जरा हट के

दुनिया का वो देश, जहां चाय से सस्ता है मीट, सुबह-शाम सिर्फ मांस खाते हैं लोग

भारत में आज भी ज्यादातर घरों में नॉन-वेज कभी-कभार ही बनता है. छुट्टियों में या किसी त्यौहार में या दोस्तों के आ जाने पर लोग मांस पकाते हैं. लेकिन अगर आपको लगता है कि मांस महंगा खाना है तो एक बार मंगोलिया के बारे में जान लीजिये.

इस देश में मटन और बीफ का मांस कई बार चाय या कॉफी के कप से भी सस्ता पड़ता है. मंगोलिया वह देश है जहां इंसानों से कहीं ज्यादा पशु हैं और लोग सदियों से मांस-दूध आधारित आहार पर जी रहे हैं. मंगोलिया की आबादी करीब 35 लाख है, लेकिन यहां पशुओं की संख्या 50-70 मिलियन से ऊपर बताई जाती है. यानी हर व्यक्ति पर औसतन 15-20 पशु आते हैं. इसमें भेड़, बकरी, गाय, घोड़े और ऊंट शामिल है. ये सब घास के मैदानों में घूमते रहते हैं. नॉमेडिक जीवनशैली के कारण यहां मांस की भरपूर उपलब्धता है, जिससे इसके दाम बहुत कम रहते हैं. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हैं जिनमें दावा किया गया है कि मंगोलिया में मांस कॉफी से भी सस्ता है.

मांस ही है मुख्य भोजन
मंगोलिया की पारंपरिक डाइट में रोटी या चावल बहुत कम जगह रखते हैं. यहां के लोग मुख्य रूप से “रेड फूड” (मांस) और “व्हाइट फूड” (दूध के उत्पाद) पर निर्भर रहते हैं. सर्दियों में तो पूरा आहार मांस पर आधारित होता है क्योंकि ठंड से बचने के लिए कैलोरी की जरूरत ज्यादा होती है. एक अध्ययन के अनुसार मंगोलिया में प्रति व्यक्ति मांस की खपत दुनिया में सबसे ऊंचे स्तर पर है. लाल मांस (मटन, बीफ, घोड़े का मांस) का रोजाना सेवन बहुत अधिक होता है. ग्रामीण इलाकों में लोग सुबह मांस का सूप या उबला हुआ मटन, दोपहर में मांस से बने व्यंजन और शाम को फिर मांस-दूध का कुछ ना कुछ जरूर खाते हैं. सब्जियां और फल बहुत कम इस्तेमाल होते हैं. मंगोलियाई व्यंजनों में प्रसिद्ध हैं– खोरखोग (पत्थरों पर पकाया गया मटन), उबला हुआ मांस (चानासन माख), सूखा मांस (बोर्ट्स) और विभिन्न प्रकार के दूध से बने उत्पाद जैसे एयराग (फर्मेंटेड घोड़े का दूध). नॉमेड लोग गेर (यूर्त) में रहते हैं और बाहर ठंड में मांस को फ्रीजर की तरह इस्तेमाल करते हैं.

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