भूतों का मेला, शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को पीने से भूत-प्रेत की छाया से मिलती है मुक्ति

भोजपुर. बिहार और मेलों का रिश्ता बहुत पुराना है. यहां छोटे-बड़े त्योहारों पर मेले लगना आम बात है. लेकिन क्या आपने कभी ‘भूतों का मेला’ सुना है? शायद नहीं, लेकिन यह सच है. भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड के इटहना गांव में नवरात्रि के समय और आम दिनों में भी ‘भूतों का मेला’ लगता है. मान्यता है कि यहां ब्रह्म बाबा और शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल पीने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
शायद आपको यह सुनकर अजीब लगे, लेकिन यह पूरी तरह सच है. बिहार के कई स्थानों पर ऐसे मेले लगते हैं. भोजपुर जिले से लगभग 20 किलोमीटर दूर इटहना गांव में हर अमावस्या को मेला लगता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान हर दिन यहां 10,000 से अधिक लोग बिहार के कोने-कोने से आते हैं. यहां आने पर लोगों के विचित्र व्यवहार देखने को मिलते हैं, और सैकड़ों की संख्या में लोग नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा पाने के लिए आते हैं. कहा जाता है कि सदियों से यहां भूतों का मेला लगता आ रहा है. इस मेले में गया, सीतामढ़ी, नवादा, रोहतास समेत बिहार के विभिन्न जिलों से लोग आते हैं. कई लोग महीने भर यहां रहकर पूजा-पाठ भी करते हैं.
ब्रह्म बाबा की जाती है पूजा-पटना से आई किरण देवी ने लोकल 18 को बताया कि ब्रह्म बाबा के पास विशाल बरगद का पेड़ है, जहां महिलाएं-पुरुष जोर-जोर से चिल्लाते, झूमते और रोते हैं. कहा जाता है कि इस मेले का उद्देश्य लोगों को भूत-प्रेत की छाया से मुक्ति दिलाना है. पीड़ितों को यहां परिक्रमा कराई जाती है, और यह मेला हर अमावस्या को लगता है. कुछ लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन यहां की मान्यता के अनुसार, इटहना के बाबा ने इसी स्थान पर समाधि ली थी, और उनकी शक्ति से भूत-प्रेत की परेशानियों से मुक्ति मिलती है.
भूतों के मेले का दृश्य-लोकल 18 की टीम जब ब्रह्म बाबा स्थान पर पहुंची, तो देखा कि कई महिलाएं जोर-जोर से सिर हिला रही थी, जिन्हें घेरकर कुछ लोग बैठे थे. वैशाली से आई सोमारी देवी ने बताया कि यह महिलाएं प्रेत बाधा से पीड़ित हैं. वहीं शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को पीने और ब्रह्म बाबा की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. इटहना गांव में सदियों से इस मेले का आयोजन होता आ रहा है, और लोग यहां महीनों तक रहकर पूजा करते हैं, जिससे उन्हें राहत मिलती है.



