राजनीति

‘बड़े दरवाजे’ में बैठने वाले मूंछ वाले माफिया MLA के आगे कांपते थे बड़े-बड़े गैंगस्टर

लखनऊ: तारीख-29 नवंबर 2005, स्थान-बसनिया चट्टी के पास कोटवा–लट्ठूडीह मार्ग, गाजीपुर उत्तर प्रदेश। वह काली शाम बेहद भयावह होने वाली थी। दरअसल, बीजेपी के तत्कालीन दबंग विधायक कृष्णानंद राय एक क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करके बुलेटप्रूफ गाड़ी छोड़कर अपनी निजी क्वालिस से लौट रहे थे, जब घात लगाकर बैठे बदमाशों ने अचानक उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। जगह ऐसी चुनी गई, जहां से गाड़ी मोड़ने का कोई स्कोप नहीं था। गाड़ी में कृष्णानंद के साथ कुल 6 और लोग गाड़ी में थे।

एके-47 से 500 से ज्यादा गोलियां चलाई गईं, जिसमें सभी सातों लोग मारे गए। जब पोस्टमार्टम हुआ तो कृष्णानंद राय के शरीर से 67 गोलियां निकाली गई थीं। बताया जाता है गाजीपुर की अपनी पुरानी पारिवारिक सीट हार जाने से माफिया से राजनेता बने मुख्तार अंसारी नाराज थे। कृष्णानंद हत्याकांड के वक्त में जेल में बंद होने के बावजूद मुख्तार अंसारी को इस हत्याकांड में नामजद किया गया।

गाजीपुर में हर कोई जानता है बड़का फाटक का पता

  • मुख्तार अंसारी और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव गाजीपुर से लेकर मऊ, जौनपुर, बलिया और बनारस तक है। महज 8-10 प्रतिशत मुसलमान आबादी वाले गाजीपुर में हमेशा से अंसारी परिवार हिंदू वोट बैंक के आधार पर चुनाव जीतता रहा है।
  • गाजीपुर के युसुफपूर इलाके में स्थित मुख्तार अंसारी का पैतृक निवास ‘बड़े दरवाजे’ के नाम से जाना जाता है। इस छोटे से शहर में ‘बड़का फाटक’ का पता हर कोई जानता है।

गाजीपुर के युसुफपूर इलाके में स्थित मुख्तार अंसारी का पैतृक निवास ‘बड़े दरवाजे’ के नाम से जाना जाता है। इस छोटे से शहर में ‘बड़का फाटक’ का पता हर कोई जानता है।

रिपोर्ट

मुख्तार अंसारी: पांच बार विधायक चुने गए

माफिया, बाहुबली और राजनेता बने यूपी के पूर्वांचल में मऊ से पांच बार के विधायक चुने गए थे। 1985 से अंसारी परिवार के पास रही गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट 17 साल बाद 2002 के चुनाव में उनसे बीजेपी के कृष्णानंद राय ने छीन ली। लेकिन वे विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। तीन साल बाद उनकी हत्या कर दी गई।

1985 से अंसारी परिवार के पास रही गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट 17 साल बाद 2002 के चुनाव में उनसे बीजेपी के कृष्णानंद राय ने छीन ली। लेकिन वे विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। तीन साल बाद 2005 में उनकी हत्या कर दी गई।

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मुख्तार का 90 के दशक में हुआ उभार

  • 80 और 90 के दशक में अपने चरम पर रहा बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी का ऐतिहासिक गैंगवार यहीं गाजीपुर से शुरू हुआ था। मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी ने एक मीडिया रिपोर्ट में बातचीत में कहा था-‘मुख्तार हमसे 10 साल छोटे हैं। स्कूल खत्म होने के बाद मुख्तार गाजीपुर के कॉलेज में पढ़ते थे। उस कॉलेज में राजपूत-भूमिहारों का वर्चस्व था। वहीं इनकी दोस्ती साधू सिंह नाम के एक लड़के से हुई। उससे दोस्ती निभाने के चक्कर में ये उसकी निजी दुश्मनियों में शामिल हो गए।’ यहीं से मुख्तार की मुख्तारी शुरू हुई।
  • मुख्तार अंसारी पर कुल 65 मुकदमे दर्ज थे। मुख्तार अंसारी पर 1996 में विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी और कोयला व्यापारी नंदकिशोर रुंगटा के अपहरण का भी केस दर्ज था। 2023 के अप्रैल में मुख़्तार अंसारी को कृष्णानंद राय हत्या मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके भाई और गाजीपुर से सांसद रहे अफजाल अंसारी को भी इस मामले में चार साल की सजा सुनाई गई थी।

