राजनीति

राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट से साक्षात्कार

राहुल गांधी अन्तत: उच्चतम न्यायालय पहुंचे। लेकिन साधारण व्यक्ति की तरह नहीं। पूरा जुलूस लेकर। ट्रक में बैठकर। ट्रक में से किसी को धक्के देकर उतारा जा रहा है। पैदल चलो। किसी को हाथ पकड़ कर ऊपर खींचा जा रहा है। किसी को कोहनी मारी जा रही है, किसी से कोहनी मरवाई जा रही है। साथ साथ कुछ वकील भी चल रहे हैं। नारे लगा रहे हैं, चिल्ला रहे हैं। लो! एक के मुंह पर राहुल गान्धी ने चमगादड़ का चेहरा लगा दिया है। किसी ने पूछा, राहुल गान्धी कहां जा रहे हैं? पता चला उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने जा रहे हैं। चिल्ला रहे हैं। लोग हैरान हैं, ट्रक के ऊपर और उसके आजू बाजू जो लोग चिल्ला कर जा रहे हैं, ये आखिर कौन हैं? उत्तर राहुल गान्धी ही देते हैं, हमारी तो यह शिवजी की बारात है। कोई भी कुत्ता-बिल्ली इसमें शामिल हो सकता है। ऊपर वाले भी और नीचे वाले भी हैरान हो रहे हैं। राजकुमार ने ऐसा किसके बारे में कहा? लेकिन पूछ कोई नहीं रहा। यदि पूछ लिया तो न जाने राजकुमार किस का नाम ले लेंगे…

किसी विद्वान ने कहा है कि व्यक्ति को केवल किताब से नहीं बल्कि अपने अनुभव से भी सीखना चाहिए। शायद देश में विपक्ष के नेता कहे जाने वाले राहुल गांधी को उनके किसी शुभचिंतक ने यह बता दिया है। अब वे अनुभव से सीखने की प्रक्रिया में जुट गए हैं। वैसे भी पुरातन इतिहास के कुछ राजवंशों में ऐसी परंपरा रही है कि वे राजकुमारों, जिन्हें राजकुंवर भी कहा जाता था, को गद्दी देने से पहले उन्हें प्रजा में घूम कर अनुभव अर्जित करने के लिए कहते थे। लेकिन वे राजवंश अपने राजकुमारों को सीखने के इस काम में छोटी उम्र में लगाते थे। युवा होते होते वे बहुत कुछ सीख लेते थे। लेकिन नेहरु राजवंश, जिस पर आजकल इस परिवार का आधिपत्य है, ने राहुल गांधी को अनुभव से सीखने के काम में उतारने में बहुत देर कर दी लगती है। राहुल गान्धी की अपनी उम्र भी साठ के आसपास पहुंच गई है। यह साठ साल की उम्र भारत के लोक मनोविज्ञान में बड़ी खतरनाक मानी जाती है। लोक मनोविज्ञान भी किताब पर नहीं बल्कि सहस्राब्दियों के अनुभव पर ही आधारित माना जाता है। इसलिए कम से कम गांव वाले तो इसे प्रामाणिक ही मानते हैं। यदि आदमी बचपन से ही सीखता रहे तो साठ साल तक पहुंचते पहुंचते वह अनुभवी हो जाता है और समाज को उसका लाभ मिलता है, लेकिन यदि वह सीखने के संसार में पदार्पण ही साठ के आसपास करे तो वह प्रहसन की मुद्रा में दिखाई देने लगता है। इसीलिए लोक उक्ति ‘सठिया गया’ बनी होगी। अब राहुल गान्धी कुछ दिनों से अनुभव के आधार पर सीख रहे हैं। उनका अगला पाठ उच्चतम न्यायालय के बारे में था।

