राजनीति

‘न्याय पथ’… कांग्रेस के अधिवेशन से निकला संदेश

अहमदाबाद : कांग्रेस की अहमदाबाद में हुई दो दिन के चिंतन और मंथन बैठक से जो निचोड़ सामने आया, उसे पार्टी ने न्याय पथ का नाम दिया है। देशभर से आए अपने लगभग 2000 आईसीसी डेलिगेट्स के बीच कांग्रेस ने जब प्रस्तावना के रूप में अपना आगामी संकल्प सामने रखा, तो वहां मौजूद तमाम प्रतिनिधियों ने अपने दोनों हाथ उठाकर इनका अनुमोदन किया। राजस्थान के युवा नेता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वह पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने जहां न्याय पाठ की संकल्पना सामने रखी तो वही पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद शशि थरूर ने उसका अनुमोदन किया। उल्लेखनीय है कि साबरमती के तट से कांग्रेस ने दो संकल्पनाओं के प्रस्ताव को पारित किया, जिसमें से पहले प्रस्ताव देश के लिए था, जबकि दूसरा प्रस्ताव गुजरात पर केंद्रित था।

अपने अनुमोदन में कांग्रेस के थरूर ने कहा कि उनकी पार्टी को रोष, अतीत और नकारात्मक आलोचना की नहीं, बल्कि आशा, भविष्य और सकारात्मक विमर्श वाला दल होना चाहिए। साथ ही, पार्टी को उन मतदाताओं का समर्थन फिर से हासिल करने की कोशिश करनी होगी, जो 2009 में पार्टी के साथ थे। कांग्रेस को भविष्य की पार्टी होना चाहिए, सिर्फ अतीत की नहीं। सकारात्मक विमर्श वाली पार्टी होनी चाहिए, न कि केवल नकारात्मक आलोचना की।

राष्ट्रीय प्रस्ताव

लगभग सात पेज के प्रस्ताव में कांग्रेस ने सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक बिंदुओं के साथ-साथ राष्ट्रवाद, विदेश नीति, सर्वधर्म, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं से जुड़े बिंदु और संगठन की मजबूती से जुड़े तमाम बिंदुओं पर बात की। उल्लेखनीय है कि जिस तरह से भाजपा व संघ द्वारा देश में आपके विचार को आगे बढ़ाया जा रहा है और अपनी विरोधी विचारधाराओं के राष्ट्रवाद पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, उसके मद्देनजर पार्टी ने राष्ट्रवाद पर अपना पक्ष रखने की कोशिश की।

कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की अपनी अवधारणा को सामने रखते हुए कहा कि हमारे लिए राष्ट्रवाद का मतलब देश की भूभागीय अखंडता के साथ-साथ यहां रहने वाले लोगों का सामाजिक राजनीतिक आर्थिक सशक्तिकरण है। राष्ट्रवाद का मतलब सभी देशवासियों के लिए समान न्याय की अवधारणा और वंचित पीड़ितों शोषितों के अधिकारों की रक्षा और उत्थान के साथ-साथ भारत के बहुलतावादी स्वरूप का सम्मान है। पार्टी ने बीजेपी के राष्ट्रवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का समाज राष्ट्रवाद को जोड़ने का है तो भाजपा व संघ का समाज को तोड़ने का।

प्रस्तावना में कांग्रेस ने भाजपा और संघ पर भारत की अनेकता को खत्म करने का लगाते हुए कहा का राष्ट्रवाद पूर्वाग्रह से ग्रसित है। कांग्रेस ने तंज करते हुए कहा कि जिस संघ ने देश की आजादी, खासकर के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया, वही राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटने का ठेका लिए हुए हैं। पार्टी ने बीजेपी और संघ के राष्ट्रवाद को छद्म और अवसरवादी करार देते हुए निशाना साधा कि बीजेपी के राष्ट्रवाद की प्राथमिकता देश नहीं, बल्कि सत्ताप्रियता है।

