अंतर्राष्ट्रीय

ट्रंप ने दी फिर हमला करने की धमकी, भड़का ईरान; गालिबाफ बोले- बयानों को लेकर सावधान रहें

ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव पूरी तरह समाप्त होता नहीं दिख रहा है। ईरानी वार्ताकार गालिबाफ ने अमेरिकी चेतावनियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी भी प्रकार की धमकी से प्रभावित नहीं होगा और उसकी सशस्त्र सेनाएं हर स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी दबाव की नीति पहले भी सफल नहीं हुई और आगे भी उसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद एक बार फिर से टकराव के आसार नजर आने लगे हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य को धमकाने से कोई फायदा नहीं होगा। गालिबाफ ने कहा, ”उन्हें अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए। हमारी सशस्त्र सेनाएं उन्हें अलग तरीके से जवाब देने के लिए तैयार हैं। वे चाहे कुछ भी कहें, कार्रवाई हम करते हैं।”

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक गालिबाफ ने कहा, ”क्या उन्हें नहीं लगता कि अगर उनकी धमकियों का कोई असर होता, तो वे आज इस तरह की निराशाजनक स्थिति में नहीं पहुंचते? हम अमेरिकी धमकियों को कोई महत्व नहीं देते।” यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आया, जिसमें उन्होंने ईरान से लेबनान में अपने सहयोगी समूह हिज्बुल्ला को नियंत्रित करने और इस्राइल पर हमले रोकने को कहा था।

ट्रंप ने ईरान को दी थी क्या धमकी?
दोनों देशों के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में वार्ता शुरू हुई थी। वार्ता शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरान को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनियों में से एक दी।

उन्होंने लिखा, ”ईरान को तुरंत लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को परेशानी पैदा करने से रोकना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम ईरान पर फिर से बहुत कड़ा हमला करेंगे, जैसा हमने पिछले सप्ताह किया था, बल्कि उससे भी ज्यादा सख्ती से।”

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त फोटो सेशन से बनाई दूरी
डोनाल्ड ट्रंप की इस टिप्पणी पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताते हुए अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सेशन में शामिल होने से इनकार कर दिया। ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, वार्ता शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त तस्वीर लेने की योजना बनाई गई थी।

हालांकि, मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसमें भाग लेने से मना कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने आयोजकों को बताया कि वे ऐसे किसी भी मौके पर शामिल नहीं होंगे, क्योंकि यह अमेरिका का मीडिया शो है। गौरतलब है कि वार्ता के पहले ही दिन दोनों देशों के बीच बातचीत रुक गई। हालांकि, इसे रोकने के लिए आंतरिक तौर पर बातचीत करने का हवाला दिया गया है।

शांति के मसौदे में इस्राइल कैसे बन रहा रोड़ा?
इस बीच ईरानी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने सरकारी मीडिया को बताया कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने संबंधी मसौदा तैयार कर लिया गया है और इसे जल्द लागू किया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि रविवार की वार्ता में दुनिया भर के बैंकों में फंसी ईरानी संपत्तियों को मुक्त कराने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए इसे प्रमुख शर्तों में शामिल किया है।

सूत्रों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर के अधिकारियों के साथ इन धनराशियों को जारी करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की। वार्ता से पहले कतर ने लगभग छह अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियां मुक्त करने की घोषणा की थी। हालांकि, ईरानी पक्ष ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य की वार्ताओं की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनान में इस्राइली हमले रुकते हैं या नहीं। प्रतिनिधिमंडल ने संकेत दिया कि अगर हिज्बुल्ला के खिलाफ कार्रवाई जारी रहती है तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत से पीछे हट सकता है, जो अमेरिका की प्रमुख मांगों में शामिल है।


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