वे अपने साथ जो लाल किताब, जिसे वे संविधान कहते हैं, लेकर घूमते रहते हैं, उसमें उच्चतम न्यायालय जाने की पूरी प्रक्रिया लिखी हुई है। राहुल गान्धी के साथ घूमते रहने वाले कपिल सिब्बल तो उच्चतम न्यायलय जाने की प्रक्रिया अच्छी तरह जानते हैं। मुझे नहीं पता उन्होंने राहुल गान्धी को इसके बारे में कुछ बताया या नहीं। हो सकता है राहुल गान्धी ने उनसे इसके विषय में कुछ पूछा भी या नहीं? लेकिन वे अपनी उस किताब में जिसे वे लेकर घूमा करते हैं, उसमें पढ़ सकते थे कि उच्चतम न्यायालय से कोई बात करनी हो तो उसके लिए याचिका देनी पड़ती है। उसमें वे सभी मुद्दे लिखने पड़ते हैं जिनके बारे में बात करनी है। इतना ही नहीं अपने मुद्दों के बारे में प्रमाण भी देने पड़ते हैं। इतना ही नहीं थोड़ी फीस भी देनी पड़ती है। तब उच्चतम न्यायालय आपको तिथि बताता है और आपको उस तिथि को वहां जाकर अपनी बात करनी पड़ती है। इतना ही नहीं जिनके खिलाफ आप मुद्दे उठा रहे हैं उनको भी वहां बुलाया जाता है। वे भी अपनी बात रखते हैं। अपने प्रमाण देते हैं। तब दोनों की बात सुन कर न्यायालय अपना निर्णय देता है। लेकिन राहुल गान्धी तो राजवंश के चिराग हैं। यह सारी प्रक्रिया तो आम जनता के लिए है। राजवंश तो इन प्रक्रियाओं से कहीं ऊपर हैं। इसलिए राहुल गान्धी ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को लिखा, भाई मुझे आपसे कुछ मुद्दों पर चर्चा करनी है, इसलिए सूचित करें कि मैं किस तारीख को आ जाऊं? अब इस चि_ी का जवाब भला मुख्य न्यायाधीश क्या देते, फिर भी उन्होंने शालीनता दिखाई और राहुल को उच्चतम न्यायालय में आने की प्रक्रिया समझा दी। उधर राहुल गान्धी की सहयोगी केरल कांग्रेस और भी उतावली हो गई। उसने तुरन्त मांग की कि यदि मुख्य न्यायाधीश देश में शान्ति व्यवस्था नहीं बनाए रख सकते तो उन्हें तुरन्त इस्तीफा दे देना चाहिए। केरल कांग्रेस उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को मुख्य न्यायाधीश बना लेगी। खैर, राहुल गांधी अन्तत: उच्चतम न्यायालय पहुंचे। लेकिन साधारण व्यक्ति की तरह नहीं। पूरा जुलूस लेकर। ट्रक में बैठकर। ट्रक में से किसी को धक्के देकर उतारा जा रहा है। पैदल चलो। किसी को हाथ पकड़ कर ऊपर खींचा जा रहा है। किसी को कोहनी मारी जा रही है, किसी से कोहनी मरवाई जा रही है। साथ साथ कुछ वकील भी चल रहे हैं। नारे लगा रहे हैं, चिल्ला रहे हैं। लो! एक के मुंह पर राहुल गान्धी ने चमगादड़ का चेहरा लगा दिया है। किसी ने पूछा, राहुल गान्धी कहां जा रहे हैं? पता चला उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने जा रहे हैं। चिल्ला रहे हैं। लोग हैरान हैं, ट्रक के ऊपर और उसके आजू बाजू जो लोग चिल्ला कर जा रहे हैं, ये आखिर कौन हैं? उत्तर राहुल गान्धी ही देते हैं, हमारी तो यह शिवजी की बारात है। कोई भी कुत्ता-बिल्ली इसमें शामिल हो सकता है। ऊपर वाले भी और नीचे वाले भी हैरान हो रहे हैं। राजकुमार ने ऐसा किसके बारे में कहा? लेकिन पूछ कोई नहीं रहा। यदि पूछ लिया तो न जाने राजकुमार किस का नाम ले दें। भारत के इतिहास में राजकुमार याचिका डालने जा रहे हैं। यह कोई छोटी बात है। राजकुमार खुद याचिका लगाने आए हैं। दरबारी गदगद हो रहे हैं। राजकुमार लोगों को किस प्रकार हंसा रहे हैं। उस दिन प्रधानमंत्री के घर के बाहर बीच सडक़ पर लेट गए थे।

इतिहास में किसी राजकुमार को इस प्रकार खुरदरी सडक़ पर लेटते देखा है? यह होता है अपनी प्रजा से अनुराग। एक दिन मछली पकडऩे के लिए तालाब में कूद लिए थे। एक दिन खेत में भी घुसते देखे गए थे। एक दिन रेलवे स्टेशन पर कुलीगीरी कर रहे थे। एक दिन ट्रक ड्राइवरों के साथ ठिठोली कर रहे थे। एक दिन जलेबी देख कर कितने खुश हुए थे। इतना ही नहीं जलेबी खाई भी। केवल खाई ही नहीं अपनी बहन को भी भिजवाई। यह होता है भाई बहन का आदर्श प्रेम। गोसाईं जी मानस में इसके बारे में जरूर लिखे होंगे। उच्चतम न्यायालय की ओर राजकुमार अपने काफिले को लेकर बढ़ रहे हैं। याचिका दायर कर दी गई है। याचिका दायर कर दी गई है। शोर पड़ गया है। इतना शोर भारत में नहीं पड़ रहा जितना अमरीका में पड़ रहा है। एलन मस्क भी खुश हो रहे हैं। राजकुमार ने उनको भी तो संदेसवा दिया था। भाव यह लगता था कि मस्क भाई इंतजार करो, मैं प्रधानमंत्री बनने वाला हूं। तब तुम्हारा स्टारलिंक भी आ जाएगा। लेकिन यह चमगादड़ का मुंह लगाए कौन बैठा है? कोई होगा। शायद राजकुमार की नजर उतार रहा होगा। राहुल प्रधानमंत्री बनेंगे तो सभी को हिस्सा जो मिलेगा। देखें आगे क्या होता है?

कुलदीप चंद अग्निहोत्री

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button