स्वास्थ्य

84 देशों की स्टडी में भारतीय युवा 60वें स्थान पर, मेंटल हेल्थ को लेकर बढ़ी चिंता

हाल ही में जारी हुई ग्लोबल माइंड हेल्थ इन 2025 रिपोर्ट ने भारत में एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा किया है. यूएएस स्थित Sapien Labs की ओर से 84 देशों को लेकर की गई इस स्टडी में भारत के 18 से 34 वर्ष के युवाओं को 60 वां स्थान मिला. यह रिपोर्ट बताती है कि भारत के युवाओं की मानसिक स्थिति न सिर्फ कमजोर हुई है, बल्कि बुजुर्गों के मुकाबले बड़ा जेनरेशन गैप भी इसमें दिखाई दे रहा है. इसके अलावा युवाओं के स्कोर में भी भारी गिरावट दिखाई दी है. इस रिपोर्ट में भारत में 78 हजार से ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों के सर्वे के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है. जहां 18 से 34 वर्ष की कैटेगरी के लोगों का माइंड हेल्थ क्वोशेंट स्कोर 33 रहा. वहीं 55 साल से ज्यादा आयु वाले का स्कोर 96 दर्ज किया गया, जो नॉर्मल मानसिक कार्य क्षमता के अनुरूप माना जाता है.

रिपोर्ट के अनुसार 18 से 34 वर्ष के भारतीय युवा मानसिक स्वास्थ्य के पैमानों पर 84 देश में 60वें स्थान पर रहे. यह रैंकिंग बताती है कि भारतीय युवा दुनिया के कई देशों के युवाओं से पीछे हैं.

वहीं 18 से 34 वर्ष की आयु वर्ग का MHQ स्कोर 33 रहा, जबकि 55 साल के आयु के लोगों का स्कोर 96 दर्ज किया. यह अंतर बताता है कि नई पीढ़ी की मानसिक सेहत में कई सालों से गिरावट आ रही है.

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है की समस्या सिर्फ चिंता और अवसाद तक सीमित नहीं है. युवाओं में भावनाओं को नियंत्रित करने, ध्यान बनाए रखने, स्थिर रिश्ते बनाने और तनाव से उभरने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है.

18 से 34 आयु वर्ग के 64 प्रतिशत युवाओं ने खुद को परिवार के करीब बताया, जबकि 55 साल से ज्यादा वाले लोगों में यह आंकड़ा 78 प्रतिशत रहा. वहीं इस रिपोर्ट के अनुसार पारिवारिक जुड़ाव में यह कमी मानसिक सेहत पर असर डाल सकती है.
इस रिपोर्ट के अनुसार 84 प्रतिशत युवा नियमित रूप से अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, जबकि बुजुर्गों में यह आंकड़ा सिर्फ 11 प्रतिशत है. वहीं खानपान की यह आदत भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बताई गई है.

भारत में पहली बार स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की औसत उम्र 16.5 साल दर्ज की गई है. इस रिपोर्ट में कम उम्र में डिजिटल एक्सपोजर को मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरे से भी जोड़ा गया है. रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक रूप से विकसित देशों के युवा मानसिक स्वास्थ्य के मामले में कम विकसित देशों के युवाओं से ज्यादा संघर्ष कर रहे हैं.

इस स्टडी में घाना पहले स्थान पर रहा है. वहीं वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में अक्सर टॉप पर रहने वाला फिनलैंड इस रिपोर्ट में 18 से 34 आयु वर्ग में 40वें स्थान पर रहा है.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button