अंतर्राष्ट्रीय

ईरान ने भेजा नया शांति वार्ता प्रस्ताव, ट्रंप बोले- मंजूर नहीं; तेहरान में एयर डिफेंस सक्रिय

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से गतिरोध खत्म करने के लिए ईरान ने अमेरिका को फिर से एक नया शांति वार्ता प्रस्ताव दिया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ये प्रस्ताव पसंद नहीं आया।

ट्रंप ने कहा कि तेहरान कुछ ऐसा मांग रहा है, जिस पर सहमत नहीं हुआ जा सकता। हालांकि, उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। करीब 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद भले ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान की सैन्य ताकत को बुरी तरह कमजोर करने के दावे किए हों, लेकिन अब तस्वीर कुछ अलग दिख रही है।

अमेरिका ने इजरायल को करीब 6500 टन हथियारों की नई खेप भेजी

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने हमलों में मलबे के नीचे दबे अपने अहम हथियार भंडार को फिर से निकालकर सक्रिय करना शुरू कर दिया है। उधर, अमेरिका ने इजरायल को करीब 6500 टन हथियारों की नई खेप भेजी है और ईरान पर नए हमले की तैयारी को लेकर समीक्षा भी की है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ट्रंप को ईरान पर पहली बार हाइपरसोनिक मिसाइल – डार्क ईगल- के हमले के विकल्प सुझाए। ईरान के नए प्रस्ताव की रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत गिरकर 109 डॉलर तक नीचे आ गई।

45 जहाजों को होर्मुज में वापस लौटाने का दावा

सेंटकाम ने अब तक 45 जहाजों को होर्मुज में वापस लौटाने का दावा किया। एएनआइ के अनुसार, ईरान ने गुरुवार रात पाकिस्तान के जरिये बातचीत का नया प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के पास भिजवाया।

बताया जाता है कि इस प्रस्ताव का मुख्य फोकस होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही बहाल करना है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका अपने ”अत्यधिक आक्रामक रवैये, धमकी भरी बयानबाजी और उकसाने वाली कार्रवाइयों” से बाज आता है, तो तेहरान कूटनीति का रास्ता अपनाने को तैयार है। हालांकि, अराघची ने अपने टेलीग्राम चैनल पर यह भी कहा कि ईरानी सेना किसी भी खतरे से देश की रक्षा करने के लिए तैयार हैं।

एपी के अनुसार, ईरान के नए प्रस्ताव पर ट्रंप ने कहा कि वह इससे संतुष्ट नहीं हैं। देखते हैं कि आगे क्या होता है। उन्होंने कहा कि फोन पर बात हो रही है, लेकिन ईरानी नेतृत्व को लेकर काफी निराशा है। वे आपस में ही बंटे हुए हैं। वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उलझे हुए हैं। वे ऐसी चीज मांग रहे हैं, जिसके लिए मैं तैयार नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार संपन्न होने नहीं दिया जा सकता। इस बीच, अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने चेतावनी दी है कि जो जहाज कंपनियां ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने के लिए टोल दे रही हैं, उन पर अमेरिका पाबंदी लगा सकता है, भले ही वो पैसा दान या परोपकार के नाम पर ही क्यों न दिया जाए।

एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जिन भूमिगत ठिकानों पर भारी बमबारी कर उन्हें पूरी तरह नष्ट करने का दावा किया गया था, वहां से ईरान ने हथियारों को बाहर निकालकर दोबारा तैनात करना शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी और दो अन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईरान मौजूदा युद्धविराम का इस्तेमाल तेजी से अपनी ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं को फिर से खड़ा करने में कर रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि इन प्रयासों के पीछे मकसद साफ है- अगर हालात फिर बिगड़ते हैं, तो ईरान जल्द से जल्द जवाबी हमले के लिए तैयार रहना चाहता है।

