संपादकीय

हादसों पर सवाल…

साल के आखिरी दिनों में हुई दो भीषण विमान दुर्घटनाओं के कारण जहां दुनिया भर में शोक की लहर है, वहीं इस वजह से हवाई यात्रा की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी केंद्र में आ गए हैं। कजाकिस्तान में बुधवार को लैंडिंग करते हुए अजरबैजान के विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से 38 लोगों की मौत हुई तो रविवार को दक्षिण कोरिया में हुए हादसे में 179 लोगों के मारे जाने की खबर है।

पक्षी टकराया विमान से : साउथ कोरिया के मुआन में हुए हादसे में जिस तरह से लैंडिंग का प्रयास करते हुए विमान कुछ सेकंड के अंदर ही लपटों से घिरा नजर आया, वह किसी का भी दिल दहला सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लैंडिंग से कुछ ही पहले विमान के पिछले हिस्से से एक पक्षी टकराया था। कहा जा रहा है कि शायद इसी वजह से लैंडिंग गियर में खराबी आ गई। लेकिन कई जानकार इससे सहमत नहीं हैं। संभव है कि हादसे की जांच से कुछ और तथ्य सामने आने के बाद इस पहलू पर और रोशनी पड़े।

पूतिन की माफी : 
इस बीच अजरबैजान विमान हादसे को लेकर हो रहे अलग-अलग दावों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पूतिन की माफी ने सस्पेंस को पूरी तरह खत्म किए बगैर संदेहों को और गहरा कर दिया है। पूतिन ने अपने माफीनामे में यह तो कहा कि जब वह विमान कजाकिस्तान में लैंड कर रहा था तब यूक्रेनी ड्रोन हमलों के मद्देनजर रूसी डिफेंस सिस्टम एक्टिव था, पर यह स्वीकार नहीं किया कि वह विमान इसी सिस्टम का टारगेट बना। विमान किसी तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हुआ या गलती से चली किसी मिसाइल का, सच तो यही है कि इसमें सवार यात्रियों को जान गंवानी पड़ी।

साउथ कोरिया का बेहतर रेकॉर्ड : एविएशन इंडस्ट्री की ज्यादा चिंता स्वाभाविक ही साउथ कोरियाई विमान हादसे को लेकर है क्योंकि उसे यात्रियों की बढ़ती आशंकाओं का सामना करना है। हालांकि हवाई दुर्घटनाओं के मामले में साउथ कोरिया का रेकॉर्ड अच्छा माना जाता रहा है। यह पिछले एक दशक में हुई साउथ कोरियन एयरलाइन की पहली बड़ी दुर्घटना है। पिछली दुर्घटना 2013 में हुई थी जब एशियाना एयरलाइंस की एक फ्लाइट सैन फ्रांसिस्को में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उसमें तीन लोग मारे गए थे।

हवाई यात्रा सबसे सेफ : ऐसी दुर्घटनाएं निश्चित रूप से लोगों के मन में डर बैठाती हैं। लेकिन तथ्य यह है कि आज भी हवाई यात्राएं सबसे सेफ कही जा सकती हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक, विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने का अनुपात 12 लाख में एक बैठता है। अगर हादसे में मौत का अनुपात देखा जाए तो वह 1.1 करोड़ यात्रियों में एक है, जबकि कार दुर्घटनाओं में मौत का अनुपात 5000 में एक पाया गया है।

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