‘बसों में बढ़ती आग की घटनाएं’ बन रहीं यात्रियों के लिए जानलेवा!

अब तक तो रेलगाडिय़ों में ही आग लगने की घटनाएं सुनने में आती थीं, परन्तु पिछले कुछ समय से यात्री बसों में आग लगने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं जिससे यात्रियों के प्राण जोखिम में पड़ रहे हैं। पिछले लगभग 2 महीनों में सामने आईं चलती बसों में आग लगने की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 13 अगस्त को ‘गुरुग्राम’ (हरियाणा) में यात्रियों से भरी एक सिटी बस में अचानक आग लग जाने से उसमें सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई परंतु समय रहते ही यात्रियों को बस से बाहर निकाल लिया गया।
* 20 सितम्बर को ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) में 25 स्कूली बच्चों को लेकर जा रही एक चलती बस में अचानक आग की लपटें उठने लगीं। समय रहते बच्चों को निकाल लिया गया, लेकिन एक बच्चा झुलस गया।
* 23 सितम्बर को ‘दिल्ली’ से ‘महोबा’ (उत्तर प्रदेश) जा रही एक प्राइवेट ए.सी. स्लीपर बस में यमुना एक्सप्रैस-वे पर भीषण आग लग जाने से 9 यात्रियों की जिंदा जल कर मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। जांच में पाया गया कि बस के एमरजैंसी एग्जिट को सीटों से ब्लॉक किया गया था और ए.सी. सिस्टम की खराबी के कारण आग लगी ।
* 24 सितम्बर को मुम्बई-पुणे एक्सप्रैस-वे पर ‘पनवेल’ के निकट एक चलती बस में अचानक आग लग गई। गनीमत यह रही कि समय रहते सभी यात्रियों को बाहर निकाल लिया गया जिससे कोई प्राण हानि नहीं हुई।
* 5 अक्तूबर को ‘नागौर’ (राजस्थान) में एक चलती मिनी बस में शार्ट सॢकट के कारण आग लग गई जिसमें ड्राइवर की सूझबूझ से बस में सवार सभी 13 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
* 6 अक्तूबर को ‘दिल्ली’ से ‘मुजफ्फरपुर’ (बिहार) जा रही एक डबल डैकर स्लीपर बस में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रैस-वे पर अचानक भीषण आग लग गई। गनीमत रही कि समय रहते ही सभी 32 यात्रियों को सुरक्षित बस से बाहर निकाल लिया गया, परंतु यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया। आग का कारण इंजन में शॉर्ट सर्किट बताया गया।
* 6 अक्तूबर को ही मध्य प्रदेश में उज्जैन से इंदौर आ रही ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की बस में आग लग जाने के परिणामस्वरूप बस जल कर राख हो गई।
* 8 अक्तूबर को ‘शिवमोगा’ (कर्नाटक) के ‘मुम्बुलू’ गांव के निकट एक डबल डैकर स्लीपर बस आग लग जाने के कारण जल कर राख हो गई परंतु समय रहते यात्रियों को बाहर निकाल लेने के कारण कोई प्राण हानि नहीं हुई।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार बसों में आग लगने की घटनाओं को 2 हिस्सों में बांटा जा सकता है ‘टक्कर से लगने वाली आग’ तथा ‘बिना टक्कर के लगने वाली आग’। बिना दुर्घटना के बसों में लगने वाली आग अधिक खतरनाक होती है। दिल्ली के पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ‘श्री अनिल छिकारा’ के अनुसार बसों को आग लगने का बड़ा कारण ए.सी. बसों में की जाने वाली लोकल ‘रैट्रो फिटिंग’ है। एक ओर जहां ओरिजिनल उपकरण निर्माता द्वारा निर्मित बस की कीमत 2 करोड़ रुपए से अधिक होती है वहीं लोकल बाडी बिल्डर इससे कम कीमत में ही बस को ‘कस्टमाइज्ड’ बस बना देते हैं। इनमें 14-15 घंटों तक लगातार ए.सी., लाइटिंग तथा मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट चलने के कारण तारों पर भारी इलैक्ट्रिकल लोड से तारों के गर्म होकर पिघलने से चिंगारी उठती है और देखते ही देखते आग पूरी बस में फैल जाती है।
अधिकांश मामलों में यह देखा गया है कि बसों में आग लगने का मुख्य कारण ए.सी. सिस्टम में खराबी तथा वायरिंग में शॉर्ट सर्किट रहा है। ट्रांसपोर्ट आप्रेटरों द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन न करने और सही ढंग से रख-रखाव न करने के कारण इस तरह की दुर्घटनाएं हो रही हैं।
ए.सी. बसों में खराब कूलिंग सिस्टम या रेडिएटर में रिसाव के कारण इंजन अधिक गर्म हो सकता है, जिससे आस-पास के प्लास्टिक या तेल में आग लग सकती है। बैटरी में शार्ट सर्किट या खराबी भी आग लगने का कारण बन सकती है। अत: बसों के रख-रखाव की ओर ध्यान न देकर यात्रियों के प्राणों को संकट में डालने वाले ट्रांसपोर्ट आप्रेटरों के विरुद्ध तुरंत कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।



