मध्यप्रदेश

कांग्रेस नेता के ड्राइवर की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 2 दिन में बनेगी SIT, दोबारा होगी जांच

भोपाल: मध्य प्रदेश में एक कांग्रेस विधानसभा प्रत्याशी के ड्राइवर की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने राज्य के डीजीपी को 2 दिन के भीतर एक नई एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है।

यह फैसला मृतक की पत्नी रजिया अली की याचिका पर आया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय पुलिस की जांच को एक भाजपा विधायक से जुड़े लोगों को बचाने के लिए राजनीतिक रूप से प्रभावित किया गया था, जिसके कारण निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि कथित राजनीतिक प्रभाव के कारण मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई। आरोपों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, हमें न्याय और निष्पक्षता के हित में यह सही लगता है कि संबंधित एफआईआर की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम द्वारा की जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट

मामले से जुड़े अहम तथ्य और निर्देश

  • जांच टीम: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इस मामले की दोबारा और निष्पक्ष जांच के लिए 3-सदस्यीय विशेष जांच टीम बनाई जाएगी।
  • टीम की कमान: इस एसआईटी के प्रमुख मध्य प्रदेश में कार्यरत लेकिन किसी बाहरी राज्य के कैडर वाले आईपीएस अधिकारी होंगे।
  • सख्त डेडलाइन: शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को हर हाल में दो दिनों के भीतर इस टीम का गठन करने का निर्देश दिया है।
  • बेंच: यह फैसला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को जारी किया।
  • मुख्य पृष्ठभूमि: यह पूरा मामला मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान एक कांग्रेस उम्मीदवार के यहां काम करने वाले ड्राइवर की हत्या से जुड़ा हुआ है।
  • याचिकाकर्ता का रुख: मृतक की पत्नी रजिया अली ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर आरोप लगाया था कि राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच करने में पूरी तरह विफल रही है।
  • राजनीतिक कनेक्शन: याचिका में दावा किया गया है कि हत्या को अंजाम देने वाले लोग एक सत्ताधारी दल (BJP) के विधायक से जुड़े हैं, इसलिए स्थानीय पुलिस दबाव में थी।
  • अदालत का मकसद: सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाहरी कैडर के आईपीएस को कमान सौंपने का मकसद जांच को स्थानीय राजनीतिक दखल और प्रभाव से पूरी तरह दूर रखना है।
  • पुरानी जांच खारिज: अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब स्थानीय पुलिस द्वारा पहले की गई जांच और थ्योरी को दरकिनार कर नए सिरे से काम शुरू होगा।
  • आगे की कार्रवाई: डीजीपी द्वारा टीम गठित किए जाने के तुरंत बाद नवनियुक्त आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में टीम नए सिरे से गवाहों के बयान दर्ज करेगी और सबूत जुटाएगी।

  

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