मध्यप्रदेश

हस्तलिखित ‘श्रीमद्भागवत महापुराण’, जम्बूद्वीप का नक्शा, महाकवि की ‘रसिक प्रिया’, एमपी में मिला दुर्लभ पांडुलिपियों का खजाना

भोपाल: एमपी ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप पर दुर्लभ पांडुलिपियों के पंजीकरण में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश से अब तक 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का सत्यापन भी हो चुका है।

अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि अभियान भारत की प्राचीन ज्ञान-संपदा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महायज्ञ है। उन्होंने कहा कि भारतीय पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलीकरण देश की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहा है।

राजधानी भोपाल में सबसे अधिक पांडुलिपियों का रजिस्ट्रेशन

बता दें कि प्रदेश में भोपाल ने सबसे अधिक 24.26 लाख पांडुलिपियों का पंजीकरण किया है। इसके बाद इंदौर, रीवा, बैतूल और छिंदवाड़ा का स्थान है। अभियान के दौरान टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का दुर्लभ नक्शा, पन्ना से महाकवि केशवदास की हस्तलिखित ‘रसिक प्रिया’, बुरहानपुर से 220 वर्ष पुराना ‘श्रीमद्भागवत महापुराण’ तथा दतिया से विक्रम संवत 1828 का ताम्रपत्र अभिलेख भी सामने आया है।

अभियान के दौरान मिलीं ये 4 सबसे अनोखी और दुर्लभ धरोहरें

  • टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा ‘जम्बूद्वीप’ का नक्शा मिला है। जो प्राचीन भारतीय भूगोल को दर्शाने वाला एक अत्यंत रहस्यमयी और दुर्लभ नक्शा है। इस चित्र के केंद्र में एक वृत्ताकार संरचना है, जिसके चारों ओर पर्वत-मालाएं और प्राचीन क्षेत्र दिखाए गए हैं।
  • पन्ना में मिली महाकवि केशव दास की ‘रसिक प्रिया’ मिली है। जो पन्ना के श्रीराम जानकी मंदिर से रीतिकाल के प्रतिष्ठित कवि केशव दास द्वारा रचित ‘रसिक प्रिया’ (1591 ई.) की हस्तलिखित पांडुलिपि है। यह राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों और काव्यशास्त्र पर आधारित एक प्रामाणिक लक्षण-ग्रंथ है।
  • बुरहानपुर में करीब 220 वर्ष पुराना हस्तलिखित और 20 फीट लंबा प्राचीन श्रीमद्भागवत महापुराण ग्रंथ मिली है, जिसे आधिकारिक तौर पर रजिस्टर किया गया है।
  • दतिया से ओरछा नरेश का ताम्रपत्र मिला है। ये श्रीराधा वल्लभ मिश्रा के निवास से ओरछा नरेश राजा उद्दोत सिंह के समय का एक ऐतिहासिक ताम्रपत्र अभिलेख है, जिस पर विक्रम संवत 1828 अंकित है।

क्या है ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ इससे क्या होगा फायदा?

पाठकों के लिए बता दें कि ‘ज्ञान भारतम् ऐप’ भारत सरकार की एक अनूठी डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य दुर्लभ पांडुलिपियों का एक विशाल डिजिटल आर्काइव तैयार करना है। इसमें देश-विदेश के शोधकर्ता, छात्र और आम नागरिक केवल एक क्लिक पर शीर्षक, लेखक, भाषा, विषय और संग्रहण स्थल के आधार पर किसी भी पांडुलिपि की जानकारी आसानी से खोज सकेंगे।

सबसे अहम बात है कि, यदि किसी आम नागरिक या संस्था के पास कोई प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ या पांडुलिपि उपलब्ध है, तो वे इस ऐप के जरिए उसके डिजिटलीकरण और संरक्षण के लिए सीधे सरकार को अनुरोध भेज सकते हैं।

  

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