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भारत के पंच से चित्त हुआ चीन…मालदीव को मानना पड़ा कि हिंदुस्तान ही उसका असली दोस्त

नई दिल्लीः साल 2023 का वह वक्त याद कीजिए जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत के खिलाफ ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाया। नतीजन भारत को अपने सैनिकों को मालदीव से वापस बुलाना पड़ा गया। दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि भारत में भी मालदीव के खिलाफ अभियान चलाया जाने लगा और सोशल मीडिया पर मालदीव न जाने की अपील की जाने लगी। इस तनाव का चीन ने फायदा उठाया और मालदीव में पैठ बनानी शुरू की। समुद्री सुरक्षा के लिहाज से मालदीव भारत के लिए अहम है। भारत ने धैर्य नहीं खोया और कूटनीतिक मोर्चे पर काम करता रहा। इसी का नतीजा है कि दोनों देशों के बीच फिर रिश्ते बहाल हुए और आज पीएम नरेंद्र मोदी मालदीव की दो दिन की राजकीय यात्रा पर पहुंचे हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के निमंत्रण पर वह मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। यह यात्रा भारत-मालदीव संबंधों में एक अहम पल है। पीएम मोदी की मालदीव यात्रा सियासी बयानबाजी, सैन्य तनाव और भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव के बाद संबंधों के फिर से सामान्य होने की झलक है।

जब भारत-मालदीव के रिश्ते खराब हो गए थे

कुछ ही महीने की तो बात है जब भारत और मालदीव के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। दोनों देशों के बीच फिर से दोस्ती हो रही है। भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। लेकिन अब दोनों देश हालात को समझ रहे हैं और साथ मिलकर काम करने को राजी हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है मालदीव

मालदीव, जो हिंद महासागर में लगभग 1,200 द्वीपों से मिलकर बना है, भारत के लिए बेहद अहम है। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर स्थित है। यह भारत की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय पहलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन पहलों में ‘पड़ोसी पहले’ और ‘महासागर’ यानी म्युचुअल एंड होलिस्टिक एंडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन शामिल हैं।

भारत ने धैर्य से काम लिया

एक साल पहले, मालदीव के साथ भारत के रिश्ते बहुत खराब थे। मालदीव में ‘इंडिया आउट’ कैम्पेन चलाया जा रहा था। इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। मालदीव में चीन का प्रभाव बढ़ रहा था, जिससे भारत की चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन भारत ने धैर्य से काम लिया और अपने लक्ष्यों पर फोकस किया।

भारत ने मालदीव की जब मदद की

अब, भारत और मालदीव के रिश्ते फिर से सामान्य हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। मालदीव, भारत के दक्षिणी द्वीपों से सिर्फ 70 समुद्री मील दूर है। इसलिए, यह भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत हमेशा मालदीव की मदद करता रहा है। उसने चिकित्सा मिशन, प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और आपातकालीन राहत में सहायता दी है।

ऑपरेशन कैक्टस क्या है

1988 में, भारत ने ‘ऑपरेशन कैक्टस’ के दौरान मालदीव की मदद की थी। भारतीय सैनिकों ने मालदीव में तख्तापलट को विफल कर दिया था। इससे यह साबित हो गया कि भारत, मालदीव की सुरक्षा का गारंटर है। हाल ही में, कोरोना महामारी के दौरान, भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ कार्यक्रम के तहत मालदीव को टीके और मेडिकल सप्लाई मुहैया कराई। भारत, मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है। यह पर्यटकों का एक प्रमुख स्रोत है। भारत, मालदीव को रियायती दर पर कर्ज और विकास सहायता भी देता है। भारत ने स्वास्थ्य क्लीनिक, फेरी टर्मिनल, आवास इकाइयों और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसी दर्जनों परियजनाओं के लिए फंडिंग की है।

मालदीव की राजनीति में बदलाव

2023 में, मालदीव की राजनीति में बदलाव आया। मोहम्मद मुइज्जू राष्ट्रपति बने। उन्होंने ‘इंडिया आउट’अभियान चलाया। उन्होंने भारतीय सैनिकों को हटाने की मांग की। उनका कहना था कि भारतीय सैनिक, मालदीव में विदेशी प्रभाव का प्रतीक हैं।

मालदीव, चीन की ओर झुका

मुइज्जू की जीत से नई दिल्ली में चिंता बढ़ गई। कूटनीतिक गलियारे में लगा कि मालदीव, चीन की ओर झुक रहा है। मुइज्जू ने भारत से पहले तुर्की और चीन का दौरा किया। उन्होंने भारत पर ‘धमकाने’ का आरोप लगाया। उन्होंने मालदीव के अधिकारियों द्वारा PM मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। जनवरी 2024 में, तीन मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर PM मोदी पर व्यक्तिगत हमले किए। इससे भारत में बहुत गुस्सा आया और लोगों ने मालदीव के पर्यटन का बहिष्कार करने की मांग की।

चीन ने इस अवसर का फायदा उठाया। उसने मालदीव को ऋण दिया, नई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू कीं और मुइज्जू को एक रणनीतिक सहयोगी के रूप में पेश किया। वहीं भारत ने इन चुनौतियों का सामना धैर्य से किया। उसने मालदीव के साथ बातचीत जारी रखी। जब मुइज्जू ने भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की, तो भारत सहमत हो गया। लेकिन भारत ने 76 रक्षा कर्मचारियों को प्रशिक्षित नागरिक तकनीशियनों से बदल दिया। इससे विमानन और निगरानी कार्यों में निरंतरता बनी रही।

कूटनीतिक तरीके से काम करता रहा भारत

भारत ने मालदीव को आर्थिक सहायता भी बढ़ाई। उसने विकास सहायता को 600 करोड़ रुपये तक बढ़ाया, व्यापार कोटा बढ़ाया और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम में तेजी लाई। मई 2024 तक, मालदीव के विदेश मंत्री मूसा ज़मीर, भारत से समर्थन मांगने और संबंधों को बहाल करने की इच्छा व्यक्त करने के लिए नई दिल्ली में थे।

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