संपादकीय

ड्रैगन को क्यों आते हैं क्वॉड के डरावने सपने, भारत ने रख दिया अंगद का पांव

नई दिल्ली: हिंद-प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते मनमानेपन से निपटने के लिए भारत ने क्वॉड को मजबूत करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। 2017 के बाद से ऑस्ट्रेलिया ने भारत से प्रशांत महासागर में होने वाले नौसैनिक अभ्यास मालाबार में फिर से शामिल होने की बात कही। चीनी दबदबे को देखते हुए भारत ने आखिरकार 2020 में ऑस्ट्रेलिया की बात मान ली। 2021 में क्वॉड वर्चुअल शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी सक्रियता दिखाई और भारत भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल हुआ। इस सम्मेलन में फार्मास्यूटिकल्स, सप्लाई-चेन, तकनीक और प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया गया। उस वक्त भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना महामारी से उबरने की कोशिश कर रही थी। तब क्वॉड की एकजुटता ने मिसाल कायम की थी।

2017 की गर्मियों की बात है, जब सिक्किम सीमा पर मुस्तैदी से डटे भारतीय सैनिकों को यह भनक लगी कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी डोकलाम क्षेत्र में गुपचुप तरीके से सड़क बना रही है। 18 जून, 2017 को ‘ऑपरेशन जूनिपर’ के तहत 270 से 300 भारतीय सैनिक बुलडोजरों के साथ चीन की नापाक हरकत को रोकने पहुंच गए। भारत का कहना था कि ये जगह विवादित थी जो भूटान और चीन के बीच में स्थित थी। भारत का कहना था कि यहां सड़क नहीं बन सकती। यहीं से ऐसा गतिरोध बढ़ा कि सीमा पर भारत और चीन के सैनिक 72 से ज्यादा दिनों तक संघर्ष की स्थिति में आमने-सामने डटे रहे। हालांकि, 28 अगस्त 2017 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कुछ दिनों पहले भारत और चीन ने डोकलाम क्षेत्र से अपनी-अपनी सेनाएं हटाने पर सहमत हुए। मगर, 1 महीना भी नहीं बीता होगा कि चीन ने फिर विश्वासघात करते हुए डोकलाम में सड़क बनाना शुरू कर दिया।
चीन ने ऐसी ही एक हरकत 2020 में गलवां घाटी में की थी, जिसके बाद भारत ने Quadrilateral Security Dialogue (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) यानी क्वॉड को फिर से मजबूत बनाने की कवायद शुरू कर दी। आइए-समझते हैं क्वॉड की पूरी कहानी, जिसके शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। भारत क्वॉड को अंगद के पांव जैसा समझता है, जो समंदर में दबदबा कायम करने के लिए जरूरी है।

डोकलाम और गलवां संघर्ष में चीनी हरकत से भारत ने बनाया ‘महाबली’

डोकलाम इलाके को भूटान और चीन दोनों ही अपना अपना इलाका बताते हैं और भारत भूटान का समर्थन करता है। यह जगह भारत के लिए भू-सामरिक दृष्टिकोण से काफी अहम मानी जाती है। दरअसल, यह सड़क भारतीय जमीन के उस टुकड़े के पास बन रही थी जिसे ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है। यह इलाका भारत को इसके अरुणाचल प्रदेश जैसे उत्तर-पूर्वी राज्‍यों से जोड़ता है।
दोनों देशों के बीच इस टकराव को कई दशकों में सबसे खराब बताया गया था और बाद में दोनों ही देशों ने इलाके से अपनी अपनी सेना पीछे करने की बात स्‍वीकारी थी। उस वक्‍त अधिकारियों ने दिल्‍ली में कहा था कि चीन ने अपने बुल्‍डोजर और सड़क बनाने का अन्‍य सामान हटा लिया है। डोकलाम एक ट्राई-जंक्शन है, जहां भारत, चीन और भूटान की सीमा मिलती है। वहीं, 2020 में लद्दाख सीमा पर गलवां घाटी संघर्ष में चीन ने विश्वासघात किया था। जिसके बाद भारत ने क्वॉड को ‘महाबली’ बनाने की सोची।

चीन के मंसूबे को देखते हुए भारत ने फिर से मालाबार में लिया हिस्सा

हिंद-प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते मनमानेपन से निपटने के लिए भारत ने क्वॉड को मजबूत करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। 2017 के बाद से ऑस्ट्रेलिया ने भारत से प्रशांत महासागर में होने वाले नौसैनिक अभ्यास मालाबार में फिर से शामिल होने की बात कही। चीनी दबदबे को देखते हुए भारत ने आखिरकार 2020 में ऑस्ट्रेलिया की बात मान ली। 2021 में क्वॉड वर्चुअल शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी सक्रियता दिखाई और भारत भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल हुआ। इस सम्मेलन में फार्मास्यूटिकल्स, सप्लाई-चेन, तकनीक और प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया गया। उस वक्त भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना महामारी से उबरने की कोशिश कर रही थी। तब क्वॉड की एकजुटता ने मिसाल कायम की थी।

