छिन्न-भिन्न विश्व व्यापार व्यवस्था, टैरिफ वार से महंगा होगा व्यापार

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक नेताओं ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की, जिसमें समान शर्तों पर व्यापार करना शामिल था। इसके लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की स्थापना की गई, जो वैश्विक व्यापार को सुगम बनाने, व्यापार विवादों को हल करने और व्यापार नीतियों को नियंत्रित करने के लिए कार्य करता है। डब्ल्यूटीओ के समझौतों के प्रविधान विकासशील देशों को विशेष अधिकार देते हैं।
उदाहरणस्वरूप भारत जैसे विकासशील देश कुछ उद्योगों में ऊंचे टैरिफ (आयात शुल्क) रख सकते हैं। इसके बदले में विकसित देशों को बौद्धिक संपदा अधिकार, सेवा व्यापार उदारीकरण और कृषि नियमों में रियायतें दी गईं। यह स्थिति अमीर देशों के लिए अधिक फायदेमंद है। वर्तमान में ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने टैरिफ वार छेड़ रखा है, जिससे भू-राजनीतिक तापमान बढ़ रहा है। टैरिफ वार से किसी देश का और यहां तक कि अमेरिका का भी हित नहीं सधने वाला। इससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता की स्थिति बनती जा रही है, जिसका प्रभाव विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है।
अच्छी बात यह है कि भारत समेत कुछ देशों से अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर वार्ता हो रही है। यह संभव है कि ऐसा समझौता करने वाला भारत पहला देश बन जाए। यदि सभी देशों को अमेरिका के साथ अलग-अलग व्यापार समझौते करने पड़ते हैं तो विश्व वहीं लौट जाएगा, जहां वह विश्व व्यापार व्यवस्था बनने के पहले था। आगे जो भी हो, यदि ट्रंप अपनी मनमानी टैरिफ नीति पर लगाम नहीं लगाते तो विश्व में आर्थिक संकट तो बढ़ेगा ही, अमेरिका को फिर से महान बनाने का नारा भी खोखला साबित होगा।
ट्रंप के अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रभावों को पिछले अनुभवों से समझा जा सकता है। उन्होंने अपने पहले शासनकाल में वित्त वर्ष 2018-19 के बीच चीन से आयातित वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगा दिया था। चीन ने इसकी शिकायत डब्ल्यूटीओ में की। इस प्रकार के व्यापार विवादों को सुलझाने के लिए डब्ल्यूटीओ की एक अपील प्रक्रिया होती है, जिसमें जज अपना फैसला सुनाते हैं, लेकिन अमेरिका ने इन जजों की नियुक्ति पर ही रोक लगाकर विवाद निपटाने की प्रणाली को ही पंगु बना दिया, जिसके परिणामस्वरूप पहले जितने वैश्विक व्यापार विवाद डब्ल्यूटीओ के जरिये हल होते थे, उनकी संख्या अब तीन गुना घट गई है। इसके चलते 166 सदस्य देशों वाले विश्व व्यापार संगठन के बारे में कहा जाने लगा कि ट्रंप ने इस संस्था को दंतविहीन कर दिया है।
डब्ल्यूटीओ का प्रभावी अस्तित्व न रहने से टैरिफ का हानिकारक चक्र अब टैरिफ वार का रूप लेता जा रहा है। टैरिफ वार से व्यापार महंगा हो जाएगा और उपभोक्ताओं को मिलने वाली चीजें महंगी हो जाएंगी। इसका नुकसान अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी उठाना पड़ेगा। डब्ल्यूटीओ के मजबूत न होने की स्थिति में चीन, कनाडा आदि देशों की ओर से जवाबी टैरिफ लगाए जाने से अमेरिकी परिवारों को हर साल करीब एक लाख रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे, लगभग 180 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार प्रभावित होगा एवं अमेरिका में करीब 3.3 लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
ट्रंप यह नहीं समझ पा रहे हैं कि डब्ल्यूटीओ न सिर्फ अमेरिकियों के हितों की रक्षा करता है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को खतरनाक आर्थिक परिणामों से भी बचाता है। उल्लेखनीय है कि 2002 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने पेंसिल्वेनिया और ओहायो जैसे राज्यों में वोट पाने के लिए स्टील पर टैरिफ लगाया था तो बदले में यूरोपीय संघ ने भी अमेरिकी सामानों पर टैक्स बढ़ा दिया था, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ था।
अमेरिका में लोगों की नौकरियां चली गई थीं और स्टील पर निर्भर व्यवसायों को महंगा स्टील खरीदना पड़ा था। उस समय डब्ल्यूटीओ ने हस्तक्षेप कर टैरिफ को गलत बताया और बुश प्रशासन को इसे हटाने पर मजबूर किया था। आज ट्रंप वही गलती दोहरा रहे हैं। अगर अमेरिका की टैरिफ की जिद का विस्तार होता है तो सभी प्रभावित देश मिलकर एक निष्पक्ष और मजबूत व्यापार प्रणाली बनाने की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। टैरिफ वार बढ़ने की स्थिति में यदि यूरोपीय संघ, चीन, कनाडा, आस्ट्रेलिया और जापान जैसे देश अपनी व्यापार व्यवस्था बनाते हैं तो वैश्विक व्यापार में अमेरिका की ताकत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
ट्रंप को यह समझना होगा कि उनके कदम से वैश्विक मंच पर अमेरिका की विश्वसनीयता भी कम होगी। व्यापार के लिए हमेशा स्पष्ट और निष्पक्ष नियमों की आवश्यकता होती है, जिससे देश एक-दूसरे के साथ सही तरीके से व्यापार कर सकें। आपसी बातचीत द्वारा सभी देशों को मिलकर व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान खोजने की आवश्यकता है। मजबूत समझौते द्वारा आपसी जवाबदेही तय की जानी चाहिए, जिससे व्यापारिक संबंधों में अराजकता न बढ़े, कोई भी देश ऐसे मनमाने फैसले न ले सके, जो व्यापार युद्ध को बढ़ावा देते हों एवं जिससे विश्व व्यापार अस्थिर होता हो। विश्व व्यापार में संतुलन एवं धुव्रीकरण की प्रक्रिया को रोकने के लिए डब्ल्यूटीओ को पुनर्जीवित करने की दिशा में कार्य करना होगा। आपसी सहयोग और पारदर्शी व्यापार नियमों के माध्यम से ही एक स्थिर और न्यायसंगत वैश्विक व्यापार व्यवस्था बनाई जा सकती है।



