पैराग्वे के पूर्व राष्ट्रपति गिरफ्तार होंगे: बैंक डूबने के बाद कटघरे में पेना, सीनेट में भी हटाने के लिए मतदान

पराग्वे में यूनो बैंक घोटाले के कारण राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को संसद ने सर्वसम्मति से पद से हटा दिया। उन पर सरकारी धन बैंक में जमा कराने और बैंक को अनुचित फायदा पहुंचाने के आरोप हैं। बैंक के मालिक समेत 27 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है और छह निदेशक हिरासत में हैं।
पराग्वे में बड़े बैंक घोटाले ने राष्ट्रपति सैंटियागो पेना की कुर्सी छीन ली। सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल और बैंक को बचाने के लिए राजनीतिक दबाव बनाने के आरोपों के बीच संसद ने शुक्रवार को उन्हें पद से हटा दिया। इतना ही नहीं, अब पेना के खिलाफ गिरफ्तारी और जेल जाने का खतरा भी बढ़ गया है। मामले की जांच कर रही एजेंसियों ने राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कई सरकारी अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया है। विपक्षी सांसदों ने तो यहां तक मांग कर दी कि पेना को घर जाने के बजाय अधिकतम सुरक्षा वाली जेल में भेजा जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति संभालेंगे राष्ट्रपति की जिम्मेदारी
संसद में मौजूद सभी 44 सांसदों ने पेना को पद से हटाने के पक्ष में वोट दिया। इसके बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना के उनके उत्तराधिकारी बनने का रास्ता साफ हो गया। पेना ने गुरुवार को खुद इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन संसद ने इसे स्वीकार नहीं किया। विपक्ष का कहना था कि अगर वह इस्तीफा देकर जाते हैं तो पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर उन्हें मिलने वाली संसदीय सुरक्षा का फायदा मिल सकता है। इसलिए उन्हें महाभियोग के जरिए हटाना जरूरी था।
विपक्ष बोला- राष्ट्रपति को जेल भेजा जाए
पेना के खिलाफ विपक्ष का गुस्सा खुलकर सामने आया। विपक्षी सांसद योलांडा पेरेडेस ने कहा कि राष्ट्रपति को सिर्फ पद से हटाना काफी नहीं है। उन्हें अधिकतम सुरक्षा वाली जेल में भेजा जाना चाहिए। दरअसल, आरोप है कि पेना ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करके सरकारी धन को यूनो बैंक में जमा कराया और बैंक के बड़े कर्जों में गड़बड़ियों को नजरअंदाज किया। पेना ने इन आरोपों को खारिज किया है। हालांकि, जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी हैं।
27 लोगों पर मुकदमा, बैंक मालिक की संपत्ति जब्त
यूनो बैंक के पतन के बाद कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सरकारी अभियोजकों ने बैंक के नियंत्रक शेयरधारक मिगुएल वाजक्वेज समेत 27 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इन पर भरोसे का उल्लंघन और धोखाधड़ी की कोशिश जैसे आरोप हैं। बैंक के छह निदेशकों को सुनवाई से पहले हिरासत में रखा गया है। अधिकारियों ने बैंक मालिक से जुड़ी नौ लग्जरी कारें, एक यॉट और छोटे विमान भी जब्त किए हैं। इसके अलावा बैंक के अधिकारियों के घरों पर छापेमारी की गई है।
सरकारी पेंशन का पैसा भी बैंक में फंसने का आरोप
जांच में सबसे गंभीर सवाल सरकारी पैसों को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि पेना ने यूनो बैंक की होल्डिंग कंपनी में अपनी हिस्सेदारी रखी थी और बाद में दबाव बढ़ने पर उसे बेच दिया। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने केंद्रीय बैंक के प्रमुख पद पर ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया, जो पहले यूनो बैंक से जुड़ा था। इसके अलावा सरकारी पेंशन फंड के 35.5 करोड़ डॉलर बैंक में जमा कराने का आरोप भी है। कहा जा रहा है कि यह रकम तय कानूनी सीमा से ज्यादा थी।
लाखों ग्राहकों की जमा पूंजी फंसी
मंगलवार तड़के नियामक एजेंसियों ने यूनो बैंक पर कब्जा कर लिया। इसके बाद करीब 30 लाख ग्राहकों के खाते और जमा रकम तक पहुंच रुक गई। लोग न तो पैसे निकाल पा रहे थे और न ही कार्ड से खरीदारी कर पा रहे थे। बैंक ने कुछ ही वर्षों में तेजी से विस्तार किया था और देश के पांच बड़े बैंकों में शामिल हो गया था। ग्राहकों को राहत देने के लिए गुरुवार से 1 करोड़ गुआरानी (करीब 1,600 डॉलर) तक जमा करने वालों का पैसा लौटाना शुरू किया गया। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, करीब 37 हजार डॉलर तक की जमा बीमित है।
सड़कों पर उतरे लोग, सोमवार से हड़ताल की तैयारी
बैंक में जमा रकम फंसने के बाद लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है। हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया और पुलिस के साथ उनकी झड़पें भी हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए रबर की गोलियां और पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया। अब देश के सबसे बड़े शिक्षक संगठन ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की तैयारी की है। संगठन सरकारी पेंशन फंड की सुरक्षा और घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।