मुख्तार गाजीपुर के कॉलेज में पढ़ते थे। उस कॉलेज में राजपूत-भूमिहारों का वर्चस्व था। वहीं इनकी दोस्ती साधू सिंह नाम के एक लड़के से हुई। उससे दोस्ती निभाने के चक्कर में ये उसकी निजी दुश्मनियों में शामिल हो गए।

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मुख्तार के दादा कांग्रेस अध्यक्ष रहे

  • मुख्तार अंसारी के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी थे। वह देश के स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी का साथ देने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं और 1926-27 में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
  • मुख्तार अंसारी के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को 1947-48 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में शहादत के लिए महावीर चक्र से नवाजा गया था। उन्हें नौशेरा का शेर भी कहा जाता है।
  • कम्युनिस्ट बैकग्राउंड से आने वाले मुख्तार के पिता सुभानउल्ला अंसारी स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में मुख्तार अंसारी के चाचा हैं।
  • मुख्तार अंसारी के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी थे, जो आजादी से पहले कांग्रेस अध्यक्ष थे। वहीं नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान 1947 में देश के लिए शहीद हुए थे।

मुख्तार के परिवार का गाजीपुर और मऊ में दबदबा

  • मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा से लगतार पांच बार (1985 से 1996 तक) विधायक रह चुके हैं और 2004 में गाजीपुर से ही सांसद का चुनाव भी जीत चुके हैं।
  • मुख्तार के दूसरे भाई सिबकातुल्ला अंसारी भी 2007 और 2012 के चुनाव में मोहम्मदाबाद से ही विधायक रह चुके थे।
  • 1996 में बसपा के टिकट पर जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले मुख्तार ने 2002, 2007, 2012 और फिर 2017 में भी मऊ से जीत हासिल की। इनमें से आखिरी तीन चुनाव उन्होंने देश की अलग-अलग जेलों में बंद रहते हुए लड़े और जीते।

बसपा से चुनावी सफर और बसपा ने ही निकाला

मुख्तार ने बसपा से चुनावी सफर शुरू करने के बाद निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा। फिर 2012 में पारिवारिक पार्टी कौमी एकता दल से खड़े हुए और 2017 में पार्टी के बसपा में विलय होने के साथ ही वह भी बसपा में शामिल हो गए। कभी मुख्तार अंसारी को ‘गरीबों का मसीहा’ बताने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने अप्रैल 2010 में अंसारी भाइयों को ‘अपराधों में शामिल’ बताते हुए बसपा से निकाल दिया था।

2017 के चुनाव से पहले उन्होंने ‘अदालत में उन पर कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है’ कहते हुए अंसारी भाइयों की पार्टी ‘कौमी एकता दल’ का विलय बसपा में करवा लिया।

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भूमिहारों का वेटिकन है गाजीपुर

  • गाजीपुर का एक महत्वपूर्ण विरोधाभास यह भी है कि अपराधियों और पूर्वांचल के गैंगवार की धुरी होने के साथ-साथ इस जिले से हर साल कई लड़के आईएएस-आईपीएस भी बनते हैं। दोआब की उपजाऊ जमीन पर बसा गाजीपुर में भूमिहारों की आबादी काफी ज्यादा है। आम बोलचाल में गाजीपुर को ‘भूमिहारों का वेटिकन’ भी कहा जाता है।
  • मऊ में अंसारी की कई कथित गैरकानूनी संपत्ति ढहा दी गई थी। सितंबर 2022 में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुख्तार अंसारी को एक जेलर को धमकाने के 2003 के एक मामले में सात साल की सजा सुनाई थी।
  • इसके कुछ दिन बाद 1999 के एक मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत उन्हें पांच साल सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई गई और 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
  • जुलाई 2022 में मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा अंसारी और उनके बेटे अब्बास अंसारी को फरार घोषित कर दिया गया।
  • अगस्त 2020 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अफजाल अंसारी के गैरकानूनी तरीके से बने घर को ढहा दिया।

ऐसे हो गया मुख्तार का अंत

  • 29 मार्च 2024 को अचानक खबर आई कि उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में सजा काट रहे मुख्तार अंसारी का दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
  • 2023 में ही मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने अपने पिता की जान का खतरा होने का अंदेशा जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी।
  • मुख्तार अंसारी को फिरौती के मामले में साल 2019 से पंजाब की रूपनगर जेल में रखा गया था। साल 2021 में उन्हें उत्तर प्रदेश की पुलिस बंदा लेकर आई। तबसे वो यहीं पर बंद थे। मुख्तार अंसारी ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि उन्हें धीमा जहर दिया जा रहा है।
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