक करना भी है. महिला स्वयंसेवक अस्पतालों में माताओं से बातचीत कर स्वच्छता, सैनिटाइजेशन और किट के इस्तेमाल की जानकारी देती हैं. फाउंडेशन पहले से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहा है.
नागौर जिले के ग्रामीण इलाकों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं और उनकी माताओं के लिए खींवसर फाउंडेशन ने एक अनूठी पहल शुरू की है. प्रोजेक्ट नन्हे कदम के तहत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले हर नवजात बेबी किट दिया जाएगा. ये किट बिल्कुल फ्री होगा जिसमें 11 तरह के जरूरी सामान होंगे. इस कीट में वे सामान होंगे जो बच्चे और उनकी मां के लिए बहुत जरूरी है.
खींवसर फाउंडेशन के संस्थापक धनंजयसिंह ने बताया कि इस पहल को सिर्फ सामान बांटने की योजना के तौर पर सीमित नहीं रखा है. इस योजना में बच्चे और मां के स्वास्थ्य को लेकर लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती दिनों में जरूरी संसाधनों की कमी कई बार परेशानी का कारण बनती है. ऐसे में यह किट माताओं को नवजात की शुरुआती देखभाल में मदद देगी.
फाउंडेशन ने नवजातों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण-अनुकूल बैग में 11 आवश्यक वस्तुओं को शामिल किया है. इस कीट में सूती बाथ टॉवल, डायपर, नैपकिन, हाथों के ग्लव्स, पैरों के लेग ग्लव्स, बेबी स्वैडल, बेबी कैप, सिप्पी वॉटर कप, मिल्क फीडिंग बॉटल, बेबी टॉय और मुलायम टेडी बियर शामिल हैं. यानी बच्चे के जन्म के बाद रोजमर्रा में काम आने वाली कई जरूरी चीजें एक ही किट में उपलब्ध कराई जा रही है.
प्रोजेक्ट नन्हे कदम की खास बात यह है कि इसका फोकस केवल नवजात तक सीमित नहीं रखा गया है. फाउंडेशन की महिला स्वयंसेवक अस्पतालों में नवप्रसूता माताओं से बातचीत का उन्हें स्वच्छता, किट की वस्तुओं कासही इस्तेमाल, सैनिटाइजेशन और नवजात की देखभाल के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी भी दे रही हैं. इससे माताओं में शिशु स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
आपको बता दें कि खींवसर फाउंडेशन नागौर में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र काम कर रहा है. उनके द्वारा अब तक हज़ारों सरकारी स्कूल के बच्चों को स्टेशनरी कीट बांटी है. इसके अलावा समय समय पर चिकित्सा कैंप भी लगाए जाते हैं. जहां मरीजों को फ्री इलाज किया जाता है. खींवसर फाउंडेशन के संस्थापक धनंजयसिंह खींवसर के अनुसार, हर बच्चे को स्वस्थ और सम्मानजनक शुरुआत पाने का अधिकार है. आर्थिक परिस्थितियां किसी परिवार के लिए नवजात की देखभाल में बाधा न बनें, इसी सोच के साथ यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है.
वहीं प्रोजेक्ट निदेशिका मृगेशा कुमारी सिंह खींवसर का कहना है कि जीवन के शुरुआती पलों में सही देखभाल और संक्रमण से बचाव बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि यह किट माताओं को यह भरोसा देती है कि समाज उनके साथ खड़ा है. उन्होंने कहा कि यह किट देना शुरू किया जा चुका है. सूचना पर खींवसर फाउंडेशन की टीम पहुंचती है और बधाई के साथ उन्हें बेबी किट देती है. इसके अलावा महिला कार्यकता माताओं से बात करती है.



