‘ऑनलाइन गेम्स का बढ़ता खतरा’ ब्राजील से सीखे भारत!

मोबाइल गेमिंग के अत्यधिक उपयोग से दुनिया भर में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य तथा सामाजिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं, जिनके दृष्टिïगत वेनेजुएला, ब्राजील, जापान, सिंगापुर, सऊदी अरब, जर्मनी, ब्रिटेन, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और पाकिस्तान आदि दुनिया के 15 से अधिक देशों में ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगा दी गई है।
अब जबकि अगले महीने ब्राजील में चुनाव होने जा रहे हैं, चौथी बार देश का राष्टï्रपति बनने के लिए प्रयत्नशील ‘लूला डी सिल्वा’ ने देश में ऑनलाइन गेमिंग गैम्बलिंग के बढ़ते वित्तीय व सामाजिक जोखिमों पर काबू पाने के लिए ऑनलाइन गैम्बलिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है। लूला ने इस मौके पर देश के ‘जुआ’ उद्योग को एक ‘कैंसर’ करार देते हुए कहा ‘‘यदि हम इस ‘ट्यूमर’(गांठ) को नहीं निकालेंगे तो यह हमें मार डालेगा।’’ इसके अनुसार ‘हर तरह के सट्टेबाजी प्लेटफार्मों के उपयोग, स्पोर्ट्स बैटिंग तथा ऑन लाइन कैसीनोज’ पर रोक लगाने के साथ ही ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए क्रिप्टो करंसी व अन्य वर्चुअल एसेट्स के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
ऑनलाइन गेम्स के विज्ञापनों में लत के जोखिम और वित्तीय नुकसान की चेतावनी देना अनिवार्य कर दिया गया है। आसान पैसा कमाने के दावों और विशेषज्ञ कमैंटेटरों द्वारा सट्टेबाजी के लिए उकसाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही देश की दूरसंचार एजैंसी ‘एनातले’ के सहयोग से अवैध सट्टेबाजी वैबसाइटों को लगातार ब्लॉक किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जुएबाजी और सट्टïेबाजी से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए कड़े दंड के प्रावधान विधेयक पर भी हस्ताक्षर किए। जहां तक भारत का सम्बन्ध है, मार्च 2019 में गुजरात में अत्यधिक लत लगाने और हिंसक होने के कारण ‘पबजी मोबाइल’ पर बैन लगा दिया गया था। फिर 29 जून, 2020 को प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं के कारण भारत ने मोबाइल लेजैंंड्स, बैंग-बैंग, टिकटॉक, यू.सी. ब्राऊजर तथा जैंडर जैसी 100 से अधिक चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया। पबजी मोबाइल तथा बैंग-बैंग भारत में सर्वाधिक कमाई करने वाले मोबाइल गेम्स थे। भारत सरकार का मानना था कि ये ऐप्स बिना अनुमति के यूजर का डाटा चुरा कर चुपके से भारत के बाहर स्थित सर्वर पर भेज रहे थे। चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कोरिया, जॉर्डन, नेपाल, इसराईल और इराक में भी पबजी मोबाइल प्रतिबंधित है।
‘पबजी मोबाइल’ पर बैन के जवाब में दक्षिण कोरिया ने बैटल ग्राऊंड्स मोबाइल इंडिया बनाया, जो ओरिजिनल पबजी मोबाइल गेम से थोड़ा अलग है। ‘बैटल ग्राऊंड्स मोबाइल इंडिया’ में 18 वर्ष से कम उम्र के खिलाड़ी माता-पिता की अनुमति के बिना दिन में 3 घंटे से अधिक गेम नहीं खेल सकते। नाबालिगों को गेम के स्टोर पर एक दिन में 7000 रुपए से अधिक खर्च करने की भी अनुमति नहीं है। भारत के कई राज्यों की सरकारों ने ऐसी ऑनलाइन गेम्स पर रोक लगा दी है, जिनमें पैसे का दांव लगाया जाता है। गेमिंग से चढ़े कर्ज के कारण गेमर्स की आत्महत्याएं के मामले बढ़ जाने से 2020 में आंध्र प्रदेश में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े नियम बनाए गए।
फिर 2021 में, तमिलनाडु सरकार ने चैस, ट्रिविया, फैंटेसी, रम्मी और पोकर जैसे स्किल-बेस्ड गेम्स के ऑनलाइन वर्शन पर रोक लगाने की घोषणा की। कर्नाटक में भी 2021 में ऑनलाइन सट्टेबाजी वाली गेम्स पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। फिर 21 अगस्त, 2025 को भारत सरकार ने सभी फैंटेसी स्पोर्ट्स गेम्स और ‘असली पैसे’ वाले अन्य ऑनलाइन गेम्स पर रोक लगा दी, क्योंकि इन्हें ऑनलाइन जुआ माना गया। ऑनलाइन गेम्स के कारण बच्चों की विचारधारा कुछ ऐसी हो जाती है कि वे अपनी मनचाही वस्तु न मिलने पर हतोत्साहित हो जाते हैं तथा असामान्य व्यवहार करने लगते हैं और मरने-मारने पर आमादा हो जाते हैं। ‘कंडक्ट डिसआर्डर’ वाले बच्चों के लिए यह असहनीय होता है, जिसका परिणाम दुखद ही निकलता है। कुछ समय पूर्व ‘लखनऊ’ में एक 16 वर्षीय लड़के ने मात्र इसलिए अपनी मां की हत्या कर दी थी क्योंकि उसने उसे पबजी खेलने से रोक दिया था। अत: भारत में कड़े कानून द्वारा इस प्रकार की ऑनलाइन गेम्स पर जितनी जल्दी रोक लगाई जाएगी, उतना ही अच्छा होगा।



