महाराष्ट्र

पाकिस्तानी शहजाद भट्टी लिंक केस : मुंबई के मीरा रोड, पुणे, नागपुर समेत महाराष्ट्र में ATS के ताबड़तोड़ छापे, 57 युवाओं से पूछताछ

मुंबई : महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने बुधवार को पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और डोगरा गिरोह के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। इस कार्रवाई का मकसद उन लोगों को निशाना बनाना है, जो पाकिस्तान-स्थित गैंगस्टर नेटवर्क जिनमें शहजाद भट्टी गिरोह और डोगरा गिरोह शामिल हैं या उनसे जुड़े हुए हैं या उनके साथ संबंध रखते हैं। अधिकारियों के अनुसार, एटीएस की समन्वित छापेमारी बुधवार सुबह 8 बजे महाराष्ट्र के कई स्थानों पर शुरू हुई और देर रात तक चली। इस दौरान ATS ने 57 लोगों से पूछताछ की। इनमें मुंबई इलाके के 17 लोग, छत्रपति संभाजीनगर के 14 लोग, और पुणे और नासिक के 8-8 लोग शामिल हैं।

एटीएस ने नालासोपारा, मीरा रोड, नागपुर, पुणे, मुंबई, अकोला, नांदेड़, नासिक और जलगांव में छापे मारे। यह अभियान एक बड़ी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राज्य के भीतर सक्रिय कथित गैंगस्टर-संबंधित नेटवर्क को खत्म करना और उन व्यक्तियों की पहचान करना है, जिन पर इन गिरोहों के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध रखने का संदेह है।

गैंग्स्टर के संबंधों पर फंसे

अधिकारियों ने बताया कि एटीएस उन व्यक्तियों से पूछताछ करने की योजना बना रही है, जिनका कथित तौर पर इन गैंगस्टरों से संबंध है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से उनके संपर्क में हैं या जिनके बारे में माना जाता है कि वे इन नेटवर्क के फॉलोअर्स या समर्थक हैं।

पाकिस्तान में बैठकर महाराष्ट्र के युवाओं को बना रहा था निशाना

जांच एजेंसियों के अनुसार, समय-समय पर मिली खुफिया जानकारियों से संकेत मिला था कि सीमा पार से सक्रिय गैंगस्टर कथित तौर पर सोशल मीडिया का उपयोग करके महाराष्ट्र के युवाओं को प्रभावित कर रहे थे और उन्हें अपने आपराधिक नेटवर्क में भर्ती कर रहे थे।

स्लीपर सेल्स की पहचान में जुटी एटीएस

अधिकारियों ने दावा किया कि इन समूहों ने कथित तौर पर स्थानीय युवाओं को एक शानदार जीवन शैली और आर्थिक लाभ का वादा करके लुभाया। ऐसा करके वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे। अधिकारियों ने बताया कि एटीएस का यह अभियान मुख्य रूप से इन गिरोहों से जुड़ी ‘स्लीपर सेल’, स्थानीय गुर्गों और संभावित सहायता प्रणालियों की पहचान करने पर केंद्रित है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हथियारों की तस्करी या किसी भी बड़ी साजिश को, उसके आकार लेने से पहले ही रोका जा सके। कई एटीएस टीमें वर्तमान में इस व्यापक तलाशी और सत्यापन अभियान में जुटी हुई हैं, जिसे विभिन्न शहरों और जिलों में एक साथ चलाया जा रहा है।

हवाला के जरिए भेजी गई रकम

छापेमारी के दौरान, एटीएस अधिकारियों ने चल रही जांच के हिस्से के रूप में, संदिग्धों से जुड़े स्थानों से लैपटॉप, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। जांचकर्ता संदिग्धों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या पाकिस्तान या अन्य विदेशी स्थानों से अवैध ‘हवाला’ चैनलों के माध्यम से कथित तौर पर कोई धनराशि भेजी जा रही थी।

अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान बरामद डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसका मकसद कथित नेटवर्क के विस्तार का पता लगाना और उन अतिरिक्त व्यक्तियों की पहचान करना है, जो इन गैंगस्टरों या उनसे जुड़े अन्य मॉड्यूल के संपर्क में हो सकते हैं।

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