तेल संकट का सच…

राजधानी दिल्ली, उप्र, बिहार, मप्र राज्यों के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर वाहनों की भीड़ दिखाई दे रही है। लोग पेट्रोल-डीजल को लेकर आशंकित हैं, लिहाजा हड़बड़ी में हैं कि जितना भी तेल मिल जाए, उतना तो जमा कर लिया जाए। ग्रामीण और किसान अलग किस्म की दहशत में हैं, क्योंकि तेल का संकट गहराएगा, तो उनकी खेती प्रभावित होगी। हालांकि भारत में पाकिस्तान जैसे ‘लॉकडाउन’ हालात नहीं हैं। वहां एक लीटर पेट्रोल 336 रुपए और डीजल 321 रुपए में बेचा जा रहा है। आशंका है कि पाकिस्तान में कभी भी ‘लॉकडाउन’ घोषित किया जा सकता है। कुछ जगहों पर तो गोलियां भी चल चुकी हैं। बांग्लादेश और श्रीलंका में भी तेल-गैस का संकट गंभीर रूप ले चुका है। बहरहाल भारत काफी हद तक आश्वस्त है, लेकिन विरोधाभासी बयान डरा रहे हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा है कि भारत में तेल-गैस, ईंधन की कोई कमी नहीं है। घबराने की जरूरत नहीं है। तेल के दाम भी नहीं बढ़ेंगे। भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, गैस का 25 दिनों का भंडार है। मंत्री जी के बयान के अगले दिन ही तेल कंपनियां घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) के दाम 60 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ा देती हैं और कमर्शियल सिलेंडर 114.50 रुपए महंगा कर दिया जाता है। अब औसत घर को रसोई गैस का सिलेंडर 900-1000 रुपए से भी ज्यादा महंगा मिलेगा। यह कौनसा सच है, मंत्री जी? बेशक ‘उज्ज्वला’ योजना के करीब 10.5 करोड़ लाभार्थियों को बढ़े दामों से अलग रखा गया है। उन्हें तो प्रति सिलेंडर 300 रुपए की सबसिडी भी मिलती है। इस तरह देश में 23 करोड़ उपभोक्ता इस महंगाई के शिकार होंगे। कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और गैस के भंडारण पर अलग-अलग बयान आ रहे हैं।
कतर एलएनजी की ‘महाशक्ति’ है। वह 40 फीसदी से अधिक एलएनजी भारत को सप्लाई करता रहा है, लेकिन ईरान के लगातार हमलों के बाद कतर ने तेल-गैस का उत्पादन ही बंद कर दिया है। कतर के ऊर्जा मंत्री ने आगाह किया है कि कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर तक उछल सकती हैं। युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम 95 डॉलर प्रति बैरल तक तो पहुंच चुके हैं। भारत करीब 85 फीसदी एलपीजी मध्य-पूर्व के देशों से ही आयात करता है और वह सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से ही होती रही है। ईरान के लड़ाकों ने यह मार्ग बंद कर रखा है, जाहिर है कि हमारा 50 फीसदी तेल-गैस बाधित है। एक बयान आया है कि देश में 25 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल का भंडार है, गैस भी पर्याप्त है, कुल मिला कर 7-8 सप्ताह का भंडार है, लेकिन विशेषज्ञों के भी बयान आ रहे हैं कि भारत में कुल 10 करोड़ बैरल ही कच्चा तेल है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार बयानबाजी कर रहे हैं कि तेल और गैस का संकट बढ़ रहा है। कीमतें बढऩे लगी हैं और सरकार ने देश की संप्रभुता और विदेश नीति अमरीका को बंधक रख दी है। ऐसे बयान देश-विरोधी, भ्रमित और अतिशयोक्तिपूर्ण हैं। अमरीकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान दिया था कि ईरान युद्ध के मद्देनजर अमरीका भारत को रूसी तेल खरीदने की, 30 दिन की, ‘अस्थायी छूट’ देता है। ऐसे बयानों पर विरोधियों और पूर्वाग्रही विशेषज्ञों को तब बिलबिलाना चाहिए, जब भारत सरकार ने ऐसी ‘छूट’ की मांग की हो अथवा हमने रूस से कच्चा तेल लेना बंद कर दिया हो। फरवरी, 2026 में भी भारत ने 10 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल रूस से आयात किया है। अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप के ‘बड़बोले’ बयानों के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदता रहा है और अब गैस का आयात भी बढ़ाएगा। जनवरी, 2026 में भारत ने रूस से 1.98 अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल आयात किया था। रूस आगामी 30 दिनों में करीब 95 लाख बैरल तेल भारत को भेज सकता है। यह प्रक्रिया शुरू भी हो गई है। यह भी वैश्विक संकट का दौर है, जैसा कि कोरोना महामारी के दौरान था। तब भी देश ने सरकार पर भरोसा किया था और अब भी कोई चारा नहीं है। सियासत तो शांतिकाल में भी जारी रह
सकती है।



