म्यांमार की लड़कियों को भारत लाकर जम्मू-कश्मीर में करवाई जा रही शादी! बांग्लादेश से डंकी रूट के जरिए हो रही एंट्री, हैदराबाद से है सप्लाई

ग्वालियर: डंकी रूट के जरिए म्यांमार की लड़कियों की तस्करी हो रही है। इन्हें भारत में घुसने के बाद जम्मू-कश्मीर पहुंचाया जा रहा है, जहां इनकी शादी होती है। मध्य प्रदेश की जीआरपी ने चार रोहिंग्या लड़कियों को बरामद किया है, इनमें दो नाबालिग हैं। इन्हें बांग्लादेश स्थित रिफ्यूजी कैंपों से भारत में प्रवेश करवाया जा रहा है।
ग्वालियर से मिला था सुराग
दरअसल, एक अक्टूबर को ग्वालियर में म्यांमार के दो नागरिकों की गिरफ्तारी हुई थी। इनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को डंकी रूट के बारे में जानकारी मिली, जिसमें जंगल के रास्ते, पहाड़ों को पार करना और केले के तनों से बनी कामचलाई नाव से नदी पार करना शामिल है।
बांग्लादेश के रिफ्यूजी कैंप में रह रही थीं लड़कियां
मूल रूप से म्यांमार की रहने वाली ये लड़कियां, बांग्लादेश स्थित रिफ्यूजी कैंप में रहती थीं। यूपी के अलीगढ़ में इनके होने की जानकारी मिली थी। पकड़े गए दो लोगों ने पुलिस को बताया कि श्रीनगर में एक व्यक्ति तक इन लड़कियों को पहुंचाने के लिए प्रति लड़की 15,000 रुपए दिए गए थे।
मोहम्मद अली ने कराया भारत में प्रवेश
मिली जानकारी के अनुसार 38 वर्षीय मोहम्मद अली इन लड़कियों को बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित कुतुपालोंग रिफ्यूजी कैंप से डंकी रूट के जरिए भारत लाया था। अली ने केले के तनों को बांधकर एक नाव बनाई, लड़कियों को उस पर बिठाया और खुद तैरकर नदी पार की।
सिलहट के पास से गुजरता है रास्ता
यह कथित रास्ता बांग्लादेश में सिलहट के पास जंगल के रास्तों और पहाड़ों से होकर गुजरता था। जांच में बांग्लादेश के जिन्हा नगर से होकर जाने वाले एक रास्ते का भी जिक्र है, जहां अली ने इंडिया बॉर्डर तक पहुंचने से पहले एक नदी पार की थी।
हैदराबाद में अली का ठिकाना
जांच में यह बात निकलकर आई है कि अली का ठिकाना हैदराबाद के गाजीबांदा मिश्रीगंज चारमीनर रिफ्यूजी कैंप था। वह मूल रूप से बांग्लादेश का रहने वाला है। वह लड़कियों को रिफ्यूजी कैंप से लाकर भारत में मुस्लिम पुरुषों से शादी करवाता था। वह लड़कियों को आगे पहुंचाने के लिए हैदराबाद में बिचौलियों को सौंप देता था।
पहले हैदराबाद लाया गया
अलीगढ़ ले जाने से पहले लड़कियों को कथित तौर पर हैदराबाद से होकर ले जाया गया था। पूछताछ के दौरान मोहम्मद हसन और मुबीन ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्हें श्रीनगर में एक व्यक्ति तक लड़कियों को पहुंचाने के लिए प्रति लड़की 15000 रुपए दिए गए है। दोनों आरोपी म्यांमार के रहने वाले हैं। साथ ही हैदराबाद के बालापुर रॉयल कॉलोनी में रह रहे थे।
अली ने लड़कियों को सौंपा
अली ने हैदराबाद में लड़कियों को हसन और मुबीन को सौंप दिया था। आदिल वाहिनी नाम के एक व्यक्ति इन लड़कियों को जम्मू से आगे ले जाने के लिए गाड़ी की व्यस्था की थी। वह कश्मीर का रहने वाला है। इसके बाद श्रीनगर में इनकी शादी होती।
माता-पिता की सहमति से बार्डर पार करके आए थे। इन्हें स्वर्णजयंती एक्सप्रेस से पकड़ा गया है। भोपाल जीआरपी के कंट्रोल रूम में इनके बारे में जानकारी मिली थी।
ग्वालियर, जीआरपी
जनरल कोच में थे सवार
वहीं, जीआरपी ग्वालियर स्टेशन की इंचार्ज दीपशिखा सिंह तोमर अपनी टीम के साथ ट्रेन के जनरल कोच में पहुंचीं और मुबीन से पूछताछ की। उसने बताया कि वह म्यांमार का रहने वाला है। हैदराबाद के बालापुर इलाके की रॉयल कॉलोनी में रहता है। वह करीब चार साल से अपनी पत्नी और बच्चे के साथ हैदराबाद में रह रहा था।
अलीगढ़ में रखा गया पहले
मुबीन ने बताया कि लड़कियों को उनकी तय जगहों पर ले जाने से पहले अलीगढ़ ले जाया गया था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने अलीगढ़ में हसन और चारों लड़कियों का पता लगाया। पुलिस ने बताया कि लड़कियां न तो हिंदी समझ सकती थीं और न ही बोल सकती थीं। जांचकर्ताओं ने शुरू में उनसे बातचीत करने के लिए गूगल ट्रांसलेट का इस्तेमाल किया। बाद में दो भाषाओं को जानने वाले अनुवाद की मदद से विस्तार से पूछताछ शुरू की।
नेटवर्क की जांच हो रही
जांचकर्ताओं को मिली जानकारी के अनुसार उसी रिफ्यूजी कैंप से दो लड़कियों को पहले भारत लाया गया हो सकता है। पुलिस इसकी जांच कर रही है कि क्या इसमें वही बिचौलिए शामिल थे और क्या यह कथित आवाजाही किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।
गौरतलब है कि जीआरपी ने एनआईए को पत्र लिखकर इस मामले में आगे की जांच करने को कहा है क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार करने और कई राज्यों से होकर लड़कियों को ले जाने का मामला शामिल है। पुलिस ने बताया कि हसन और मुबीन के पास यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज द्वारा जारी किए गए शरणार्थी पहचान पत्र थे।



