पालक मंत्री पर झगड़ा, ‘ठाकरे ब्रदर्स’ की चुनौती के बीच अमित शाह का मुंबई दौरा

मुंबई: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को आगाज होने के बाद गृह मंत्री अमित शाह 29 और 30 अगस्त के मुंबई के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री लालबाग के राजा का दर्शन करेंगे। इसके साथ केंद्रीय गृह मंत्री मुंबई दौरे में पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बीएमसी चुनावों की तैयारी की समीक्षा करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह का दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब दोनों ठाकरे भाईयों (राज-उद्धव) में लगातार नजदीकी बढ़ रही है। गणेश चतुर्थी के मौके पर उद्धव ठाकरे खुद शिवतीर्थ पहुंचे थे। बीएमसी चुनावों में बीजेपी की जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। ऐसे में शाह के इस दौरे में काफी कुछ सियासी होने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। राज ठाकरे 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी के साथ रहे थे। तब उनकी दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात भी हुई थी। अब उन्होंने भाई के साथ जाने का मन बना लिया है।
‘ठाकरे ब्रदर्स’ ने बिगाड़ दिए हैं समीकरण
ऐसा माना जा रहा है कि मुंबई बीजेपी अध्यक्ष पर अमित साटम की नियुक्ति के बाद शाह नेताओं के विजय मंत्र देंगे। पार्टी नेतओं के अनुसार शाह दो दिवसीय दौरे में वह लालबाग के राजा का दर्शन करने के अलावा अपने नेताओं के साथ राज्य में होने वाले आगामी निकाय चुनाव को लेकर मंथन करेंगे। दोनों ठाकरे ब्रदर्स के साथ आने की स्थिति में बीजेपी को नए सिरे से तैयारी करनी पड़ेगी, हालांकि बीजेपी ने मुंबई अध्यक्ष के पद पर मराठा नेता ही नियुक्ति की है। इससे ठाकरे ब्रदर्स के मराठी अस्मिता की काट के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी की नजर जहां बीएमसी की सत्ता पर है तो वहीं शिंदे की अगुवाई वाल शिवसेना एमएमआर में फ्री हैंड चाहती है। अब देखना है कि शाह महायुति में ऑल इल वेल रहने के लिए कौन सा फॉर्मूला सुझाते हैं। सूत्रों के मुताबिक़ शाह अपने नेताओं को ठाकरे ब्रांड का मुकाबला करने का गुरुमंत्र देने के अलावा उनका मार्गदर्शन करेंगे।
क्या सुलझेगा पालक मंत्री का पेच?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार के दौरे में पालक मंत्री का पेच सुलझ सकता है। नासिक और रायगढ़ जिलों में पालक मंत्री की नियुक्ति बाकी है। इन दोनों जिलों में एनसीपी और शिंदे की सेना के साथ टकराव है। नासिक में बीजेपी की अपनी भी दावेदारी है, क्योंकि यह पर 2027 में कुंभ का आयोजन होना है। पालक मंत्री पर फैसला नहीं होने से महायुति में शामिल तीनों दलों में खींचतान सामने आ रही है। ऐसी भी चर्चा है कि जिन चीजों को लेकर शिंदे नाराज हैं। उन पर भी शाह को लकीर खींच सकते हैं ताकि महायुति में मतभेद खत्म हो और यह मनभेद न बने। शाह पिछले साल भी लालबाग के राजा के दर्शन को पहुंचे थे।



