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सनातन धर्म रहस्य! नाग देवता के सिर पर क्यों अंकित है खड़ाऊ का चिह्न?

Shri Krishna Aur Kaliya Nag : नाग देवता की पूजा का हिंदू धर्म में खास महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने और उन्हें दूध चढ़ाने से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होता है। आपने पूजा के दौरान नाग देवता के सिर पर मौजूद चिह्न को जरूर देखा होगा जो बिल्कुल खड़ाऊ की तरह दिखाई देता है। इस चिह्न के पीछे भगवान कृष्ण और कालिया नाग की एक कथा छिपी हुई है, जिसे पढ़ने के बाद आप जान पाएंगे कि नाग देवता के सिर पर यह निशान क्यों बना हुआ है। आइए विस्तार से जानें इस कथा के बारे में…

कालिया नाग रमणक द्वीप में रहता था। लेकिन एक बार गरुड़ के आक्रमण के डर से कालिया नाग अपने विषैले परिवार के साथ गोकुल के नजदीक यमुना नदी के अंदर जाकर छिप गया है। उसके वहां रहने से पूरा जल विषैला हो गया, जिसे पीकर गोकुलवासी और पशु-पक्षी जहर से आहत होने लगे और भयभीत हो गए। एक दिन इस समस्या को लेकर सभी निवासी नंद बाबा के पास पहुंचे। उसी समय भगवान कृष्ण भी वहां मौजूद थे और उन्होंने सारी बातें सुन लीं। जब श्रीकृष्ण ने देखा की कालिया नाग को लेकर कोई हल नहीं निकल पा रहा है, तो उन्होंने खुद मन ही मन एक योजना बनाई।

श्री कृष्ण यमुना नदी किनारे अपने दोस्तों के साथ गेंद खेलने गए। इस दौरान उन्होंने जानबूझकर गेंद को यमुना नदी में फेंक दिया। इसके बाद, श्रीकृष्ण के दोस्तों ने कहा कि जिसने गेंद अंदर फेंकी है वही उसे निकालकर लाएगा। भगवान कृष्ण जो चाहते थे बिल्कुल वैसा ही हुआ। फिर, वह यमुना नदी के तल में पहुंचे। वहां, कालिया नाग सोया हुआ था। तब श्रीकृष्ण ने जानबूझकर नाग की पूंछ पर पैर रखा और उसे जगा दिया। कालिया नाग को क्रोध दिलाने के बाद दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें नाग की हार हुई। कालिया नाग को पहले यह ज्ञात नहीं था कि वह जिनसे युद्ध कर रहे हैं वह साक्षात भगवान नारायण के अवतार हैं। जब इस बात का उन्हें पता चला तो उन्होंने भगवान कृष्ण से क्षमा मांगी। इस पर श्रीकृष्ण ने उन्हें यमुना नदी को छोड़कर किसी और जगह पर जाने के लिए कहा।

कालिया नाग ने भगवान कृष्ण से कहा कि मेरी इस भूल के चलते हर कोई मुझे बुरा समझेगा, आप मुझे कोई ऐसा वरदान दें जिससे लोग मेरे बारे में बुरा न सोचें। तब भगवान कृष्ण ने कालिया नाग के सिर पर चढ़कर बांसुरी बजाते हुए नृत्य किया, जिससे नाग के सिर पर श्रीकृष्ण के पैरों के चिह्न बन गए। इन निशानों के चलते नाग का सम्मान और बढ गया। यही वजह है कि हमें नाग देवता के सिर के ऊपर हमेशा खड़ाऊ का चिह्न देखने को मिलता है, जो साक्षात भगवान कृष्ण के पैरों के निशान हैं।

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