समंदर में मालाबार अभ्यास से क्यों दूर हो गया था भारत

2007 में दो मालाबार नौसैनिक अभ्यास हुए थे। अप्रैल में जापान को पहली बार अमेरिका-भारत नौसैनिक अभ्यास में शामिल किया गया था। सितंबर आते-आते यह नौसैनिक अभ्यास मालाबार बहुपक्षीय हो गया, क्योंकि इसमें चार नौसेनाएं और सिंगापुर शामिल थे। हालांकि, जब चीन ने अभ्यास का विरोध करना शुरू कर दिया तो यह समूह छिटक गया।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टियों ने भी इस समुद्री अभ्यास का विरोध करना शुरू कर दिया, जिससे क्वाड में भारत की स्थिति और कमजोर हो गई। भारत इसलिए भी झिझक रहा था क्योंकि उसे चिंता थी कि चीन के साथ प्रतिद्वंद्विता के कारण भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से बाहर हो जाएगा। उसी वक्त भारत समर्थक जापान के पीएम शिंजो आबे ने इस्तीफा दे दिया। उस समय भारत को ऑस्ट्रेलियाई समर्थन भी नहीं मिल पा रहा था।

क्या है क्वॉड, जिससे खौफ खाता है चीन

क्वॉड यानी चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quadrilateral Security Dialogue) एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, और जापान शामिल हैं। क्वॉड का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र को खुला, समृद्ध और समावेशी बनाना है। क्वॉड की स्थापना दिसंबर 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी के बाद मानवीय सहायता और आपदा राहत के लिए की गई थी। इसकी पहली बैठक 2007 में हुई थी। क्वॉड देशों के बीच अर्ध-नियमित शिखर सम्मेलन, सूचना आदान-प्रदान और सैन्य अभ्यास के जरिए रणनीतिक वार्ता होती रहती है।

मालाबार अभ्यास से टेंशन में रहता है ड्रैगन

क्वॉड देशों का मानना है कि यह ग्रुप सिर्फ हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा हितों की रक्षा के लिए है। चीन क्वॉड का हमेशा से विरोधी रहा है, क्योंकि वह ऐसे ग्रुप से खौफ खाता है। क्वॉड देशों ने 2020 में मालाबार अभ्यास में हिस्सा लिया था। मालाबार अभ्यास भारत, जापान, और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच होने वाला सालाना नौसैनिक अभ्यास है। इस अभ्यास के चलने तक चीन यानी ड्रैगन हमेशा टेंशन में रहता है।

क्या यह ‘एशियाई नाटो’है, जिसका चीन करता है विरोध

चीन की शिकायत है कि यह समूह ‘एशियाई नाटो’ बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, उस गठबंधन के विपरीत क्वॉड में कोई पारस्परिक रक्षा समझौता प्रभावी नहीं है। क्वाड सदस्यों का कहना है कि समूह का उद्देश्य चार देशों के बीच आर्थिक, कूटनीतिक और सैन्य संबंधों को गहरा करना है। दरअसल, इसका मकसद चीनी आक्रामकता के खिलाफ एक सुरक्षा कवच बनना है। मार्च 2021 में ‘क्वॉड की भावना’ को सामने रखते हुए एक घोषणापत्र में नेताओं ने कहा-हम विविध दृष्टिकोण लेकर आते हैं और स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए एक साझा दृष्टिकोण में एकजुट हैं।

क्या क्वॉड प्लस बन सकता है

दक्षिण कोरिया ने क्वॉड में शामिल होने में रुचि दिखाई है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि वे सदस्यता को बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं। समूह ने क्वॉड-प्लस’ बैठकें की हैं, जिनमें दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम शामिल हैं। ये देश और सिंगापुर व इंडोनेशिया भविष्य में होने वाले विस्तार या साझेदारी में शामिल किए जा सकते हैं।

क्वॉड से समंदर का सिकंदर बन सकता है भारत

क्वॉड के कारण भारत को एक ओर जहां हिंद महासागर में समुद्री ताकत बढ़ाने में मदद मिली है। वहीं, प्रशांत महासागर में भी इसे बड़ी सम्मानित जगह मिली है। चारों देशों की नौसेनाओं का आपसी तालमेल इस क्षेत्र में समुद्री ताकत बढ़ाता है और इसके जरिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत समुद्री चुनौतियों का जवाब देने में पहले से कहीं ज्यादा सक्षम है। साथ ही इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस के जरिए क्वॉड हिंद महासागर क्षेत्र में अवैध समुद्री गतिविधियों का मजबूती से मुकाबला भी कर रहा है।

क्वॉड के मंच से भारत करेगा चीन पर चोट

क्वॉड के मंच से भारत को सेमीकंडक्टर, 5जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है। यही कारण है कि भारत में सेमीकंडक्टर के उत्पादन के लिए तेजी से यूनिट्स बनाए जा रहे हैं। वहीं, चीन सेमीकंडक्टर में दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करना चाहता है। इस मंच से भारत उसकी बादशाहत को चुनौती दे सकता है। वह क्वॉड के चारों देशों को इस बात के लिए राजी कर सकता है कि वो चीन को छोड़कर दुनिया के दूसरे देशों से अपने कारोबार बढ़ाएं, क्योंकि चीन से हर कोई परेशान है।

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