5,500 करोड़ रुपए जुटाने के बावजूद स्पाइसजैट पतन के कगार पर!

पिछले कुछ हफ्तों में, स्पाइसजैट रद्द उड़ानों, अत्यधिक देरी और ग्राहकों की बढ़ती असंतुष्टि से जूझ रही है। इससे विमानन उद्योग की इस साल की सबसे बड़ी आशंका की पुष्टि होती है-स्पाइसजैट का पतन।सितम्बर-अक्तूबर में, दैनिक निर्धारित उड़ानें घटकर 5 से भी कम रह गर्ईं, जो कैश-एंड-कैरी आधार पर संचालित हो रही थीं। यह तब हुआ जब पिछले 2 वर्षों में से अधिकांश समय तक अध्यक्ष-प्रबंध निदेशक अजय सिंह यह दावा करते रहे कि एयरलाइन 100 विमानों का बेड़ा बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनके दावों के विपरीत, अक्तूबर के अंत में एयरलाइन के एयर ऑप्रेटर सॢटफिकेट (ए.ओ.सी.) में 20 से अधिक पंजीकृत विमानों का बेड़ा दिखाया गया, हालांकि इनमें से केवल 11 ही परिचालन में थे।
22 सितम्बर को, एयरलाइन को, काफी देर से ही सही, डी.जी.सी.ए. द्वारा वित्तीय जांच के दायरे में लाया गया, जिसने नकदी की तंगी और इंजीनियरिंग कर्मचारियों की कमी से उत्पन्न बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच एयरलाइन के बढ़ते संकट को नजरअंदाज कर दिया। इस बीच, नियमों और मानदंडों का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं, जिनमें अग्रिम इन्वैंट्री बेचना और अंतिम समय में रद्द हुई उड़ानों के लिए अग्रिम भुगतान लेना, रूट डिस्पर्शन दिशा-निर्देशों का पालन न करना और सूचीबद्ध कंपनी के लिए सेबी की आवश्यकताओं के अनुसार नवीनतम परिणाम प्रकाशित करने में विफल रहना शामिल है।नागरिक उड्डयन मंत्रालय, एक और एयरलाइन के दिवालिया होने और बंद होने के व्यापक परिणामों से चिंतित होकर, कथित तौर पर सुरक्षा की कीमत पर भी एयरलाइन को स्थायी मोहलत दे रहा था। घटनाक्रम ने विमानन क्षेत्र को उन सवालों के जवाब तलाशने पर मजबूर कर दिया है, जो केवल अधिकारी ही दे सकते हैं।
नवीनतम आंकड़े उपलब्ध नहीं थे क्योंकि स्पाइसजैट अब सेबी की आवश्यकताओं के अनुसार अपने परिणाम दाखिल नहीं कर रही थी लेकिन कुल संचित घाटा कथित तौर पर 9,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, जिसमें बकाया 6,000 करोड़ रुपए से अधिक है। टी.डी.एस., ई.पी.एफ. और जी.एस.टी. की देनदारियों सहित लगभग 600-650 करोड़ रुपए का वैधानिक बकाया होने का अनुमान है। सितम्बर 2025 को समाप्त तिमाही के लिए वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के वित्तीय खुलासे के बाद, एयरलाइन ने 2,800 करोड़ रुपए की नकारात्मक शुद्ध संपत्ति की सूचना दी। तो, पिछले कुछ वर्षों में एयरलाइन द्वारा जुटाए गए लगभग 5,500 करोड़ रुपयों का क्या हुआ? समय-समय पर नई पूंजी निवेश की गई, जो सब गायब हो गई प्रतीत होती है। 2023 में, स्पाइसजैट ने कार्लाइल एविएशन पार्टनर्स को देय 100 मिलियन डॉलर से अधिक के बकाया का पुनर्गठन किया, जिसमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा पट्टेदार के लिए 7.5 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी में परिवर्तित हो गया।
जनवरी 2024 में, एयरलाइन ने 2,250 करोड़ रुपए से अधिक जुटाने की एक बड़ी योजना के तहत 744 करोड़ रुपए जुटाए। इसने महामारी के दौरान और उसके बाद आपातकालीन क्रैडिट लाइन गारंटी योजना (ई.सी.एल. जी.एस.) का भी लाभ उठाया और 2022 के अंत में संशोधित योजना के तहत लगभग 1,000 करोड़ रुपए प्राप्त किए, ताकि इसके अस्तित्व को लेकर चिंताओं का समाधान किया जा सके। फिर, सितम्बर 2024 में, कंपनी ने एक क्यू.आई.पी. (क्विक-इन-प्राइवेट इन्वैस्टमैंट) के माध्यम से 3,000 करोड़ रुपए जुटाने में कामयाबी हासिल की।
पिछले कुछ वर्षों में 5,500 करोड़ रुपए से अधिक जुटाने के बावजूद, कंपनी स्पष्ट रूप से शून्य नकदी भंडार और दिवालियापन के कगार पर थी। खबरों के मुताबिक, एयरलाइन ने अदालतों को यह भी बताया था कि वह अपने पूर्व नियंत्रक हिस्सेदार और सन ग्रुप के चेयरमैन कलानिधि मारन और उनकी निवेश कंपनी के.ए.एल. एयरवेज को बकाया चुकाने के लिए ई.सी.एल.जी.एस. से और फंड मिलने का इंतजार कर रही है। इसका सीधा मतलब है कि वह भारत सरकार से अपने बिल चुकाने की गुहार लगा रही है! इसके अलावा, पहले की तरह ही, एयरलाइन के प्रबंधन पर मनी लॉन्ड्रिंग और फंड के गबन के आरोप लगते रहे। उद्योग जगत के सूत्रों का मानना था कि ई.डी. और अन्य जांच एजैंसियों को हस्तक्षेप करके हाल के वर्षों में कारोबार को पुनर्जीवित करने के लिए जुटाए गए फंड के इस्तेमाल की बारीकी से जांच करनी चाहिए।
हैरानी की बात यह है कि अजय सिंह एयरलाइन को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं उन्होंने स्काईहॉप नाम से एक पारिवारिक स्वामित्व वाली कंपनी शुरू की है, जो सीप्लेन सेवाएं शुरू करने वाली है। इसे 16 सितम्बर को लक्षद्वीप में लॉन्च किया जाना था लेकिन केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा मंजूरी वापस लेने के कुछ ही दिन बाद लॉन्च रोक दिया गया।
इस उद्यम की शुरुआती पूंजी इसके प्रमोटरों ने तब लगाई थी, जब उनका मुख्य व्यवसाय दिवालिया हो रहा था। इस नए उद्यम के लिए धन कहां से आ रहा है, इस पर सवाल उठ रहे हैं। भारत में दिवालिया होने वाली लगभग हर एयरलाइन की तरह, इस मामले में भी प्रमोटरों और संस्थापकों की व्यक्तिगत संपत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है, जबकि उनके व्यवसाय दिवालिया हो गए। इस तरह की अनदेखी भारत के नागरिक उड्डयन उद्योग के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है।-अंजुली भार्गव



