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Aaj Ka Panchang: 47 मिनट का रहेगा अभिजीत मुहूर्त, आज इस दिशा में यात्रा करना माना गया है अशुभ

हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. 6 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रात 12:34 बजे तक रहेगी. इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी. मंगलवार सुबह 6:24 बजे सूर्योदय और शाम 6:06 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, रात 1:58 चंद्रोदय और दोपहर 3:25 बजे चंद्रास्त होगा.

मंगलवार को सुबह 7:19 बजे तक रहेगा सिद्ध योग

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेगा. ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश करने से सभी 12 राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है. हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा का सूर्य से मित्रता का संबंध माना गया है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हस्त नक्षत्र 13वां नक्षत्र है, जिसका अर्थ ‘हाथ’ होता है. इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है. मंगलवार को सुबह 7:19 बजे तक सिद्ध योग रहेगा. वैदिक पंचांग के 27 नित्य योगों में से सिद्ध योग को एक अत्यंत शुभ योग मााना गया है. सिद्ध योग में गुरु-शिष्य संबंध सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. निस्वार्थ भाव से सेवा करने से मन में प्रेम और अनासक्ति बढ़ती है.

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है. आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है. माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं. जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है.

कब से कब तक रहेगा अमृतकाल

मंगलवार को रात 8:44 से 10:16 बजे तक अमृतकाल रहेगा. ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है. इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है. नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण याात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है.

राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच बांटा गया

इस दिन राहुकाल दोपहर 3:10 बजे से शाम 4:38 बजे तक रहेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है. स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है. इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करनाा चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है.

आज कितने बजे तक रहेगा गुलिक काल

मंगलवार को गुलिक काल दोपहर 12:15 से 1:42 बजे तक रहेगा. गुलिक काल को ‘विषैला समय’ भी कहा जाता है. यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है. माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं. इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है. जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है. बैंक में पैसे जमा करना, दान देनाा या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है.

यमगंड काल में यात्रा पर निकलने से बचना चाहिए

इस दिन यमगंड काल सुबह 9:19 से 10:47 बजे तक रहेगा. यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है. इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु, या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है. इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है. नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए. इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए.

आज कन्या राशि में स्थित रहेंगे सूर्य

मंगलवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है. इस दिन चंद्रमा रात 10:17 बजे तक कर्क राशि में रहेगा. ज्योतिष शास्त्र में कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा ही है, इसलिए चंद्रमा अपनी ही राशि (कर्क) में होना बहुत खास और शक्तिशाली स्थिति मानी जाती है. चंद्रमा मन का कारक है और कर्क राशि जल तत्व की सौ प्रतिशत राशि है. इस युति से व्यक्ति की भावनाएं, संवेदनशीलता और कल्पना शक्ति बहुत बढ़ जाती हैं. मंगलवार को दिशाशूल उत्तर दिशा तथा ईशान (उत्तर-पूर्व) कोण में रहेगा. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करनाा या निकलना अशुभ माना जाता है.

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