डोपामाइन कम हुआ तो दिमाग हो जाएगा खराब, खाने की 4 चीज बढ़ाती हैं इसका लेवल

डोपामाइन को दिमाग का मोटिवेशन मॉलेक्यूल कहते हैं, जो कि एक न्यूरोट्रांसमीटर है। यह आपके मूड, फोकस, प्लेजर आदि को रेगुलेट करने में मदद करता है। जब इसका लेवल बैलेंस होता है, तो एनर्जी, फोकस और मैनेज करने की क्षमता सही रहती है। लेकिन तनाव, खराब डाइट और नींद की कमी से इसका लेवल बिगड़ सकता है। इसकी वजह से हम निहाश, हताश और सुस्ता महसूस कर सकते हैं।
इस स्थिति को सही करने के लिए खाना आपकी मदद कर सकता है। क्योंकि खाने की कुछ चीजें डोपामाइन प्रोडक्शन और फंक्शन में मदद करने वाले कंपाउंड से भरी होती हैं। यह नेचुरल तरीके से मूड और कॉग्निटिव हेल्थ को सुधारने का काम करती हैं। हार्वर्ड की डॉक्टर उमा नायडू ने इनके बारे में बताया है।
यह एक एडाप्टोजेनिक जड़ है, जो थकान को दूर करके मेंटल शार्पनेस बढ़ा सकती है। इसमें जिनसेनोसाइड नाम का एक्टिव कंपाउंड होता है, जो डोपामाइन लेवल को रेगुलेट करके फोकस और स्ट्रेस सहने की शक्ति बढ़ाता है। इसे चाय या सप्लीमेंट के रूप में ले सकते हैं।
केसर को अक्सर ‘सनशाइन स्पाइस’ कहा जाता है। इसमें क्रोसिन और साफ्रानल कंपाउंड होता है, जो कि डोपामाइन और सेरोटोनिन बढ़ाने में असरदार देखा जाता है। यह इमोशनल बैलेंस बढ़ाता है। एक चुटकी केसर को चाय में या खाने में डालकर ले सकते हैं।
हल्दी में एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं, जो करक्यूमिन की वजह से आते हैं। यह कंपाउंड डोपामाइन उत्पादन में भी मदद करता है। यह डोपामाइन पैदा करने वाले न्यूरोन की सुरक्षा करता है और दिमाग के लिए जरूरी ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रोफिक फैक्टर को बूस्ट करता है। हल्दी को काली मिर्च के साथ खाना चाहिए, जिससे अवशोषण बढ़ जाए।
अदरक में जिंजरोल होता है, जो एक बायोएक्टिव कंपाउंड है। यह डोपामाइन पाथवे को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है, जिससे मूड और कॉग्निटिव फंक्शन को मदद मिलती है। इसे ताजा और सूखा हुआ, दोनों रूप में सेवन कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: लेख में दिए गए नुस्खे की जानकारी व दावे पूरी तरह से इंस्टाग्राम पर प्रकाशित रील पर आधारित हैं। एनबीटी इसकी सत्यता, सटीकता और असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है। किसी भी तरह के नुस्खे को आजमाने से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।


