राष्ट्रीय

बलूचिस्तानी की आज़ादी, तेज हुआ संघर्ष

दशकों के शोषण और दमन के खिलाफ बलूचिस्तान के लड़ाकों ने हाल के दिनों में कई बड़े हमले करके पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया है। हाल ही में एक ट्रेन का अपहरण व सुरक्षा बलों पर हमले की घटनाओं से बलूच लड़ाकों के हौसलों का पता चलता है।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में इन दिनों बलूच लिबरेशन आर्मी, बलूच लिबरेशन फ्रंट और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने मिलकर पाकिस्तान और वहां तैनात चीनी सेना के जवानों की नाक में दम कर रखा है। इन संगठनों ने मिलकर ‘बलूच नेशनल फ्रीडम मूवमेंट’ चला रखा है। मकसद बलूचिस्तान की आज़ादी की लड़ाई एक साथ मिलकर लड़नी है। इन संगठनों ने निर्णय लिया है कि पाकिस्तान के साथ-साथ चीन से अपने संसाधनों के शोषण को रोकना है और अपने अभियानों को और तेज़ करना होगा।

गत 11 मार्च को बलूचिस्तान के कच्छी जिले के आब-ए-गम इलाके के पास सुरंग में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर कुछ बंदूकधारियों ने हमला करके उसे अपने कब्जे में ले लिया। इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली और दावा किया कि उनकी गोलीबारी में 30 लोग मारे गए तथा 214 यात्रियों को बंधक बना लिया है। यह ट्रेन क्वेटा सेे पेशावर जा रही थी, जिसमें तकरीबन 500 यात्री सवार थे। इस रेल मार्ग पर 17 सुरंगे हैं और रास्ता कठिन होने के कारण रेल की गति धीमी रहती है। इस घटना के बारे में बलूचिस्तान की सरकार ने बताया कि 80 यात्रियों को बचा लिया गया। इसके अलावा सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 13 हमलावर मारे गए।

पाकिस्तान इस घटना के बाद से दूसरे देशों पर आरोप मढ़ने में जुटा हुआ है। गत 13 मार्च को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत अलगाववादियों की मदद कर रहा है। जाफर एक्सप्रेस पर हमले के समय आतंकवादी अपने हैंडलर्स और अफगानिस्तान में रिंग लीडर्स के संपर्क में थे। इन आरोपों को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए ये निराधार आरोप हैं। पूरी दुनिया जानती है कि वैश्विक आतंकवाद का केंद्र कहां है। पाकिस्तान को दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपना आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान सरकार और सेना इस घटनाक्रम में बलूच विद्रोहियों से निपटने में असफल दिखी है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने दावा किया कि उन्होंने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक करने वाले 33 बीएलए विद्रोहियों को खत्म कर दिया है लेकिन सफल ऑपरेशन की कोई तस्वीर तक जारी नहीं की।

जाफर एक्सप्रेस की घटना से पाकिस्तानी सेना अभी उबर भी नहीं पाई थी कि बलूच लिबरेशन आर्मी के विद्रोहियों ने 16 मार्च को बलूचिस्तान प्रांत के नोशकी जिले में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर अचानक हमला करके बड़ी संख्या में सैनिकों को मार डाला। यह काफिला क्वेटा से कफ्तान जा रहा था। बीएलए के दावे के मुताबिक, 90 सैनिकों को मार डाला गया। बीएलए ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए वीडियो भी जारी किया है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तानी पुलिस ने हमले में तीन सैनिकों और दो नागरिकों के मारे जाने तथा 30 जवानों के घायल होने की पुष्टि की है। बीएलए द्वारा जारी बयान में कहा गया कि उसके आत्मघाती दस्ते मजीद ब्रिगेड ने नोशकी में रक्षक मिल के पास पाकिस्तानी सेना के काफिले को निशाना बनाया। इस काफिले में आठ बसें थीं, जिनमें से एक बस पूरी तरह ध्वस्त हो गई। दूसरी बस को फतेह ब्रिगेड ने घेर लिया और उसके सभी जवानों को मार डाला।

दरअसल, बलूच अपनी आज़ादी के लिए अभियान चला रहे हैं। सन 1947 से पहले ही बलूचिस्तान में भी आज़ादी की मांग तेज हो गई थी। 4 अगस्त, 1947 को दिल्ली में हुई मीटिंग में माउंटबैटन के साथ कलात के वकील के रूप में मोहम्मद अली जिन्ना थे, जिन्होंने कलात, खरान, लास बेला और मकरान को मिलाकर बलूचिस्तान बनाने का सुझाव दिया था। बाद में जिन्ना इससे पलट गए, लेकिन कलात के खान ने 12 सितम्बर, 1947 को बलूचिस्तान को आज़ाद देश घोषित कर दिया। 26 मार्च, 1948 को पाकिस्तानी सेना वहां घुस गई और इसे अपने आधिपत्य में ले लिया। इसके बाद सन 2000 तक बलूचियों ने चार बार पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ विद्रोह किया, लेकिन हर बार इसे दबा दिया गया। सन 2005 में अकबर बुगती के नेतृत्व में पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह तेज हो गया। 26 अगस्त, 2006 को बुगती और उनके साथियों की हत्या कर दी गई। बुगती के बाद बलूच नेता गिरी को भी मार दिया गया। इसके बाद 2009 से वहां के लोगों को गुप्त रूप से निशाना बनाना शुरू किया गया। तब से अब तक बड़ी संख्या में बलूचों को या तो मार दिया गया या फिर उन्हें गायब कर दिया गया।

बलूच विद्रोहियों की शुरुआत से यही मांग रही है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान को खाली कर उनके सभी नेताओं को बिना शर्त रिहा कर दिया जाए। इसके अलावा, बलूचिस्तान में चल रहे चीन के सभी प्रोजेक्ट बंद कर दिए जाएं। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। यह पाकिस्तान के राजस्व का प्रमुख स्रोत है। इस इलाके में धातुओं के विशाल भंडार हैं। आधे पाकिस्तान की गैस आपूर्ति यहीं से होती है। बलूचिस्तान के लोग इसे अपने संसाधनों की लूट बताते हैं। बलूचिस्तान, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा है, जो बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का एक भाग है। बलूचिस्तान में ही ग्वादर बंदरगाह है, जिसका विकास चीन के हाथों में है। बलूच नाराज हैं और विरोध में आंदोलन चला रहे हैं। वहीं पाकिस्तान की सैन्य ताकत और सुरक्षा बलों की स्थिति दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है।-डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव

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