राष्ट्रीय

सैनिक रोज-रोज शहीद क्यों, राजगद्दी पर आसीन राजा कर क्या रहा है?

जम्मू-कश्मीर में तो बिना जंग के हमारे फौजी जवान 1980 से 2024 तक मरते ही चले आ रहे हैं? आतंकवादी तो आते ही मरने के लिए हैं परन्तु  हमारे जवान क्यों मरें? आतंकवादी तो जम्मू-कश्मीर में अपना खूनी खेल खेलने में कामयाब होते आ रहे हैं। 1980 से 2024 तक कोई थोड़ा समय नहीं। हमने इस समय में कितने जवान खोए हिसाब नहीं। कितनी सम्पत्ति नष्ट हुई, कितनी मासूम जानें गईं? इसका हिसाब तो प्रजा को देना होगा। मात्र इतना कह देने से हिसाब चुकता नहीं हो जाता कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है। तो भारत की राजगद्दी पर आसीन राजा क्या कर रहा है? 

प्राचीन भारत में छोटे गणराज्य हुआ करते थे। राजा-प्रजा मिल बैठते थे। दोनों के मध्य एक पवित्र समझौता हुआ। प्रजा ने राजा से कहा आज से आप हमारे राजा हुए। राजा ने कहा ‘तथास्तु!’ परन्तु? प्रजा ने कहा कोई किंतु-परन्तु नहीं। राजा ने उत्तर दिया, ‘तथास्तु’। प्रजा बोली हम आपको राज्य चलाने के लिए अपनी आमदनी से टैक्स देंगे। अपनी रक्षा के लिए हम तुम्हें अपने पुत्र तक देंगे। तुम्हें राजा होकर ‘प्रजा पालक’ होना होगा। हमारी रक्षा करनी होगी। चोरों-उचक्कों और आतंकवादियों से हमारी रक्षा करनी होगी। राजा ने कहा ‘तथास्तु’। इस समझौते अधीन समाज चल पड़ा। राजा अपना उत्तरदायित्व निभाता गया, प्रजा अपने काम-धंधे में लग गई। समाज विकसित होने लगा। 

राष्ट्रीय सोच पनपने लगी। भौगोलिक दृष्टि से राज्य बनते चले गए। आज भी राज्यों में लोकतंत्र की सही भावना काम कर रही है। आज प्रजातंत्र में लोकमतानुसार सरकारें काम कर रही हैं। लोकतंत्र व्यवस्था में केंद्र से स्थानीय स्तर तक यही लोकभाव फल-फूल रहा है। राजा अपना काम कर रहा है, प्रजा अपने काम में लीन है। गांव स्तर पर सरपंच राजा है और केंद्रीय सरकार में प्रधानमंत्री चुना गया राजा है। राजा लोकतंत्र में भी ईश्वरीय शक्ति माना गया है। प्रजा को राज-आज्ञा माननी ही पड़ती है। इसीलिए समाज खुश है। देश के लोगों का राजा में विश्वास बना हुआ है। नरेंद्र मोदी की कई गारंटियां फलीभूत हो रही हैं। मोदी में विश्व के राजनेताओं ने अपना विश्वास जताया है। परन्तु कुछ गारंटियों पर मोदी और अमित शाह की जोड़ी खड़ी नहीं दिख रही। जनता विचार रही है कि मोदी और अमित शाह के राज में बिना युद्ध सेना, पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान क्यों मर रहे हैं? 

जम्मू-कश्मीर में तो बिना जंग के हमारे फौजी जवान 1980 से 2024 तक मरते ही चले आ रहे हैं? आतंकवादी तो आते ही मरने के लिए हैं परन्तु  हमारे जवान क्यों मरें? आतंकवादी तो जम्मू-कश्मीर में अपना खूनी खेल खेलने में कामयाब होते आ रहे हैं। 1980 से 2024 तक कोई थोड़ा समय नहीं। हमने इस समय में कितने जवान खोए हिसाब नहीं। कितनी सम्पत्ति नष्ट हुई, कितनी मासूम जानें गईं? इसका हिसाब तो प्रजा को देना होगा। मात्र इतना कह देने से हिसाब चुकता नहीं हो जाता कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है। पाकिस्तान एक छोटा-सा मुल्क और उसने दुनिया की पांचवीं बड़ी शक्ति को आगे लगा रखा है। पाकिस्तान एक छोटा-सा मुल्क अफगानिस्तान को तबाह कर रहा है। एक छोटा सा पाकिस्तान ‘बंगलादेश’ में हिंसा बढ़ा रहा है, आरक्षण के नाम पर यूनिवर्सिटियों के छात्रों में आग भड़काने का काम कर रहा है, तो भारत की राजगद्दी पर आसीन राजा क्या कर रहा है? 

