राजनीति

अभिभाषण,’बोरिंग’,’Poor lady’ बोलकर दिल्ली चुनाव से पहले सेल्फ गोल कर बैठी कांग्रेस?

संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ ही ये प्रारंभ हो गया। बजट सत्र से पहले आमतौर पर लोग टैक्स में कटौती के साथ ही सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, बजट सत्र से पहले उम्मीद से उलट एक नया विवाद जरूर आ गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार के कामों को गिनाया। इसमें किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। पहले भी ऐसा ही होता आया है। इस पर कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी ने ऐसी टिप्पणी की जिससे पूरा राजनीतिक माहौल ही गर्म हो गया।

सोनिया ने आखिर क्या कहा?

संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता ने राष्ट्रपति को ‘पूअर लेडी’ कह दिया। संयुक्त अभिभाषण में हिस्सा लेने के बाद मीडिया के सामने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मौजूद थे। तीनों आपस में बात कर रहे थे।

इसी दौरान अपनी मां को देखते हुए राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के भाषण को ‘बोरिंग’ बताया। सोनिया गांधी ने कहा कि इसमें कुछ नया नहीं था। पुरानी चीजों को रिपीट किया गया है। सोनिया ने प्रियंका गांधी की ओर जाते हुए कहा कि राष्ट्रपति काफी थक गई थी। वो बड़ी मुश्किल से बोल पा रही थीं। खराब बातें बोली पुअर लेडी।

बीजेपी तो बड़ा मुद्दा बनाएगी

सोनिया गांधी के बयान पर उम्मीद के अनुरूप बीजेपी ने काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बीजेपी ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही संवैधानिक पद का अपमान करती रही है। पार्टी ने इसे आदिवासी सम्मान के साथ भी जोड़ा। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को राष्ट्रपति से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी कांग्रेस की तरफ से इस विवादित बयान से उठे विवाद को आसानी से शांत नहीं देगी। बीजेपी चाहेगी कि कांग्रेस को इस बयान का खामियाजा भुगतना पड़े। पार्टी निश्चित रूप से इसे दलितों, आदिवासियों की अस्मिता का मुद्दा बनाकर दिल्ली चुनाव में कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी।

राष्ट्रपति भवन की तरफ से भी प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति मुर्मू के भाषण पर विपक्ष की टिप्पणियों को लेकर राष्ट्रपति भवन के प्रेस सचिव की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। ये प्रतिक्रिया उम्मीद के अनुरूप ही है। इसमें विपक्ष की टिप्पणी को असभ्य (Poor Teste), दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह से टालने योग्य बताया गया है। प्रेस सचिव की तरफ से कहा गया कि ऐसी टिप्पणियां स्पष्ट रूप से उच्च पद की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, और इसलिए अस्वीकार्य हैं।

राष्ट्रपति भवन ने यह स्पष्ट किया कि सच्चाई से इससे अधिक दूर कुछ भी नहीं हो सकता। राष्ट्रपति जी किसी भी समय थकी नहीं थीं। सोनिया गांधी के बयान को किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता है। राजनीति में सरकार से मतभेद विपक्ष का काम है। इसके बावजूद विपक्ष को यह ध्यान रखना चाहिए कि सरकार की आलोचना करने के साथ ही वह संवैधानिक मर्यादा का भी ध्यान रखे।

मौत का सौदागर… कांग्रेस ने चुकाई थी कीमत

ऐसे में सवाल है कि क्या दिल्ली चुनाव से पहले कांग्रेस ने राष्ट्रपति के खिलाफ टिप्पणी कर आत्मघाती गोल कर लिया है। इस सवाल का जवाब तो इस पर निर्भर करेगा कि बीजेपी इस बयान को जनता के बीच किस तरह से रख पाती है। इसके अलावा जनता कांग्रेस के विवादित बयान पर किस तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।

हालांकि, इतिहास बताया है कि सोनिया गांधी के विवादित बयान की कांग्रेस को अतीत में भारी कीमत चुकानी पड़ी है। 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को ‘मौत का सौदागर’ बताया था। सोनिया गांधी ने नवसारी में चुनावी रैली में कहा था कि गुजरात की सरकार चलाने वाले झूठे, बेईमान, मौत के सौदागर हैं। बीजेपी और नरेंद्र मोदी ने इस बयान को कांग्रेस के खिलाफ ही हथियार बनाकर उसे मात दी थी। अब दिल्ली चुनाव में सोनिया की टिप्पणी कांग्रेस पर कितनी भारी पड़ेगी यह 8 फरवरी को ही सामने आएगा।

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