जंग के बीच ईरान के मंत्री PAK पहुंचे; अमेरिका ने लगातार 10वें दिन बम बरसाए; शांति कब?

ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने पाकिस्तान के रावलपिंडी में पाकिस्तानी समकक्ष मोहसिन नकवी से मुलाकात की। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों की मुलाकात नूर खान हवाई अड्डे पर हुई। तस्वीर पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने जारी है। खास बात ये है कि पिछली बार ईरान और अमेरिका के बीच सुहल-समझौते में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही है। बीते जून माह में जिस 14 बिंदुओं वाले समझौते पर ट्रंप और पेजेशकियन ने साइन किए थे, उसे कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस्लामाबाद समझौते का नाम दिया गया था।
जुलाई की शुरुआत से अब तक करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता ने जानकारी दी कि सात जुलाई को अमेरिका की ओर से दोबारा हमले शुरू होने के बाद से अब तक करीब 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। इनमें से 96 फीसदी सैनिक इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं।
रक्षा विभाग के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने सोमवार को एक्स पर लिखा कि ज्यादातर सैनिकों को मामूली सिर की चोट लगी थी। उन्होंने यह बात न्यूयॉर्क टाइम्स की उस खबर के जवाब में कही, जिसमें दावा किया गया था कि रक्षा मंत्रालय ईरानी हमलों में घायल हुए सैनिकों की जानकारी छिपा रहा है। पार्नेल ने इस आरोप को खारिज किया और कहा कि रक्षा मंत्रालय किसी भी तरह का आंकड़ा नहीं छिपा रहा है।
हालांकि, सैन्य संघर्षों में सैनिकों की मौत और घायल होने की जानकारी रखने वाली अमेरिकी सेना की आधिकारिक प्रणाली को सोमवार शाम तक अपडेट नहीं किया गया था। इसमें हाल के उन हमलों का विवरण भी शामिल नहीं था, जिनमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हुए।
ईरान पर हालिया हमलों को लेकर अमेरिकी सेना ने क्या कहा?
सेंटकॉम ने कहा कि रविवार को किए गए हवाई हमलों में ईरान के सैन्य कमांड केंद्रों, वायु रक्षा और तटीय निगरानी ठिकानों, समुद्री सैन्य क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन प्रक्षेपण स्थलों तथा संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया। पिछले हफ्ते अमेरिका ने ईरान के एक बंदरगाह पर बने पुलों और एक टावर पर भी हमला किया था।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी हमलों में उत्तर-पश्चिमी शहर तबरीज के आसपास कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई। तबरीज राजधानी तेहरान से लगभग 520 किलोमीटर दूर है। माना जाता है कि यहां ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के भूमिगत मिसाइल अड्डे हैं।
समाचार एजेंसी के अनुसार, खुजेस्तान प्रांत के बंदर इमाम खोमैनी, होर्मोजगान प्रांत के सीरिक और जास्क तथा सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के कोनारक और चाबहार में अमेरिका ने हमले किए। ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र ने सोमवार शाम बताया कि एक दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और जहाज पर हमला हुआ था। यह हमला संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास हुआ।
जंग के बीच ईरान के मंत्री PAK पहुंचे; अमेरिका ने लगातार 10वें दिन बम बरसाए; शांति क
ओमान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में मंगलवार सुबह एक तेल टैंकर पर हमला हुआ। ब्रिटेन की सेना ने यह जानकारी दी। यह इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों को निशाना बनाए जाने की ताजा घटना है।
ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र ने बताया कि जहाज ने रेडियो के जरिये सूचना दी कि उसे किसी अज्ञात हथियार से दागी गई वस्तु ने निशाना बनाया है। एक दिन पहले इसी जलडमरूमध्य में दो अन्य जहाजों पर भी हमले हुए थे। इन हमलों की जिम्मेदारी ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ली।
युद्ध से पहले तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था। लेकिन 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर कड़ा नियंत्रण बना रखा है। हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच हमले तेज हो गए हैं। दोनों देश इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर आमने-सामने हैं।
अमेरिकी सेना ने सोमवार देर रात कहा कि उसने लगातार 10वीं रात ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। एक और अमेरिकी सैनिक की मौत के बाद नए हमले किए गए। इससे पहले ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर हमले किए थे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है।
अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया पर कहा कि ताजा हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमले करने के लिए किया जाता है। हालांकि, अमेरिका और ईरान एक बार फिर बड़े युद्ध के करीब पहुंचते दिख रहे हैं। लेकिन कूटनीतिक स्तर पर कुछ उम्मीद भी नजर आई। ईरान के गृह मंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे हैं। पाकिस्तान इस संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
पिछले महीने हुआ अंतरिम समझौता अब लगभग टूट चुका है, जिसका उद्देश्य लड़ाई रोकना था। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। लड़ाई बढ़ने के साथ दोनों पक्ष ऐसे नागरिक ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं, जिन पर लाखों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें निर्भर हैं।



