छत्तीसगढ़

दुर्घटना के बाद तड़पता रहा युवक, समय पर इलाज न मिलने से गई जान

 गरियाबंद। जिले में सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है, इसी दरमियान बुधवार को झाखरपारा केंदुबन मार्ग पर दो बाइक की जोरदार भिड़त हो गई. इस दुर्घटना में तीन लोग घायल हो गए थे, लेकिन इनमे से एक घायल की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस मौत के बाद अब स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़ा हो गया है. एक जनपद सदस्य ने एम्बुलेंस की लेट लतीफी की वजह से युवक की जान जाने का आरोप लगाया है, उनका कहना है कि, स्वास्थ्य विभाग की संकल्प यात्रा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एंबुलेंस सामान ढोने के लिए लगाया था. अगर उसे लेने समय पर एम्बुलेंस घटना स्थल पर पहुंचती तो उसकी जान बच सकती थी.

जनपद सदस्य आसलम मेमन ने कहा की समय पर घायल को उपचार मिलता तो बच जाता. मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए असलम मेमन ने बताया कि, घटना लगभग 2 बजे हुई. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच सबसे पहले 108 को कॉल किया गया, बाहर होने की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग में मौजूद अन्य सुविधाओं के लिए बीएमओ सुनील रेड्डी को कॉल किया गया. लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं करने पर अस्पताल के अन्य स्टाफ से मदद मांगी गई.

इस बीच जिन दो घायलों को ले जाने की व्यवस्था बनी उन्हें देवभोग अस्पताल तक पंहूचाया गया. लेकिन भतरू की हालत गंभीर होते जा रही थी, इस दौरान करीब दो घंटे बाद एंबुलेंस घटना स्थल पर पहूंची. जिसके बाद उसे भी देवभोग अस्पताल ले जाया गया जहां प्रारंभिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उसे भवानीपटना रेफर कर दिया गया था, जहां बुधवार देर रात उसकी मौत हो गई.

वहीं मामले में बीएमओ सुनील रेड्डी ने कहा कि, जिस वक्त कॉल आया उस समय वे अन्य सरकारी कार्य में थे, लेकिन अन्य स्टाफ से कॉर्डिनेट कर वाहन उपलब्ध कराया गया था. 108 एंबुलेंस गरियाबंद पेसेंट लेकर आई थी, वहीं सुपेबेड़ा का एंबुलेंस भी पेसेन्ट लेकर गया था. चूंकि संकल्प शिविर में भी वीआईपी और अन्य लोगो की भिड़ होती है, झाखरपारा एंबुलेंस को वही ड्यूटी में लगाया गया था.

पुलिस ने देसी जुगाड़ से जख्मी पांव का किया प्राथमित उपचार

बता दें कि, घटना की सूचना के बाद एंबुलेंस से पहले घटना स्थल पर पुलिस पहुंच गई थी, इस दौरान प्रधान आरक्षक विजय मिश्रा और तुलाराम साहू ने घायल भतरु राम के क्षतिग्रस्त पांव को पुठ्ठा और रस्सी से बांध कर सेट किया ताकि उसे आसानी से एंबुलेंस में ले जाया सके.

देवभोग में 108 के अलावा सिर्फ 3 अन्य एंबुलेंस

गौरतलब है कि, जिस क्षेत्र में दुर्घटना हुई उस झाखरपारा उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए भी एक एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है. जिसे संकल्प शिविरो में विभाग सामग्री ढोने लगाया रखा था. डीएमएफ से मिली एंबुलेंस 3 महीने से दुर्घटना ग्रस्त होकर पड़ी हुई है. सुपेबेड़ा में भी एक एंबुलेंस दी गई है, बावजूद इसके घटना स्थल पर एम्बुलेंस देर से पहुंची.

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