मध्यप्रदेश

उज्जैन में साधु की मौत या हत्या, 10 दिन बाद समाधि से निकाला गया शव, क्या है रहस्य?

उज्जैन में गंगेश्वर महाराज की मौत के बाद उन्हें समाधि दे दी गई थी. लेकिन जब परिजनों से उनका संपर्क नहीं हुआ, तो वह ढूंढते हुए कुटिया तक पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि साधु की 10 पहले ही मौत हो चुकी है. इसके अलावा परिजनों ने बताया कि साधु का सामान और मोटरसाइकिल भी कुटिया से गायब थी. इसी वजह से उनकी हत्या होने का शक गहरा गया. इसके बाद उनकी समाधि से शव निकलवाया गया है.

Sadhu Death Mystery: उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मंगलनाथ क्षेत्र से एक साधु की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है. मलानी बाबा की कुटिया में रहने वाले गंगेश्वरी महाराज की मृत्यु के बाद उन्हें समाधि दे दी गई थी, लेकिन करीब 10 दिन तक परिवार से संपर्क नहीं होने पर उनके भाई उज्जैन पहुंचे और हत्या की आशंका जताई. इसके बाद पुलिस ने समाधि खुदवाकर शव बाहर निकलवाया और पोस्टमार्टम कराया गया. अब रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा.

चिमनगंज मंडी थाना पुलिस के अनुसार जावरा के पीपलीबाजार निवासी अनिल जोशी ने 17 जून को शिकायत दर्ज कराई कि उनके भाई सुनील जोशी, जिन्होंने संन्यास लेकर गंगेश्वरी महाराज नाम धारण कर लिया था. मंगलनाथ क्षेत्र स्थित मलानी बाबा की कुटिया में रहते थे. करीब 10 दिन पहले दोनों भाइयों की आखिरी बार बातचीत हुई थी, जिसके बाद उनका मोबाइल बंद आने लगा और संपर्क पूरी तरह टूट गया.

भाई अनिल जोशी जब उन्हें तलाशते हुए उज्जैन पहुंचे, तो कुटिया में गंगेश्वरी महाराज नहीं मिले. आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि लगभग 10 दिन पहले उनकी मृत्यु हो गई थी और कुटिया के पीछे उन्हें समाधि दे दी गई है. परिवार को इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई थी, जिससे परिजनों का संदेह और गहरा गया.

मोटरसाइकिल और निजी सामान कुटिया से गायब
परिजनों ने पुलिस को बताया कि आखिरी बातचीत के दौरान फोन पर कुछ लोगों के विवाद की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं. वहीं गंगेश्वरी महाराज का निजी सामान और उनकी मोटरसाइकिल भी कुटिया से गायब मिली. इन परिस्थितियों को देखते हुए भाई अनिल जोशी और अन्य परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

शिकायत मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में समाधि की खुदाई कर शव बाहर निकलवाया. इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मौत स्वाभाविक थी या इसके पीछे कोई आपराधिक कारण है.

पत्नी के जाने के बाद अपनाया था संन्यास
परिजनों के अनुसार गंगेश्वरी महाराज का मूल नाम सुनील जोशी था. उनका विवाह हुआ था और उनके दो बच्चे भी हैं. बताया जाता है कि पत्नी के मायके चले जाने के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग दिया और साल 2010 में संन्यास ग्रहण कर धार्मिक साधना में जुट गए. इसके बाद वे गंगेश्वरी महाराज के नाम से जाने जाने लगे.

मां का रो-रोकर बुरा हाल, भाई ने मांगा न्याय
गंगेश्वरी महाराज की माता कृष्णा जोशी मंदिर में सेवा कार्य करती हैं. परिवार का कहना है कि कुछ दिन पहले ही महाराज ने अपनी मां से धार्मिक यात्रा पर साथ ले जाने का वादा किया था, लेकिन अचानक उनकी मौत की खबर मिलने से परिवार सदमे में है. मां कृष्णा जोशी का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के मुखिया और महाराज के पिता का निधन पहले ही हो चुका है.

महाराज के भाई राकेश शर्मा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि सिंहस्थ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन से पहले किसी साधु-संत की इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है.

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