राजनीति

विरोधी भी नरेंद्र मोदी से बहुत कुछ सीख सकते हैं

इस समय भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य और केन्द्र के लगातार 25 वर्ष सत्ता शीर्ष पर रहने के अवसर पर उनके जन्मदिवस 17 सितम्बर से 17 अक्तूबर तक देश भर में मुख्य 13 बड़े कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसका मूल स्वर है, सेवा संकल्प अभियान। अगर इन कार्यक्रमों पर आप सरसरी दृष्टि भी डालें तो साफ दिख जाएगा कि भाजपा समाज के हर वर्ग तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही है। 17 अक्तूबर को समापन के अवसर पर पंचायत से लेकर संसद तक के जनप्रतिनिधियों का एक विशाल सम्मेलन आयोजित होगा, जिसे स्वयं प्रधानमंत्री मोदी संबोधित करेंगे। उन्होंने अपने जन्म स्थान बडऩगर से वाराणसी और वाराणसी से बडऩगर जाने वाली यात्रा में शामिल कार्यकत्र्ताओं को वीडियो कॉन्फ्रैंसिंग से संबोधित किया, कहा कि राजनीति केवल चुनाव नहीं है। सभी कार्यकत्र्ताओं को सामाजिक कार्य और समाज सुधार में भी लगना चाहिए। 

यहीं पर नरेंद्र मोदी दूसरी पार्टियों के नेताओं से अलग दिखते हैं। यह अवसर विपक्ष सहित सबके लिए एक साथ कई बातों पर विचार करने का है। आज वह प्रधानमंत्री हैं, इसलिए सामान्य लग सकता है लेकिन उनके सामने लगभग 1 दशक से ज्यादा ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न की गईं, जिनमें लगता था कि वे मुख्यमंत्री भी रह पाएंगे या नहीं। इसलिए समय इस बात के निष्पक्ष विश्लेषण का भी है कि सारी विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए मोदी ने 25 वर्षों तक मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक रहने का चमत्कार कैसे किया? साथ ही यह भी कि उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत में किस तरह के परिवर्तन आए? 2002 के गुजरात दंगों के बाद उनके विरुद्ध भारत से लेकर विश्व की मीडिया सहित न्यायालयों, मानवाधिकार संगठनों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और न जाने कहां-कहां हर स्तर पर अभियान चला। गुजरात दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल ने उनसे 2 दिनों तक 9 घंटे से ज्यादा पूछताछ की। सांसदों के बहुत बड़े वर्ग ने हस्ताक्षर करके अमरीका को लिखा कि नरेंद्र मोदी को वीजा न दिया जाए। 2002 के गुजरात दंगों को लेकर चलाए प्रचंड अभियान का असर इतना था कि कुछ अन्य देशों के सांसदों तक ने उनके विरुद्ध समूह बनाकर अपने देशों में आवाज उठाई। 

2004 से 2014 तक केंद्र में मोदी की घोर विरोधी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यू.पी.ए. का शासन था, जिसका एक बड़ा फोकस किसी तरह मोदी, संघ परिवार और भाजपा को दंगे का दोषी ठहराना था। देश-विदेश दोनों स्तरों पर एक साथ विरोध और राजनीतिक जीवन समाप्त करने के सारे प्रयासों का सामना करते हुए 25 वर्षों तक शासन शीर्ष पर रहना इतिहास की असाधारण घटना है। उच्चतम न्यायालय ने 24 जून, 2022 को नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों के सारे आरोपों से बरी करने का अंतिम फैसला दिया, प्रधानमंत्री बनने के 8 वर्ष बाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी के विरुद्ध प्रतिशोध की भावना से काम नहीं किया, अन्यथा न्यायालय ने कहा था कि मामले को गर्म बनाए रखने के लिए याचिकाकत्र्तेाओं ने कानून का दुरुपयोग किया, याचिका में गलत दावे किए गए। न्यायालय ने मामले को सनसनीखेज बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई की अनुशंसा की। 2013 में जब उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अभियान शुरू किया, निजी चरित्र पर भी गंदे आरोप लगाए गए। वस्तुत: मोदी ने इन सबको भुलाकर सकारात्मक राजनीति तथा भारत के अपने सपने को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित रखा है।   

मोदी ने राजनीति और लोकतंत्र में नए सिरे से लोगों की रुचि पैदा की। उनकी सभाओं में अपार जन समूह उमडऩे लगा जो अतुलनीय था। विरोधियों ने उसका भी मजाक उड़ाया और उसे दिखावा, झूठा आदि साबित करने का प्रयास किया। जिस पार्टी को हिंदी पट्टी और कुछ जातियों का करार देकर आलोचक लंबे-लंबे लेख लिखते थे या विचार प्रकट करते थे वह संपूर्ण देश की पार्टी बन गई। मोदी के कारण यह मिथ भी ध्वस्त हुआ कि देश में बगैर मुस्लिम वोट के किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिल सकता। 

शासन के स्तर पर मोदी ने लोगों के अंदर विकास की अपेक्षाएं पैदा कीं, नई-नई योजनाएं दीं, जमीन पर उतारने के लिए मौलिक रूप से अलग तरीके से भी काम किया। साथ ही धर्म, सभ्यता-संस्कृति के मूल स्वर को भी नीतियों में मुखर होकर लागू किया और करवाया। कभी मुस्लिम समुदाय के समाज सुधार की दृष्टि से एक साथ 3 तलाक के विरुद्ध कानून बन सकता है एवं वक्फ कानून को संशोधित कर न्यायपूर्ण बनाया जा सकता है, इसकी तो कल्पना ही नहीं की जा सकती थी। कौन सोचता था कि धारा 370 को कोई सरकार समाप्त करके जम्मू-कश्मीर को भारत के मुख्य राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के समान धरातल पर ला देगी? सरकारें पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी से सहमकर सीमा पर आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करती थीं।

मोदी ने इस मिथक को भी ध्वस्त कर 3-3 बार सीमा में घुसकर कार्रवाई की, जो संपूर्ण दुनिया को हैरत में डालने वाला था। विदेश नीति में भारत निर्गुट से निकलकर सर्वगुट या अनअलाइन्ड से निकलकर ऑल अलाइंड देश बना। वह रूस के साथ है तो यूक्रेन का भी विरोधी नहीं। उसने ब्रिक्स में ईरान को बुलाया लेकिन इसराईल और अमरीका से लेकर सऊदी अरब तक से हमारे संबंध हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी का भारत की दृष्टि से सबसे बड़ा योगदान भारतवंशियों के अंदर अपनी सभ्यता, संस्कृति और भारत को लेकर आत्मविश्वास पैदा करना और जिस देश में हैं उनके प्रति निष्ठा रखते हुए भी भारत से लगाव पैदा करने का है जिसके परिणाम आने शुरू हो गए हैं। विरोधी भले जो कहेें लेकिन मोदी भारत के इतिहास में ऐसे प्रधानमंत्री या राजनेता बन चुके हैं, जिनका असर देश-विदेश दोनों स्तरों पर लंबे समय तक कायम रहेगा। विरोधियों के लिए भी थोड़ा ठहरकर विचारने और मोदी से बहुत कुछ सीखने का अवसर है।-अवधेश कुमार 

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