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धरने-प्रदर्शनों का बदलता स्वरूप: क्या आम जनता को राहत मिलेगी?

पंजाब के इतिहास में पिछले कुछ वर्षों के दौरान किसान संगठनों, बेरोजगार युवाओं, सरकारी कर्मचारियों और धार्मिक संगठनों द्वारा अपनी  मांगें मनवाने के लिए किए जाने वाले पारंपरिक आंदोलनों ने आम जनता के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। पिछले समय के दौरान महीनों तक चले अनिश्चितकालीन हाईवे जाम, रेल रोको अभियान और अचानक होने वाली  दफ्तरी  तालाबंदियों के कारण जहां आम लोगों के काम में बाधा आती थी, वहीं राहगीर घंटों सड़कों पर फंसे रहते थे, मरीजों को अस्पताल पहुंचने में देरी होती थी, स्कूली बच्चे परेशान होते थे और रोजाना कमाने वाले मध्यम वर्ग का व्यापार पूरी तरह बर्बाद हो जाता था।

जनता बिना किसी कसूर के अपनी रोजी-रोटी और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकने को मजबूर होती, जिस कारण लोगों में आंदोलनों के प्रति एक भारी मानसिक थकान और गुस्सा पैदा हो रहा था। लेकिन अब, इस सार्वजनिक परेशानी को  गंभीरता से लेते हुए, पंजाब के संगठनों ने अपनी रणनीति और योजना में एक बड़ा ढांचागत बदलाव किया है। इस नए बदलाव की प्रत्यक्ष मिसाल हाल ही में 27 अगस्त को ‘सांझा मुलाजिम मंच’ के अध्यक्ष सुखचैन सिंह खैरा और सुशील कुमार फौजी की अगुवाई में पंजाब भर के लाखों सरकारी कर्मचारियों द्वारा की गई ‘महा  हड़ताल’ और अब 1 सितंबर से ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के प्रमुख नेता बलबीर सिंह राजेवाल की योजना के तहत चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर शुरू किए गए 7-दिवसीय मोर्चे से साफ देखने को मिल रही है। इसके अलावा किसान मजदूर मोर्चा, एस.के.एम. गैर-राजनीतिक, बी.के.यू. एकता उगराहां और जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी से संबंधित आंदोलनकारी अब आम लोगों को अंधाधुंध परेशान करने की बजाय नई, समझदारी भरी रणनीति के तहत सरकार पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

पुराने आंदोलनों की रणनीति और जनता की तकलीफों के बारे में यदि पिछले कुछ वर्षों के इतिहास पर नजर डालें, तो पुराने तरीकों के कारण जनता को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था जिनमें खासकर सप्लाई चेन और व्यापार का रुकना: मुख्य हाईवे (जैसे शंभू या खनौरी बॉर्डर) महीनों तक बंद रहने के कारण अंतर्राज्यीय व्यापार ठप्प हो जाता था, जिससे छोटे व्यापारियों, ढाबा मालिकों और ट्रक ड्राइवरों का रोजगार छिन जाता था।

प्रशासनिक कार्यों का ठप्प होना: पुरानी कर्मचारी हड़तालों के दौरान हफ्तों तक दफ्तर बंद कर दिए जाते थे, जिससे  लोगों की  जमीनी  रजिस्ट्रियां, लाइसैंस और अस्पतालों की ओ.पी.डी. सेवाएं पूरी तरह बंद हो जाती थीं। 27 अगस्त, 1 सितंबर और अन्य आंदोलनों  की नई रणनीति बनाते समय यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकार तक रोष भी पहुंचे और आम नागरिक को कोई बड़ी तकलीफ भी न हो, इस कारण यह सुनिश्चित किया गया कि चौराहों- सड़कों की बजाय निर्धारित  स्थानों पर इकट्ठा हों। 1 सितंबर के किसान आंदोलन के लिए बलबीर सिंह  राजेवाल और अन्य किसान नेताओं  ने किसी चलते हाईवे को जाम नहीं किया। प्रशासन के साथ तालमेल करके  सैक्टर 48-49 के पास एयरपोर्ट रोड  पर एक खास जगह तय की गई है, ताकि शहर का आंतरिक ट्रैफिक और हवाई मुसाफिर प्रभावित न हों।

समयबद्ध और सांकेतिक विरोध (27 अगस्त की बदली नीति) ‘सांझा मुलाजिम मंच’ द्वारा 27 अगस्त की कर्मचारी हड़ताल कोई अनिश्चितकालीन तालाबंदी नहीं थी, बल्कि एक ‘एक-दिवसीय महा हड़ताल’ थी। सुखचैन सिंह खैरा और सुशील कुमार फौजी ने यह सुनिश्चित किया कि वे सरकार तक अपना सख्त रोष भी पहुंचाएं और जनता के काम भी लंबे समय के लिए न लटकें।
दोनों आंदोलनों की नई योजना के तहत इमरजैंसी सेवाओं को पूरी छूट दी गई और किसी भी एम्बुलैंस, स्कूल बस, फायर ब्रिगेड या रोजाना की जरूरी वस्तुओं (दूध, सब्जियां) वाली गाडिय़ों को गुजरने के लिए विशेष रास्ते दिए गए। अस्पतालों में भी हड़ताल के दौरान एमरजैंसी वार्ड चालू रखे गए थे।

नई रणनीति के तहत संगठनों ने अपने प्रदर्शन के दिन और जगह की जानकारी कई दिन पहले ही सोशल मीडिया के जरिए पूर्व सूचना और डिजिटल अलर्ट भेजकर जनता को बताने का फैसला किया है जिससे आम नागरिक अपनी यात्रा की योजना पहले ही बना सकें। इस बदलाव के परिणामस्वरूप लोकतंत्र में अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार के साथ-साथ दूसरे नागरिकों के जीने और रोजगार के अधिकार में बाधा न डालने की जिम्मेदारी भी निभाई जा रही है। पंजाब के किसान और कर्मचारी संगठनों द्वारा 27 अगस्त और 1 सितंबर से शुरू हुए एस.के.एम. और किसान मजदूर मोर्चा के आंदोलनों के जरिए अपनाई गई यह नई और समझदारी भरी पहुंच बेहद सराहनीय है। यदि आंदोलनों का यह संयम वाला स्वरूप स्थायी रहता है, तो इससे राज्य के विकास और आम जनता के जीवन के सुखदपन में कोई बाधा नहीं पड़ेगी बल्कि पब्लिक की हमदर्दी मिलने के कारण सरकारों पर भी दबाव पड़ेगा।-इकबाल सिंह चन्नी

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