मध्यप्रदेश

‘मेरे दफ्तर में भी एक संघी अधिकारी काम करते’, पत्नी के साथ धर्मध्वज लेकर 930 किमी पैदल चलेंगे दिग्विजय सिंह

भोपाल: मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह सनातन स्वाभिमान यात्रा निकालने जा रहे हैं। इस यात्रा में उनकी पत्नी अमृता सिंह भी साथ रहेंगी। दशहरा के दिन उज्जैन से यात्रा की शुरुआत होगी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि मेरे दफ्तर में भी एक संघी अधिकारी काम करते हैं, वो हमसे धर्म के बारे में बहुत आगे हैं।

930 किमी की है पदयात्रा

दरअसल, 20 अक्टूबर से दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी अमृता सिंह उज्जैन से अयोध्या के बीच पदयात्रा की शुरुआत करेंगी। इसका नाम सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा दिया गया है। करीब 930 किमी का सफर दोनों पैदल पूरा करेंगे। यात्रा के दौरान तिरंगा और पांच रंगों वाले धर्मध्वज को थाम कर दोनों चलेंगे।

उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या में खत्म होगी यात्रा

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से यह यात्रा शुरू होगी और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में समाप्त होगी। उन्होंने कहा है कि यह एक गैरराजनीतिक यात्रा है।

इन जगहों से गुजरेगी यात्रा

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा उज्जैन से शुरू होकर शाजापुर, सारंगपुर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी और ओरछा से होकर गुजरेगी। इसके बाद यह उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। यह यात्रा उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर को जोड़ने का काम करेगी।

धर्मध्वज उन मूल्यों का प्रतीक होगा जिन्हें वह सनातन धर्म से जोड़ते हैं, जबकि तिरंगा देश की एकता का प्रतीक होगा।

दिग्विजय सिंह, पूर्व सीएम

सनातन धर्म के मूल्य को समझाया

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। सनातन धर्म का मूल सत्य, न्याय, सदाचार, करुणा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने में निहित है। यह यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी और किसी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के विरोध में नहीं होगी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म के मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना और श्रद्धालुओं की आस्था तथा धार्मिक दान की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाना है। यात्रा के दौरान प्रमुख हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए जाएंगे।

मेरे दफ्तर में एक संघी अधिकारी काम करते

दिग्विजय सिंह ने कहा कि मेरे दफ्तर में भी एक संघी अधिकारी काम करते हैं। वो हमसे धर्म के बारे में बहुत आगे हैं। उनका इशारा अपने ओएसडी रहे ओपी शर्मा के बारे में थे। नर्मदा परिक्रमा के दौरान भी वह दिग्विजय सिंह के साथ रहे थे।

इन मुद्दों को उठाएंगे दिग्विजय सिंह

उज्जैन में वह महाकाल लोक परियोजना से जुड़े मुद्दों, मूर्तियों की गुणवत्ता तथा भूमि से संबंधित कथित अनियमितताओं का विषय उठाएंगे। ओरछा में मंदिर के खातों, संपत्तियों, आभूषणों और दान राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाए जाएंगे। वहीं, अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े दान, चढ़ावे, भूमि लेनदेन और खर्च में पारदर्शिता की मांग की जाएगी।

मंदिर के कार्यों में ही हो इस्तेमाल

दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम के नाम पर मिला दान केवल राम के कार्यों में और महाकाल के नाम पर मिला धन केवल महाकाल के कार्यों में इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु की आस्था और उसके दान, दोनों की सुरक्षा होनी चाहिए और यही ‘सनातन स्वाभिमान’ है।

दिग्विजय सिंह ने ‘चंदा चोरी’ और ‘वोट चोरी’ के मुद्दों पर एक डिजिटल याचिका और मिस्ड कॉल अभियान शुरू करने की भी घोषणा की। साथ ही उन्होंने कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और चुनावी सुधारों की मांग करने की बात कही।

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