स्वास्थ्य

क्या है खून को पतला करने वाली बीमारी हीमोफीलिया, इन लक्षणों को नजरअंदाज साबित हो सकता है जानलेवा

हीमोफीलिया एक गंभीर बीमारी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. इसलिए हर साल 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया डे के रूप में मनाया जाता है, जिससे लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक किया जा सके. यह दिन वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया के संस्थापक फ्रैंक श्नाबेल के जन्मदिन पर मनाया जाता है. इस मौके पर लोगों को बीमारी की जानकारी देने के साथ-साथ सही इलाज और जांच के महत्व को भी समझाया जाता है.

इस बीमारी में खून सही तरीके से नहीं जम पाता, क्योंकि शरीर में खून का थक्का बनाने वाले जरूरी तत्व कम होने लगते हैं.ऐसे में छोटी चोट लगने पर भी ज्यादा खून बहने का खतरा होता है. कई बार बिना किसी बड़ी चोट के भी अंदरूनी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जो आगे चलकर खतरनाक बन सकती है. इसलिए इसके लक्षण समय पर पहचानना बहुत जरूरी है.

त्वचा पर नीले निशान
हीमोफीलिया के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं. खासकर बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है. जब बच्चे चलना या रेंगना शुरू करते हैं, तो उनके शरीर पर बार-बार नीले निशान दिख सकते हैं. कई बार ये निशान बिना किसी चोट के भी नजर आते हैं, जो एक चेतावनी हो सकती है.

खून बहने से जुड़े संकेत
अगर किसी छोटे कट या चोट के बाद खून देर तक बहता रहे और जल्दी बंद न हो, तो यह सामान्य नहीं है. इसी तरह इंजेक्शन या टीका लगने के बाद लंबे समय तक खून आना भी एक संकेत हो सकता है. कुछ बच्चों में बार-बार नाक से खून आना या मसूड़ों से खून बहना भी देखा जाता है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

जोड़ों में दर्द और सूजन
हीमोफीलिया का एक बड़ा लक्षण जोड़ों में दर्द और सूजन भी है. कई बार बिना चोट के ही घुटनों, कोहनियों या टखनों में दर्द होने लगता है. यह अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण हो सकता है. अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो जोड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है.

अन्य गंभीर संकेत
कुछ मामलों में पेशाब या मल में खून आना भी देखा जाता है, जो अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत है. इसके अलावा अगर किसी सर्जरी या दांत निकलवाने के बाद खून ज्यादा देर तक बहता रहे, तो यह भी चिंता की बात है. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

कारण और जांच
हीमोफीलिया ज्यादातर आनुवंशिक बीमारी है, यानी यह परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है. अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ जाता है. हालांकि, कुछ मामलों में यह बिना पारिवारिक इतिहास के भी हो सकता है. इसकी पहचान के लिए खून की साधारण जांच की जाती है, जिसमें यह देखा जाता है कि खून जमने में कितना समय लग रहा है और क्लॉटिंग फैक्टर का स्तर क्या है.

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