टैरिफ वार, मुकाबले को तैयार भारत, मुक्त व्यापार समझौते के मामले में सबसे आगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने दुनिया में बहुराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के समक्ष नई चुनौती पेश कर दी है। इससे पार पाने के लिए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का जो नया दौर शुरू हुआ है, उसमें भारत सबसे आगे है। भारत की इस नई व्यापार रणनीति में कुछ महत्वपूर्ण बातें दिखाई दे रही हैं। पहली, अब लंबे समय तक व्यापार वार्ता चलाने के बजाय व्यापार वार्ता शीघ्रतापूर्वक पूरी की जाए। दूसरी, व्यापार वार्ता के तहत मुख्य कारोबारी मुद्दों जैसे शुल्क, गैर शुल्क बाधाओं पर शुरुआत में ही प्राथमिकता के साथ मंथन किया जाए। तीसरी, व्यापार वार्ता में भारत के लिए सिरमौर बने हुए सेवा निर्यात के साथ-साथ इलेक्ट्रानिक्स, केमिकल्स और आटोमोटिव सेक्टर को विशेष रूप से शामिल कराने पर ध्यान दिया जाए। इससे वैश्विक वैल्यू चेन में भी भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ती हुई दिखाई देगी, जो अभी सिर्फ 3.3 प्रतिशत है।
हाल में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भारत आए थे। उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने, विशेष रूप से व्यापार, कृषि, शिक्षा, सेवा क्षेत्र, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। पिछले 10 वर्षों से धीरे-धीरे आगे बढ़ रही भारत-न्यूजीलैंड व्यापार वार्ता को अब महज 60 दिन में पूर्ण करना सुनिश्चित किया गया है। भारत ने अमेरिका से टैरिफ को लेकर वार्ता तेज कर दी है। इसी सिलसिले में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि इस समय भारत दौरे पर हैं।
विगत दिनों प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग (ईयू) की प्रेसिडेंट उर्सला वोन लेयेन ने भी दोनों पक्षों के बीच कारोबार एवं आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर जारी किंतु-परंतु को पूरी तरह समाप्त कर दिया। दोनों नेताओं ने इस बारे में अपने संबंधित मंत्रालयों को निर्देश दिया कि दोनों पक्षों के हितों के मुताबिक भारत-ईयू व्यापार समझौते पर इस वर्ष के अंत तक मुहर लगाई जाए। इसी तरह प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच हुई वार्ता के दौरान भारत-अमेरिकी द्विपक्षीय कारोबार को वर्ष 2030 तक 500 अरब डालर करने का लक्ष्य रखा गया। पिछले माह ब्रिटेन के कारोबार मंत्री जोनाथन रेनाल्ड्स ने भी कहा कि भारत के साथ पांच से छह वर्षों में द्विपक्षीय कारोबार को तीन गुना करना है।
इस समय दुनिया में द्विपक्षीय व्यापार समझौते नए सिरे से दोबारा अहम हो गए हैं। इसे देखते हुए भारत द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं को पूर्ण करने और मुक्त व्यापार समझौतों के क्रियान्वयन के लिए तत्परता से आगे बढ़ रहा है। गत वर्ष इटली में विकसित देशों के संगठन जी-7 के शिखर सम्मेलन में भारत विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल हुआ था। तब सम्मेलन में शामिल प्रमुख देशों के राष्ट्र प्रमुखों के साथ भारत की द्विपक्षीय व्यापार वार्ताएं हुई थीं। इसी तरह 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में मास्को में भारत और रूस के बीच बहुआयामी संबंधों की संपूर्ण शृंखला की समीक्षा के बाद भारत और रूस ने द्विपक्षीय कारोबार को 2030 तक 100 अरब डालर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा।
वहीं न्यूयार्क में भारत और अमेरिका के बीच हुई बातचीत में कई व्यापार समझौतों के साथ कोलकाता में एक सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने का करार हुआ। कजान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन का भारत ने द्विपक्षीय वार्ताओं के लिए रणनीतिक लाभ लिया। इसके साथ ही भारत और चीन के बीच पांच साल बाद अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। इसके बाद भारत और चीन के बीच संबंधों का नया अध्याय दिखाई दे रहा है। इसके अलावा भारत कई और व्यापार वार्ताओं को भी तत्परता से आगे बढ़ा रहा है।
गत वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील, नाइजीरिया और गुयाना का पांच दिवसीय दौरा किया था। वहां उन्होंने जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर फ्रांस, इटली, ब्राजील, सिंगापुर, इंडोनेशिया, पुर्तगाल, नार्वे और स्पेन समेत कई देशों के नेताओं के साथ वार्ताएं कीं। फिर नाइजीरिया और गुयाना पहुंचकर इन देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की सार्थक वार्ताएं कीं। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके भी अपने सबसे पहले राजकीय विदेशी दौरे पर भारत आए और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता की।
अब दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती देने तथा पिछले वर्ष की गई व्यापार वार्ताओं को अंतिम रूप देने के लिए पीएम मोदी अप्रैल में श्रीलंका जाएंगे। बीते वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने कुवैत के साथ वार्ता में आइटी, फार्मा, फिनटेक, बुनियादी ढांचे आदि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जो प्रभावी व्यापार वार्ता की थी, वह शीघ्र ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रूप ले सकती है। नार्वे, हंगरी, ग्वाटेमाला, पेरू, चिली के साथ भी शीघ्र ही व्यापार समझौते की बातचीत शुरू हो सकती है। इसके साथ-साथ अब भारत ओमान, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, इजरायल, खाड़ी देश परिषद के साथ भी एफटीए को अंतिम रूप देने की डगर पर आगे बढ़ रहा है।
ट्रंप के टैरिफ वार का भारत के निर्यात पर कोई ज्यादा असर नहीं होगा। इससे भारत के कुल निर्यात में तीन से 3.5 प्रतिशत गिरावट आ सकती है। इस कमी की पूर्ति में नए द्विपक्षीय व्यापार समझौते और मुक्त व्यापार समझौते मददगार होंगे। निर्यात की इस कमी को मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र, दोनों से अधिक निर्यात के माध्यम से सरलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है।



