हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट असंवैधानिक, पति अपनी मेडिकल जांच करवा सकता है

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में पति द्वारा पत्नी के कौमार्य परीक्षण (वर्जिनिटी टेस्ट) की मांग को असंवैधानिक करार देते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह न केवल महिलाओं की गरिमा और मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा) का भी उल्लंघन करता है।
यह मामला रायगढ़ जिले से जुड़ा है, जहां एक व्यक्ति ने शादी के कुछ महीनों बाद अपनी पत्नी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाते हुए उसके वर्जिनिटी टेस्ट की मांग की थी। वहीं, पत्नी ने पति पर नपुंसकता का आरोप लगाकर ₹20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण की मांग की थी।
पारिवारिक न्यायालय ने पहले ही पति की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट में अपील की। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पति अगर खुद पर लगे नपुंसकता के आरोपों को गलत साबित करना चाहता है, तो वह अपनी मेडिकल जांच करवा सकता है, लेकिन पत्नी पर वर्जिनिटी टेस्ट का दबाव डालना पूरी तरह अवैध है।
कोर्ट के इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