कश्मीर घाटी को एक सम्प्रदाय के लोगों ने आतंकवादियों के भय से अपने घर-बार छोड़ दिए तो राजा प्रजा के संरक्षण में क्या कर रहा है? राजा ने प्रजा से जो ‘पवित्र समझौता’ किया था उस समझौते से पीठ क्यों मोड़ रहा है? 1980 से हम यही सुन रहे हैं कि घाटी में आतंकवाद पाकिस्तान फैला रहा है और पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध एक ‘प्रॉक्सी वार’ छेड़ रखी है। तो फिर राजा अपने कत्र्तव्य से क्यों विमुख है? यदि पाकिस्तान एक छोटा-सा देश यह सब कर सकता है तो भारत जैसा बड़ा विशाल देश अपने वीर सैनिकों की आहुति क्यों दे रहा है? बड़े देश को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। मासूम लोगों की मौतों पर नरेंद्र मोदी की गारंटी क्यों नहीं? मोदी साहिब बुरा न मानें, मेरे छोटे भाई हैं। भारत के लोगों का मोदी पर विश्वास है। जनता का वह विश्वास मोदी क्यों तोड़ें? क्यों नहीं पाकिस्तान में एक नया देश ‘पख्तूनिस्तान’ बना डालते? 2024 के  चुनाव में तो अमित शाह यही कह कर लोगों से वोट मांगते रहे। 

अब क्या हुआ? आतंकी तो घाटी से डोडा, किश्तवाड़, रियासी,  सांबा, राजौरी, रामबन और जम्मू तक दहाडऩे लगे हैं। नित हमारे जवानों को शहीद कर रहे हैं। आतंकवादी तो आते ही मरने के लिए हैं। उन्हें तो ट्रेङ्क्षनग ही ऐसी दी गई है कि आज तू नहीं या मैं नहीं। मरना तो आतंकी अपने माथे पर लिखवा कर लाते हैं परन्तु हमारे लोग क्यों मरें? हमारे सैनिक क्यों शहीद हों? स्थानीय लोग आतंकवादियों का नि:संदेह साथ दे रहे हैं। अपनी ही पुलिस के डी.एस.पी. आतंकवादियों को हथियार सप्लाई कर रहे हैं। प्रशासन में बैठे बड़े-बड़े अधिकारी और नेता आतंकवादियों को राह बता रहे हैं। क्या राजा को पता नहीं? क्या भारत के गृहमंत्री इन तमाम चीजों से नावाकिफ हैं? राजा आर-पार की नीति अपनाए। नाहक अपनी प्रजा और सेना को न मरवाए। स्वयं अपना दायित्व समझे। अमरीका और रूस भला हमारा साथ क्यों देंगे? मोदी साहिब बुरा न मानें, अपने मन की बात सुनें। जम्मू-कश्मीर में हमारा सब कुछ है। हमारे ग्रंथों की जननी है कश्मीर। कल्हण की ऐतिहासिक रचना ‘राजतरंगनी’ की भूमि है वह। 

आदि शंकराचार्य और माता खीर भवानी का पवित्र तीर्थ स्थान है कश्मीर। वैदिक साहित्य की वेदभूमि है कश्मीर। जम्मू तो हमारे वीर सपूत डोगरों की कर्मभूमि है। मां भगवती वैष्णो देवी का तपोस्थान है कटरा। अगर वहां घात लगाकर आतंकवादी आक्रमण कर सकते हैं तो कौन-सा स्थान जम्मू-कश्मीर राज्य में सुरक्षित है? यदि नरेंद्र मोदी की हर गारंटी सफल है तो फिर यह तीन महत्वपूर्ण बिंदू जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और मणिपुर जैसी महत्वपूर्ण गारंटियां क्यों छूट रही हैं। यह सही है कि भारत की प्रत्येक समस्या का हल राजा नरेंद्र मोदी को करना है। देश मोदी का है। देश अमित शाह की ओर भी इशारा कर रहा है। दो ही तो नेता हैं तीसरा कोई इनके सामने खांस भी नहीं सकता। अत: ज्वलंत समस्याओं का समाधान भी इन्हीं दोनों के हाथ है। दोनों मिलकर राजा और प्रजा के बीच के पवित्र समझौते पर अमल करें। मुझे पक्का विश्वास है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह पूरा न्याय देश के साथ करेंगे। मेरे कहे का बुरा भी नहीं मानेंगे क्योंकि दोनों मुझ से छोटे हैं।-मा. मोहन लाल

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