संपादकीय

बात बिगड़ेगी

RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का यह कहना कि स्वयंसेवक अगर मथुरा और काशी से जुड़े आंदोलनों में भाग लेते हैं, तो संगठन को आपत्ति नहीं होगी, संघ के पिछले स्टैंड से उलट है। होसबोले ने हालांकि सामाजिक कलह से बचने की बात कही और यह भी साफ किया कि संघ ऐसे किसी आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगा। लेकिन, उनकी बातें विरोधाभासों से भरी लगती हैं और इससे सामाजिक समरसता बनाने में कोई मदद नहीं मिलेगी।

भागवत से अलग

होसबोले ने 1984 का हवाला दिया कि उस समय विश्व हिंदू परिषद (VHP) और साधु-संतों ने तीन मंदिरों का मुद्दा उठाया था। अब जब वह कह रहे हैं कि संघ काशी, मथुरा के मंदिरों का मुद्दा उठाने पर आपत्ति नहीं करेगा तो जाहिर है, इसका यह मतलब निकाला जाएगा कि उन्होंने अपने स्वयंसेवकों को इजाजत दे दी है। यह संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस रूख से बिल्कुल अलग है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग तलाशना सही नहीं है, और यह भी कि अब कोई आंदोलन नहीं होगा।

गैर-जरूरी बयान

असमंजस बढ़ाने वाला भागवत ने पिछले साल दिसंबर में भी मस्जिदों को लेकर उठ रहे विवाद को शांत करने का प्रयास किया था। तब उन्होंने कहा था कि, ‘राम मंदिर निर्माण के बाद कुछ लोगों को लगता है कि वे नई जगहों पर इसी तरह के मुद्दों को उठाकर हिंदुओं के नेता बन सकते हैं। यह स्वीकार्य नहीं है। जब संघ प्रमुख ने एक स्पष्ट रेखा खींच दी थी, तय होसबोले का बयान असमंजस बढ़ाने वाला है। संघ कार्यकर्ता क्या समझें, कि उन्हें भागवत की लाइन पकड़नी है या होसबोले की ?

एक्ट की व्याख्या

राम मंदिर निर्माण के बाद लगा था कि मंदिर-मस्जिद का मुद्दा खत्म हो जाएगा, लेकिन हर कुछ दिन बाद एक नई जगह विवादों की जद में आ जा रही है और यह सब हो रहा है। Places of Worship Act, 1991 के होते हुए। इसकी वजह इस एक्ट की 2022 में की गई वह अतिरिक्त व्याख्या है, जो सुप्रीम कोर्ट ने की थी। तब शीर्ष अदालत ने कहा था कि किसी पूजास्थल का धार्मिक स्वरूप नहीं बदला जा सकता, लेकिन धार्मिक स्वरूप की जांच करने से कानून नहीं रोकता।

जल्दी हो निपटारा

कानून की इस अतिरिक्त व्याख्या ने विवादों की बाढ़ ला दी। अब इसी की आड़ में तमाम जगह सर्वे की मांग उठ रही है। ऐसे माहौल में होसबोले के बयान से बात संभलेगी नहीं, बल्कि और बिगड़ जाएगी और इससे यह जरूरत भी जाहिर होती है कि सुप्रीम कोर्ट को वर्शिप एक्ट से जुड़े मामलों का निपटारा जल्द से जल्द कर देना चाहिए।

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