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आज जारी होगी सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्य पुस्तक, छात्र पढ़ेंगे वेद; इसी सत्र से तीन भाषाएं अनिवार्य

एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा, लोकतांत्रिक मूल्यों और समकालीन सामाजिक विषयों से जोड़ना है। नई पुस्तक में वेदों, पंचमहाभूत की अवधारणा, आपातकाल, आपदा प्रबंधन और महिलाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे विषय शामिल किए गए हैं। पहली बार विद्यार्थियों को मातृभाषा में वर्कशीट और केस स्टडी आधारित गतिविधियां करने का अवसर मिलेगा।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नौवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव किए हैं। पहली बार नौवीं के छात्र चारों वेद पढ़ेंगे। साथ ही, इमरजेंसी के बारे में भी जानेंगे। एनसीईआरटी गुरुवार को सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक अंडरस्टेंडिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-एक जारी करेगी। इसमें छात्र भारतीय ज्ञान परंपरा के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद व अथर्ववेद का अध्ययन करेंगे। वेद भारतीय सभ्यता और संस्कृति के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसमें धर्म, दर्शन, समाज, शिक्षा, संगीत और जीवन-मूल्यों का ज्ञान निहित है।

खास बात है कि सत्र के मध्य में जुलाई से नौवीं कक्षा में तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की गई है। सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक तथ्यों तक सीमित नहीं रहेगी। समाज, इतिहास, भूगोल और लोकतंत्र को समझने के लिए व्यावहारिक व सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण देगी। अध्याय-एक में भारतीय ज्ञान परंपरा को दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से जोड़ा गया है। इसमें पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) की अवधारणा समझेंगे कि प्रकृति और मानव जीवन एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

आपातकाल…लोकतंत्र का विवादास्पद दौर
भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादास्पद दौर इमरजेंसी से अब नौवीं के छात्र भी रूबरू होंगे। पहले 11वीं-12वीं के राजनीतिक विज्ञान की पुस्तक में यह पाठ होता था। 25 जून, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर आपातकाल घोषित किया गया। उस दौर में हजारों लोग बिना मुकदमे के जेलों में डाले गए। समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाई गई, असहमति को अपराध माना गया और नागरिक स्वतंत्रताओं पर अभूतपूर्व अंकुश लगा दिया गया।

पहली बार मातृभाषा में वर्कशीट
एनसीईआरटी पहली बार अपनी किसी पाठ्यपुस्तक में मातृभाषा में वर्कशीट तैयार कराएगा। इसका सीधा मकसद बहुभाषावाद को बढ़ावा देना है। नई पाठ्यपुस्तक में आपदा प्रबंधन पाठ में थ्री लैंग्वेज को जोड़ा है। इसमें छात्रों को अपने अनुभव और इंटरनेट शोध के आधार पर वर्कशीट में जानकारी देनी है।

भूस्खलन से लेकर 2025 पंजाब की बाढ़ भी जानेंगे
छात्रों को हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर समेत अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलन की जानकारी दी जाएगी। वहीं, पंजाब में 2025 की बाढ़ को जगह मिली है। इसमें केस स्टडी के साथ बताया जाएगा कि पंजाब में सतलुज, व्यास व रावी नदी ने कृषि, मुर्गी पालन उद्योग को कैसे नुकसान पहुंचाया। जान-माल का कितना नुकसान हुआ। पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में पानी भरने और बाढ़ से लाखों करोड़ की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। छात्र केस स्टडी अपनी मातृभाषा में लिखेंगे।

महिला आरक्षण के ज्वलंत मुद्दे को हवा
महिला आरक्षण पर सियासी टकराव के बीच पाठ्यक्रम के बहाने इस मुद्दे को हवा दी जाएगी। नई पुस्तक में लोकतंत्र में महिला मतदान समेत उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर बाकायदा अध्याय है। इसमें स्थानीय निकायों व पंचायत में महिला आरक्षण का जिक्र है। महाराष्ट्र और गुजरात की केस स्टडी के साथ वूमन फ्रेंडली पंचायत का उदाहरण देकर यह बताने की भी कोशिश की गई है कि महिलाओं की भागीदारी बड़े बदलाव ला सकती है।

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