गौरतलब है कि बीजेपी की तरफ से लगातार राष्ट्रवाद के मुद्दे को उठाया जाता रहा है, ऐसे में कांग्रेस ने भाजपा व संघ के राष्ट्रवाद का जवाब देने के लिए बाकायदा रणनीति के तहत एक सच सामने रखने की कोशिश की। इतना ही नहीं अपनी संकल्पना में कांग्रेस ने देश के सामने प्रजातंत्र का प्रहरी और संविधान का रक्षक बताने की कोशिश भी की। इस कोशिश में कांग्रेस ने ऐसी तमाम घटनाओं और उदाहरण का जिक्र किया जहां बीजेपी द्वारा संविधान या निशान लगाने की कोशिश की गई। फिर चाहे साल 2000 में समीक्षा संविधान की समीक्षा आयोग बनाने की बात हो या फिर 2024 के चुनाव में 400 पर का नारा देकर संविधान बदलने का दावा करना। दरअसल कांग्रेस राष्ट्रवाद और संविधान की रक्षा के मुद्दे को लेकर देश के सामने इन दोनों बिंदुओं पर दोनों प्रमुख प्रिया दलों की सोच के अंतर को सामने रखने की कोशिश करती दिखी।

प्रस्तावना के प्रमुख बिंदुओं पर पाइलट का कहना था कि देश में जो हालात बने हैं, वो सबके सामने हैं। पिछले दस साल में महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और धार्मिक ध्रुवीकरण ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं।इसलिए कांग्रेस अब नफरत, नकारात्मकता और निराशा के वातावरण को बदलकर न्याय और संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रस्ताव में कहा गया कि मणिपुर में बीजेपी की सत्ता ने प्रायोजित हिंसा कराई, कानून-व्यवस्था तहस-नहस हो गई, गृहयुद्ध जैसे हालात बने रहे, लेकिन संविधान की धज्जियां उड़ाकर बीजेपी नीत सत्ता को लंबे समय तक बनाए रखा गया। प्रधानमंत्री के पास मणिपुर के लोगों का दुख-दर्द जानने के लिए न समय है, न इच्छा।कांग्रेस ने प्रस्ताव में दावा किया कि सत्ताधारी ताकतों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग अथवा अनुचित दबाव द्वारा हर संस्था पर किए जा रहे हमले से अब न्यायपालिका भी अछूती नहीं रही है।

सामजिक न्याय पर कांग्रेस का कहना था कि पार्टी इसके लिए प्रतिबद्ध है कि हम केंद्रीय कानून बनाकर एससी-एसटी सबप्लान को कानूनी आकार देंगे और इन समुदायों को आबादी के हिसाब से बजट में हिस्सेदारी देंगे। साथ ही, कांग्रेस ने एससी, एसटी व ओबीसी के लिए आरक्षण की 50 फीसदी की सीमा को बढ़ाने को लेकर भी अपना इरादा जताया।

गुजरात पर प्रस्ताव

कांग्रेस समझ चुकी है कि अगर देश में बीजेपी को सत्ता से उतारना है तो उसकी शुरुआत गुजरात से ही करनी होगी। इसलिए वह देश की आजादी की लड़ाई में गुजरात के योगदान को रेखांकित करते हुए मौजूदा हाल में भी गुजरात से बीजेपी की सत्ता को चुनौती की योजना बना रही है। कांग्रेस समझ रही है कि अगर पीएम मोदी और अमित शाह के गृह राज्य में बीजेपी हारती है तो फिर देश के बाकी राज्यों में इन दोनों के अजेय होने का तिलस्म टूट जाएगा।

इसमें जहां एक ओर कांग्रेस ने इतिहास में गुजरात और कांग्रेस के रिश्तों को सामने रखने की कोशिश की, वहीं उसने अपने शासन में गुजरात में हुए विकास की गाथाओं का भी जिक्र किया, फिर चाहे आनंद में हुई दूध क्रांति हो या नर्मदा सिचाई योजना और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का अस्तित्व में आना, कांग्रेस ने बताने की कोशिश की कि आजादी के बाद गुजरात के विकास में कांग्रेस की कैसी अहम भूमिका रही।

वहीं कांग्रेस ने पिछले तीन दशकों में बीजेपी शासनकाल में राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य के गिरते स्तर, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों की स्थित, छोटे उद्योगों की हालत को लेकर निशाना साधा। इसी के साथ कांग्रेस ने एक रोडमैप देने की कोशिश की कि अगर कांग्रेस यहां सत्ता में आती है कि तो युवाओं, महिलाओं, किसानों और उद्यमियों के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। अपनी प्रस्तावना में कांग्रेस ने कहा कि हम टेक्नोलॉजी की मदद से एक आधुनिक और विकसित गुजरात सहित भारत का निर्माण करने के लक्ष्य के साथ कृषि, औद्योगिक सेवा क्षेत्र, महिलाओं के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करेंगे और महंगाई, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार का उन्मूलन करेंगे।-मंजरी चतुर्वेदी

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