एसआरसीसी के 100 साल पूरे: पीएम मोदी बोले-यहां के पूर्व छात्र OG जैसे; नाराज ‘फूफाओं’ को देश ने दिया जवाब

एसआरसीसी आज अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम सात बजे शताब्दी समारोह में शामिल हुए। वह 2013 के बाद करीब 13 साल में पहली बार एसआरसीसी लौट रहे हैं और इस बार प्रधानमंत्री के तौर पर पहुंचें। शिक्षक दिवस के मौके पर होने वाला यह कार्यक्रम शिक्षा और युवाओं के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी एसआरसीसी का आज शताब्दी समारोह है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम सात बजे समारोह में शामिल हुए। इस समारोह में शामिल होने के लिए पीएम मोदी ने दिल्ली मेट्रो का सहारा लिया और बच्चों से बात भी की। शिक्षक दिवस के दिन हो रहे इस समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि इस शताब्दी समारोह के लिए मैं आप सबको बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि साथियों जब कोई इंसान 100 वर्ष का होता है तो उसे अनुभव का खान कहा जाता है, लेकिन जब कोई संस्थान 100 वर्ष पूरे करता है तो वह उपलब्धियों का महासागर हो जाता है।
अपनी 100 वर्षों की इस यात्रा में एसआरसीसी ने पीढ़ियों को गढ़ा है। उन्हें उज्ज्वल भविष्य से जोड़ा है। जो आए उन्होंने पढ़ा, और जो निकले वे गढ़े हुए निकले। इस कॉलेज की यात्रा दरियागंज के एक छोटे से संस्थान से शुरू हुई थी। आज वही छोटा कॉलेज एक विशाल वृक्ष बन चुका है। एक ऐसा विशाल वृक्ष जिसने कई पीढ़ियों को छांव दी और अपनी शीतलता से समृद्ध किया है। आज भी डीयू में कोई पूछता है कि कौन सा कॉलेज तो एसआरसीसी कहना ही काफी है।
यहां के एल्युमनाई ओजी हैं: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि साथियों, एसआरसीसी के एल्युमनाई भी बहुत खास रहे हैं। आपकी भाषा में कहूं तो यहां के एल्युमनाई ‘OG’ हैं। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है और दुनिया भर में देश का मान बढ़ाया है। इनमें से कुछ एल्युमनाई के साथ मुझे भी काम करने का अवसर मिला है। हमारे स्वर्गीय अरुण जेटली जी यहीं से पढ़े थे। मैं कह सकता हूँ कि शायद हमारी ऐसी कोई मुलाकात नहीं हुई, जिसमें उन्होंने एसआरसीसी से जुड़ा कोई किस्सा न सुनाया हो।

एसआरसीसी के छात्रों ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि साथियों, कभी-कभी तो मैं इस बात से तंग आ जाता था कि वे हर बार एक ही किस्सा सुनाया करते थे। मेरी टीम में शामिल संजीव सान्याल भी यहीं से पढ़े हैं और ऐसे कई अन्य साथी भी हैं। यहां से सिर्फ अर्थशास्त्र और व्यापार जगत के लोग ही नहीं निकले, बल्कि कलाकारों, वकीलों और जजों ने भी यहीं से अपनी पहचान बनाई है। यानी एसआरसीसी के छात्रों ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया है, भले ही वे हर विधा के धुरंधर न हों, लेकिन उन्होंने धूम जरूर मचाई है।
बीते कुछ दिनों से इस कार्यक्रम की बहुत चर्चा हो रही है। लोग 2013 में दिए गए मेरे भाषण को याद कर रहे हैं; कई लोगों ने उसे दोबारा सुना और पढ़ा है। संभव है कि नई पीढ़ी के युवाओं ने भी उसे फिर से देखा होगा। उस समय के उस कार्यक्रम से एक तरह की लहर बन गई थी, और आज 13-14 साल बाद भी उस सभा और उस संबोधन का असर वैसा ही बरकरार है।
पीएम मोदी ने तत्कालीन केंद्र सरकार को लेकर क्या कहा?
पीएम मोदी सभागार में मौजूद छात्रों से कहा कि तब आपकी जगह आपके सीनियर बैठे थे। मैं उस समय मुख्यमंत्री तो था, ही साथ ही देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का सदस्य भी था। संभवतः हर कोई यही उम्मीद कर रहा था कि मैं तत्कालीन केंद्र सरकार पर जमकर हमले करूंगा और आरोपों की झड़ी लगा दूंगा। लेकिन साथियों, विपक्ष में होने और तत्कालीन सरकार का आलोचक होने के बावजूद मैंने इस मंच का इस्तेमाल उस तरह से नहीं किया।
पीएम मोदी ने कहा कि मैंने यहां एक विजन रखा और सकारात्मक बातें कीं। उस दिन मैंने जो कुछ भी कहा, वह मेरा दृढ़ विश्वास था। मैं उन विचारों और सपनों को हमेशा से जीता आया हूं और लगातार उसी रास्ते पर चलता रहा हूं। देश के लिए पूरी निष्ठा से जुटना और देश के लिए जीने का जज़्बा, जो मेरा अंतर्निहित भाव है, वही भाव 2013 में इसी मंच से शब्दों की माला में पिरोकर प्रकट हुआ था।
पीएम मोदी ने पानी के ग्लास का क्या उदाहण दिया?
पीएम मोदी ने आगे कहा कि मैं काफी देर तक बोला था। मैंने पूछा भी था कि क्या मैं अपनी बात जारी रखूं? तब उन्होंने कहा था, हां, जारी रखिए। उस दिन मैंने पानी के गिलास का एक उदाहरण दिया था, जिसकी पूरे देश में काफी चर्चा भी हुई थी। मैंने बताया था कि गिलास में रखे पानी को देखने के तीन नज़रिए होते हैं। पहला- जिन्हें गिलास आधा भरा दिखता है; दूसरा-जिन्हें गिलास आधा खाली दिखता है; और तीसरा-जिन्हें गिलास पूरा भरा हुआ दिखाई देता है, आधा पानी से और आधा हवा से।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साथियों, वह एक ऐसा दौर था जब देश निराशा के दलदल में धंसा हुआ था। मैंने तब भी कहा था कि मैं गिलास को आधा-अधूरा नहीं देखता, बल्कि उसे पूरा भरा हुआ देखता हूं, आधा पानी से और आधा हवा से। उस समय आप लोग स्कूल में रहे होंगे, लेकिन आज अगर आप इंटरनेट पर जाकर 2013 और उसके आसपास की खबरें पढ़ेंगे, तो आपको अंदाजा होगा कि तब स्थितियां कैसी थीं। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप 2013 के उस कालखंड की अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियों पर एक बार नज़र जरूर डालें। आज जो गैंग है न, मैंने जो कहा है उसके टुकड़े-टुकड़े कर के डाल देगी। उस समय के कालखंड में मीडिया में छाया रहता था:-