ईरान पर नए हमलों की आहट

व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सैन्य अधिकारियों के बीच करीब 45 मिनट तक बैठक चली। बैठक में सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर और ज्वाइंट चीफ्स आफ स्टाफ के चेयरपर्सन ने ट्रंप को ईरान पर हमले से जुड़ी अपनी नई योजना के बारे में जानकारी दी।

एक्सियोस के अनुसार, ईरान को समझौते को तैयार करने के लिए छोटा लेकिन ताकतवर हमला किया जा सकता है। इसमें बुनियादी ढांचों के अलावा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।

इसके अलावा, होर्मुज के कुछ हिस्सों पर कब्जा करके उसे व्यावसायिक जहाजों के लिए दोबारा खोलने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम के स्टाक पर कब्जा करने के लिए स्पेशल फोर्सेज का आपरेशन चलाने पर भी बात हुई।

एपी के अनुसार, अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल के भी हाथ मजबूत कर रहा है। बीते 24 घंटे में इजरायल को 6500 टन हथियार और सैन्य उपकरण का जखीरा भेजा गया है।

इसमें हवाई औऱ जमीनी हमलों के लिए गोला-बारूद, सैन्य ट्रक, ज्वाइंट लाइट टैक्टिकल वेहिकल और अन्य उपकरण शामिल हैं। 28 फरवरी के बाद से अब तक इजरायल को 1,15,600 टन से ज्यादा सैन्य उपकरण भेजे जा चुके हैं। इनको कार्गो जहाज और कई विमानों के जरिये इजरायल पहुंचाया गया है।

तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय

रॉयटर के अनुसार, ईरान में शुक्रवार को अचानक एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया। यह कदम संदिग्ध छोटे विमानों और निगरानी ड्रोन की मौजूदगी के जवाब में उठाया गया।

एएफपी ने बताया कि राजधानी के कुछ हिस्सों में करीब 20 मिनट तक एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहा। इस दौरान अज्ञात छोटे विमान और टोही ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें निष्क्रिय करने की कोशिश की गई। हालांकि, थोड़ी देर बाद स्थिति सामान्य हो गई और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।

संसद में युद्ध की मंजूरी वाला प्रस्ताव टला

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने ईरान युद्ध की मंजूरी के लिए संसद में प्रस्ताव रखने का इरादा अभी टाल दिया है। युद्ध के 60 दिन का समय पूरा होने के बाद इसे जारी रखने के लिए एक मई को प्रस्ताव रखा जाना था।

वार पावर एक्ट के तहत सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होती है। एपी के अनुसार, ट्रंप ने व्हाइट हाउस की ओर से कांग्रेस को भेजे एक पत्र में कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध समाप्त हो चुका है, जिससे इसे जारी रखने के लिए जरूरी संसदीय मंजूरी की समय-सीमा को बढ़ाने की जरूरत नहीं रह गई है।

यह पत्र प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जानसन और सीनेट के प्रेजिडेंट प्रो टेंपोर चक ग्रासली को संबोधित किया गया। ट्रंप ने ये भी संकेत दिया कि टकराव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।

ईरान से टक्कर लेगी डेढ़ करोड़ डॉलर की ‘डार्क ईगल’

अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अपने पहले हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम ‘डार्क ईगल’ को तैनात करने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेंटकाम ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लांचरों पर हमला करने के लिए ‘डार्क ईगल’ की मांग की है। मंजूरी के बाद पहली बार डार्क ईगल की तैनाती की जाएगी।

‘डार्क ईगल’ को लांग-रेंज हाइपरसोनिक वेपन (एलआरएचडब्ल्यू) भी कहा जाता है। इसे लाकहीड मार्टिन कंपनी ने तैयार किया है। यह मिसाइल आवाज से पांच गुना तेज रफ्तार से उड़ान भर सकती है।

पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोक पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। हर मिसाइल की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ डॉलर है और ये एक बार में 2776 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। माना जाता है कि अमेरिका के पास आठ ही ऐसी मिसाइलें हैं।

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